हल्द्वानी/नैनीताल, 30 अगस्त — उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में डिजिटल अरेस्ट के मामलों में चिंताजनक बढ़ोतरी देखी जा रही है। साइबर ठग खुद को सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर बुजुर्गों को वीडियो कॉल पर धमकाते हैं, उन्हें बंद कमरे में कई दिनों तक मानसिक दबाव में रखते हैं और उनकी जीवन भर की कमाई को मिनटों में खातों से गायब कर देते हैं।

📌 हालिया घटनाएं जो चेतावनी देती हैं:
- 26 अगस्त 2025: मल्लीताल क्षेत्र के रिटायर्ड कुलपति से ₹1.47 करोड़ की ठगी।
- 24 जुलाई 2025: रानीखेत की सेवानिवृत्त शिक्षिका से ₹61 लाख की साइबर ठगी।
- 23 जुलाई 2025: बेतालघाट निवासी CRPF रिटायर्ड सब इंस्पेक्टर से ₹60 लाख की ठगी।
- 8 फरवरी 2025: हल्द्वानी निवासी सेना से रिटायर्ड बुजुर्ग से ₹16 लाख की ठगी।
- 25 अप्रैल 2024: बिठौरिया निवासी सेवानिवृत्त प्रवक्ता से ₹4 लाख की ठगी।
🎭 ठगी का तरीका:
- पीड़ित को बताया जाता है कि उनके आधार/पैन कार्ड का उपयोग मनी लॉन्ड्रिंग या ड्रग्स केस में हुआ है।
- उन्हें धमकाया जाता है कि गिरफ्तारी या एनकाउंटर हो सकता है।
- वीडियो कॉल पर उन्हें डिजिटल अरेस्ट में रखा जाता है — यानी किसी से बात न करने का दबाव।
- डर के माहौल में पीड़ित अपने बैंक खातों से बड़ी रकम ट्रांसफर कर देते हैं।
🛡️ बचाव के लिए ज़रूरी सावधानियां:
- किसी भी कॉल पर बैंक डिटेल्स, OTP, पिन, आधार नंबर साझा न करें।
- अकेले निर्णय न लें, किसी भरोसेमंद व्यक्ति से तुरंत बात करें।
- सरकारी अधिकारी या बैंक के नाम पर धमकी मिले तो नंबर ब्लॉक करें।
- किसी भी संदिग्ध दबाव को ठगी का संकेत मानें।
- तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें।
👮 कार्रवाई और अपील:
उत्तराखंड STF ने हाल ही में रांची से दो साइबर ठगों को गिरफ्तार किया है, जिन्होंने ₹1 करोड़ से अधिक की ठगी को अंजाम दिया था। गिरोह का मास्टरमाइंड आगरा से पकड़ा गया, जिसने स्काइप और व्हाट्सएप कॉल के जरिए पीड़ितों को फर्जी नोटिस भेजकर डराया और लाखों रुपये ठगे|