फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स की नई रिपोर्ट में भारत के मनी लॉन्ड्रिंग मामलों की जांच करने वाली ईडी की कार्यशैली को वैश्विक मान्यता दी गई है। रिपोर्ट में ईडी के कई केसों का उदाहरण भी दिया गया। एफएटीएफ ने भारत के कानूनी ढांचे और संपत्ति जब्ती तंत्र को दुनिया का सबसे बेहतरीन मॉडल बताा।

रिपोर्ट में इन मामलों का जिक्र
रिपोर्ट में ईडी के कई मामलों का जिक्र किया गया है, जिनमें रोज वैली पोंजी घोटाले के पीड़ितों को संपत्ति लौटाने, अमेरिका से प्राप्त एक ड्रग्स तस्करी केस में 130 करोड़ रुपये के बिटकॉइन जब्त करने, और आंध्र प्रदेश पुलिस सीआईडी के साथ मिलकर एक निवेश धोखाधड़ी में 6,000 करोड़ रुपये की संपत्तियां बहाल करने की मिसालें दी गई हैं। इन मामलों में ईडी की तेजी और पारदर्शिता को एफएटीएफ ने अपनी रिपोर्ट में खूब सराहा।
महाराष्ट्र के इस केस भी मिली सराहना
रिपोर्ट में ईडी के एक विशेष केस का जिक्र किया गया है, जो महाराष्ट्र के एक सहकारी बैंक में सार्वजनिक धन की हेराफेरी से जुड़ा है। ईडी ने इस मामले में 280 करोड़ रुपये की बेनामी संपत्तियां जब्त कीं और उनकी नीलामी से प्राप्त राशि पीड़ितों को लौटाई। एफएटीएफ ने इस उदाहरण को सामाजिक उपयोग वाली संपत्ति जब्ती का मॉडल बताया, क्योंकि जब्त जमीन को भारत में नए हवाई अड्डे के निर्माण स्थल के रूप में उपयोग किया जा रहा है, जिससे आम जनता को सीधा लाभ मिलेगा।
पीएमएलए कानून को बताया अहम
एफएटीएफ ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि भारत के प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) और ईडी की कार्यप्रणाली ने अंतरराष्ट्रीय दिशा-निर्देशों को आकार देने में अहम भूमिका निभाई है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने वैल्यू-बेस्ड कॉन्फिस्केशन, प्रोविजनल अटैचमेंट और एजेंसियों के बीच समन्वय के क्षेत्र में अभूतपूर्व दक्षता दिखाई है। इस रिपोर्ट पर ईडी ने बयान में कहा कि भारत के योगदान को एफएटीएफ ने व्यापक रूप से सराहा है और इसे विश्वस्तरीय उदाहरण के रूप में मान्यता दी है।
Author: planetnewsindia
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