उन्होंने बताया कि इन पहलों के चलते भारत में मध्यस्थता की प्रक्रिया अब पहले से तेज, अधिक प्रभावी और अधिक भरोसेमंद हो गई है। उन्होंने आगे कहा, भारत और सिंगापुर दो मजबूत लोकतांत्रिक और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाएं हैं। दोनों मिलकर निष्पक्ष, पारदर्शी और प्रभावी विवाद समाधान में वैश्विक मानक बना सकते हैं। इससे हमारे साझा प्रतिबद्धता को स्थिरता और सतत विकास को और बल मिलेगा। मेघवाल तीन दिवसीय सिंगापुर पर हैं। उन्होंने कहा कि यह प्रगति अनुबंधों को लागू करने की प्रक्रिया को मजबूत बनाएगी और सभी निवेशकों के बीच विश्वास को बढ़ावा देगी।
आईसीए ने कहा कि यह संगोष्ठी भारत-सिंगापुर के कानूनी और आर्थिक सहयोग को और गहरा करने का एक उपयुक्त और रणनीतिक अवसर है। दोनों देशों के बीच वैकल्पिक विवाद समाधान (एडीआर) के क्षेत्र में सहयोग न केवल परस्पर लाभकारी है, बल्कि यह वैश्विक कानूनी और आर्थिक चर्चाओं में एशिया की आवाज को आगे बढ़ाने के लिए भी बेहद अहम है।
मंत्री मेघवाल बुधवार को एक उच्च स्तरीय कानूनी विशेषज्ञों के प्रतिनिधिमंडल के साथ सिंगापुर पहुंचे, जिसमें आईसीए के अध्यक्ष एन. जी. खैतान और आईसीए के महानिदेशक अरुण चावला भी शामिल हैं।