Iran Unrest: ईरान में फंसे 2000 कश्मीरी छात्र, परिवार चिंतित, JKSA ने पीएम से उनकी वापसी के लिए लगाई गुहार

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Shikha Bhardwaj

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ईरान में जारी राजनीतिक अस्थिरता और बढ़ती हिंसा के बीच जम्मू–कश्मीर के करीब 2000 छात्र वहां फंस गए हैं। हालात लगातार बिगड़ने से इन छात्रों के परिवार गहरी चिंता में हैं। कई छात्रों का अपने घरवालों से संपर्क भी टूट गया है, जिससे परिजनों की बेचैनी और बढ़ गई है। जम्मू एंड कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन (JKSA) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्रालय से हस्तक्षेप कर इन छात्रों को सुरक्षित भारत लाने की अपील की है।

Iran Unrest:ईरान में फंसे 2000 कश्मीरी छात्र, परिवार चिंतित, Jksa ने पीएम  से उनकी वापसी के लिए लगाई गुहार - Bring Our Children Back: Parents Of  Kashmiri Students In Iran Appeal To

जानकारी के मुताबिक ईरान के तेहरान, क़ोम, मशहद और अन्य शहरों में बड़ी संख्या में कश्मीरी छात्र मेडिकल और तकनीकी शिक्षा ले रहे हैं। पिछले कुछ हफ्तों से वहां हो रहे प्रदर्शनों और सुरक्षा बलों की सख्ती के कारण सामान्य जनजीवन प्रभावित है। इंटरनेट सेवाएं बाधित हैं, परिवहन व्यवस्था ठप पड़ी है और कई इलाकों में कर्फ्यू जैसे हालात बन गए हैं। ऐसे में भारतीय छात्रों के लिए बाहर निकलना मुश्किल हो गया है।

छात्रों के अभिभावकों का कहना है कि उनके बच्चे डर के साए में जी रहे हैं। श्रीनगर, अनंतनाग और बारामूला के कई परिवारों ने बताया कि पिछले कई दिनों से बच्चों से ठीक से बात नहीं हो पा रही है। कुछ छात्रों ने संदेश भेजकर खाने-पीने की दिक्कत और सुरक्षा खतरे की जानकारी दी है। परिजनों ने केंद्र सरकार से तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने की मांग की है।

JKSA के राष्ट्रीय संयोजक ने बयान जारी कर कहा कि ईरान में हालात बेहद संवेदनशील हैं और भारतीय दूतावास को आपातकालीन हेल्पलाइन सक्रिय करनी चाहिए। संगठन ने विशेष उड़ानें चलाने, अस्थायी शेल्टर बनाने और छात्रों को आर्थिक मदद देने की मांग भी रखी है। उनका कहना है कि कई छात्र छोटे शहरों में फंसे हैं, जहां भारतीय मिशन की सीधी पहुंच नहीं है।

सूत्रों के अनुसार विदेश मंत्रालय स्थिति पर नजर बनाए हुए है और ईरान स्थित भारतीय दूतावास छात्रों से संपर्क साधने की कोशिश कर रहा है। कुछ छात्रों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया गया है, लेकिन बड़े स्तर पर निकासी की योजना अभी बननी बाकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तनाव और बढ़ा तो तत्काल “ऑपरेशन गंगा” जैसी निकासी मुहिम चलानी पड़ सकती है।

फिलहाल कश्मीर के हजारों परिवार अपने बच्चों की सलामती की दुआ कर रहे हैं। सभी की नजर अब केंद्र सरकार के अगले कदम पर टिकी है कि कब उनके बच्चे सुरक्षित वतन लौट पाएंगे।

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Author: Shikha Bhardwaj

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