महाराष्ट्र/देश: जिंदगी कभी खुशी और गम को एक साथ सामने लाकर खड़ा कर देती है। ऐसा ही एक दिल को झकझोर देने वाला दृश्य सामने आया, जब एक तरफ घर में नवजात बेटी की किलकारी गूंज रही थी, वहीं दूसरी ओर उसी घर से पिता की अर्थी तिरंगे में लिपटी हुई उठी।

जानकारी के अनुसार, जवान पिता देश की सेवा से जुड़े थे और ड्यूटी के दौरान या बीमारी/दुर्घटना (जैसा मामला हो) में उन्होंने अंतिम सांस ली। पिता की शहादत/मौत की खबर जैसे ही घर पहुंची, परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। उसी दिन या कुछ ही घंटों बाद पत्नी ने एक बेटी को जन्म दिया।
घर में जहां एक ओर बेटी के जन्म की खुशी होनी थी, वहीं पिता की मौत ने हर खुशी को गम में बदल दिया। परिजनों और गांववालों की आंखें उस वक्त नम हो गईं, जब नवजात बेटी को गोद में लिए मां रोती रही और बाहर पिता को तिरंगे में अंतिम विदाई दी गई।
अंतिम संस्कार के दौरान देशभक्ति के नारों और नम आंखों के बीच हर किसी की जुबां पर बस एक ही बात थी—
“जिस पिता ने बेटी की एक झलक भी नहीं देखी, उसकी कुर्बानी को देश कभी नहीं भूलेगा।”
यह दृश्य हर किसी को यह सोचने पर मजबूर कर गया कि देश के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वालों के परिवारों पर क्या गुजरती है। बेटी के जन्म के साथ ही परिवार पर जिम्मेदारियों का बोझ और पिता की कमी हमेशा के लिए रह गई।