पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया एनआरआई करमजीत सिंह धालीवाल के मुरीद हो गए। मोगा के गांव सेदोके में आयोजित कार्यक्रम में राज्यपाल ने शिरकत की और एनआरआई धालीवार की जमकर तारीफ भी की।

मोगा जिले के गांव सेदोके में मंगलवार को सेवा एवं सद्भावना सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने विशेष अतिथि के रूप में शिरकत की। इस सम्मेलन का आयोजन गांव सेदोके के निवासी एवं प्रसिद्ध एनआरआई करमजीत सिंह धालीवाल की अगुवाई में किया गया। कार्यक्रम में एचएच जैन आचार्य लोकेश और पूर्व आईपीएस अधिकारी जतिंदर सिंह आलेख ने भी मौजूद रहे। एनआरआई करमजीत सिंह धालीवाल के समाजसेवा कार्यों को लेकर राज्यपाल कटारिया भी उनके मुरीद हो गए।
एनआरआई करमजीत सिंह धालीवाल लंबे समय से अपने क्षेत्र में सामाजिक उत्थान, गांवों के विकास और जरूरतमंदों की सहायता के कार्यों के लिए जाने जाते हैं। एचएच जैन आचार्य लोकेश और
राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने कहा कि पैसा सबके पास हो सकता है, लेकिन सेवा का भाव हर किसी में नहीं होता। उन्होंने बताया कि जब उन्हें करमजीत सिंह धालीवाल द्वारा आयोजित इस सम्मेलन का निमंत्रण मिला तो वह सेवा भावना से जुड़े इस कार्यक्रम में अवश्य आना चाहते थे। करमजीत सिंह धालीवाल एक उत्कृष्ट समाजसेवी हैं और ऐसे लोगों के कार्यों में सबको हाथ बंटाना चाहिए। मैं इसी सोच के साथ मोगा के इस छोटे से गांव में पहुंचा हूं, जहां से बड़े स्तर पर सेवा का काम हो रहा है। गवर्नर ने प्रशंसा की कि करमजीत सिंह धालीवाल विदेश में रहते हुए भी अपने बच्चों को गांव के सरकारी स्कूल में पढ़ाते हैं और उन्हें पंजाब की संस्कृति से जोड़कर रखते हैं। उनके संस्कार और सभी समुदायों के लिए समान भावना प्रशंसनीय है। दूसरों की मदद करना सबसे बड़ा धर्म है।
कटारिया ने कहा कि वह पंजाब के हर कोने में इसलिए जाते हैं ताकि लोगों की समस्याओं को समझकर उनका समाधान किया जा सके। गुरुओं की धरती कहलाने वाले पंजाब के वर्तमान हालातों पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि पंजाब नशे की चपेट में है और इसे बचाने के लिए सबको एकजुट होना होगा। पंजाब के लोग हमेशा एक-दूसरे के लिए खड़े रहे हैं, चाहे ऑपरेशन सिंदूर रहा हो या बाढ़ के दौरान लोगों की सामूहिक सहायता। समाज के कल्याण के लिए करमजीत सिंह धालीवाल जैसे और लोगों का आगे आना आवश्यक है। चाहे व्यक्ति कितना भी बड़ा हो, अपनी जन्मभूमि को कभी नहीं भूलना चाहिए। हम जनता के टैक्स से वेतन लेते हैं। इसलिए जनसेवा ही हमारी जिम्मेदारी है और मैं इसे पूरी निष्ठा से निभाता रहूंगा। किसी को भी कोई समस्या हो, हमें पत्र लिखकर भेजें, हम अवश्य सुनेंगे।