UP: ‘लकड़ी काली है…शादी नहीं करूंगा’, युवती का रंग काला बताकर मंगेतर ने तोड़ा रिश्ता; लड़का खुद भी गोरा नहीं

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अमरोहा में एक युवक ने युवती का रंग काला बताकर रिश्ता तोड़ दिया। आरोप है कि रिश्ते से पहले परिवार ने लड़के को लड़की दिखाई थी। उस समय उसने कुछ नहीं कहा था।

Fiance Broke Relationship By Saying That Girl Is Dark In Complexion Girl  Family Lodged Complaint Police Amroha - Amar Ujala Hindi News Live -  Up:'लकड़ी काली है...शादी नहीं करूंगा', युवती का रंग

अमरोहा के हसनपुर में रिश्ता तय होने के बाद मंगेतर ने युवती का रंग काला बता दिया और शादी करने से इंकार कर दिया। लड़की पक्ष ने युवक को काफी समझाया, लेकिन वह शादी करने के लिए तैयार नहीं है। लड़की पक्ष ने थाने पहुंचकर मामले की शिकायत की है।

यह मामला कोतवाली क्षेत्र के गांव से जुड़ा है। गांव निवासी एक किसान ने अपनी बेटी का रिश्ता करीब दो माह पहले सैदनगली थाना क्षेत्र के गांव निवासी युवक से तय किया था, रिश्ता तय होने से पहले लड़का और लड़की दोनों ने एक दूसरे को सामने से दिखाया गया था और बातचीत भी कराई थी।

रिश्ता तय होने के बाद दोनों परिवारों में शादी की तैयारियां शुरू हो गईं। शादी की तिथि निर्धारित की जानी बाकी थी, इसी बीच युवक ने शादी से इंकार कर दिया। जब घर वालों ने उससे वजह पूछी तो कहा कि लड़की का रंग काला है।

लड़के के घरवालों ने फोन करके यह जानकारी लड़की के पिता को दी। लड़की के पिता ने हवाला दिया कि रिश्ता तय होने से पूर्व यह बात लड़के ने क्यों ने देखी, जबकि लड़के का रंग भी गोरा नहीं है।

इस बात से खफा होकर लड़की पक्ष के लोगों ने रविवार को कोतवाली पहुंचकर मामले की शिकायत पुलिस से की। पुलिस ने फोन पर ही लड़के पक्ष से संपर्क करने की कोशिश की। हालांकि इस मामले में अभी कोई नतीजा नहीं निकल पाया है। सीओ दीप कुमार पंत ने बताया कि मामले की जांच कराई जाएगी।

सबसे ज्यादा पड़ गई

संजय भाटिया ने लोकसभा चुनाव में रचा था इतिहास संजय भाटिया कुरुक्षेत्र विश्वविद्याल ग्रेजुएट हैं। इनका जन्म हरियाणा के पानीपत जिले में हुआ है। वह भाजपा के महामंत्री भी रह चुके हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के प्रत्याशी संजय भाटिया ने अपने पहले ही लोकसभा चुनाव में इतिहास रच दिया था। उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी को 6.54 लाख मतों के अंतर से मात दी थी। संजय भाटिया ने प्रदेश के 53 साल के इतिहास में सबसे बड़ी जीत दर्ज की थी। उन्हें कुल 909432 वोट मिले थे। उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी कुलदीप शर्मा को 654269 वोटों के अंतर से हराया था। राहुल गांधी ने दिया था कर्मवीर के नाम का सुझाव वहीं कर्मवीर सिंह बौद्ध किसी भी गुट या खेमे से जुड़े हुए नेता नहीं माने जाते। यही कारण है कि उन्हें संगठन के भीतर एक संतुलित और सर्व स्वीकार्य चेहरे के रूप में देखा जा रहा है। वे ‘संविधान बचाओ अभियान’ में सक्रिय रूप से शामिल रहे हैं और जमीनी स्तर पर पार्टी के कार्यक्रमों में भागीदारी निभाते रहे हैं। एससी समुदाय से आने वाले कर्मवीर सिंह बौद्ध सामाजिक संतुलन के नजरिये से भी एक अहम दावेदार है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने स्वयं उनके नाम का सुझाव दिया है। अंबाला के मुलाना विधानसभा में रहने वाले कर्मवीर सिंह प्रशासकीय अधिकारी के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं और लंबे समय से कांग्रेस से जुड़कर कार्य कर रहे थे। कांग्रेस ने उन्हें हिमाचल प्रदेश में एससी सेल का प्रभारी भी बनाया था। राष्ट्रीय स्तर पर वह कन्वीनर भी हैं।