
पूरे देश का लगभग 8.5 प्रतिशत अनुसूचित समुदाय बिहार में रहता है। अकेले बिहार में दलितों की आबादी 19 प्रतिशत से अधिक मानी जाती है। इसमें चर्मकार, दुसाध, रैदासिया, पासवान सहित सैकड़ों छोटी-छोटी उपजातियां हैं। यह मतदाता चिराग पासवान और जीतनराम मांझी जैसे नेताओं के कारण मोटे तौर पर एनडीए के साथ है। लेकिन इसका एक बड़ा हिस्सा महागठबंधन के साथ भी है जो तेजस्वी यादव के एमवाई समीकरण को अतिरिक्त मजबूती देने का काम करता है।
2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में बसपा ने चैनपुर सीट जीती थी। बाद में इसके विधायक मोहम्मद जमाल खान जदयू में शामिल हो गए थे। 2005 में उसे भभुआ सीट पर जीत मिली थी। इस बार भी बसपा को कुछ सीटों पर जीत मिलने का अनुमान है। लेकिन मायावती सीटों के जीत हार से ज्यादा अपने मतदाताओं के एकत्रीकरण पर जोर देकर अपनी ताकत दिखाना चाहती हैं। यही कारण है कि कई दलों को मायावती से नुकसान होने का खतरा है।
मायावती की सबसे बड़ी प्राथमिकता उत्तर प्रदेश है जहां 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। पार्टी उसके लिए अभी से पूरी तैयारी कर रही है। बिहार में बसपा का असर यूपी से सटे इलाकों में सबसे ज्यादा है। लेकिन यदि वह यहां अच्छे तरीके से अपने वोट बैंक को जागृत कर पाती है तो बिहार से सटे यूपी के दलित मतदाताओं में एक अच्छा संदेश दिया जा सकेगा। यही कारण है कि बसपा बिहार चुनाव में खूब हाथ पांव मार रही है।
जनता समझदार, निर्णायक वोट करेगी- भाजपा
हालांकि, भाजपा और कांग्रेस दोनों ही इस बात से इनकार कर रहे हैं कि मायावती के मजबूत होने से उन्हें कुछ नुकसान हो सकता है। भाजपा नेता सुप्रिया सिंह ने अमर उजाला से कहा कि लोकसभा से लेकर विभिन्न राज्यों तक जनता लगातार निर्णायक वोट दे रही है। वह कोट काटने वाली पार्टियों को वोट देकर अपना वोट बर्बाद नहीं करना चाहती। उन्होंने कहा कि बिहार की जनता विकास के लिए वोट करेगी। उन्हें पता है कि यह चुनाव बिहार के लिए करो या मरो वाला चुनाव है। लोग अपने बच्चों के सुखद भविष्य के लिए और बिहार के विकास के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार के नेतृत्व वाले एनडीए को वोट करेंगे।
कांग्रेस नेता विश्व विजय सिंह ने अमर उजाला से कहा कि इस देश के दलितों ने बार-बार दूसरे दलों को आजमाकर देख लिया है कि उनके अधिकारों की लड़ाई केवल कांग्रेस लड़ रही है। राहुल गांधी ने देश के हर हिस्से में दलितों के अधिकारों के लिए आवाज बुलंद किया है। वे संविधान बचाने से लेकर दलितों के अधिकारों के लिए कई बार केंद्र और भाजपा की सरकारों से टकराते देखे जा रहे हैं। ऐसे में उन्हें पूरा विश्वास है कि बिहार का दलित समुदाय एकजुट होकर महागठबंधन को जिताने का काम करेगा जो उसके अधिकारों की लड़ाई लड़ेगा। कांग्रेस नेता ने कहा कि दलित समुदाय किसी ऐसी पार्टी को वोट देने की गलती नहीं करेगा जो न तो सत्ता में आने वाला है और कुछ वोट काटकर वह केवल भाजपा को लाभ पहुंचाने का काम करने के लिए बिहार आया हुआ है।



