Ganesh utsav 2025: आइए जानते हैं महाराष्ट्र के 5 सबसे प्रसिद्ध और सुंदर गणपति पंडालों के बारे में, जहां के नजारा देख और खासियत जान आप का मन भी जाने के लिए तैयार हो जाएगा।

Famous Ganpati Pandals : गणेशोत्सव का नाम आते ही महाराष्ट्र की रौनक आँखों के सामने तैर जाती है। ढोल-ताशों की गूंज, रंग-बिरंगी लाइटों की चमक और भक्ति से लबालब सड़कों पर जब बप्पा पधारते हैं तो हर शहर स्वर्ग सा नजर आता है। खासकर मुंबई और पुणे, जहां हर साल लाखों श्रद्धालु गणपति पंडालों के दर्शन करने पहुंचते हैं। इस वर्ष गणेशोत्सव की शुरुआत 26 अगस्त 2025 को गणेश चतुर्थी से हो रही है, जिसका समापन 6 सितंबर को गणेश विसर्जन के साथ होगा।

लालबागचा राजा, मुंबई
यह मुंबई का सबसे प्रसिद्ध और प्रतिष्ठित गणपति पंडाल है। करीब 18 फीट ऊंची प्रतिमा हर साल लाखों भक्तों को आकर्षित करती है। यहां की सजावट, चमचमाती लाइटिंग और भव्य फूलों से सजी प्रतिमा महाराष्ट्र की विविधता और एकता का प्रतीक है। भक्तों की लंबी-लंबी कतारें इस पंडाल की लोकप्रियता का सबूत हैं।

श्रीमंत दगडूशेठ हलवाई गणपति, पुणे
100 साल से भी ज्यादा पुराना यह मंदिर पुणे का धार्मिक हृदय है। गणेशोत्सव के दौरान यहां की सजावट और आध्यात्मिक वातावरण श्रद्धालुओं को अनूठा अनुभव देता है। कहा जाता है कि यहां बप्पा की मनोहारी प्रतिमा से दर्शन करने वाले हर भक्त का मन तुरंत प्रसन्न हो जाता है।

चिंचपोकळिचा चिंतामणि, मुंबई
मुंबई के सबसे पुराने गणपति पंडालों में से एक। यहां पारंपरिक सजावट और सरल उत्सव शैली बप्पा के असली रूप का अहसास कराती है। यह पंडाल उन श्रद्धालुओं के लिए खास है जो भव्यता से ज्यादा सादगी और आध्यात्मिक शांति की तलाश करते हैं।

श्री कस्बा गणपति, पुणे
साल 1893 में स्थापित यह गणपति पुणे का ‘मानाचा पहिला गणपति’ कहलाता है। परंपरा के अनुसार, गणेशोत्सव में सबसे पहले इसी प्रतिमा का विसर्जन किया जाता है। पुणेकरों की आस्था इस पंडाल से गहराई से जुड़ी है और यहां दर्शन के लिए हजारों लोग उमड़ते हैं।

जीएसबी सेवा मंडल, मुंबई
माटुंगा के किंग्स सर्कल में स्थित यह पंडाल अपनी भव्यता और ऐश्वर्य के लिए जाना जाता है। यहां की प्रतिमा 69 किलो सोने और 336 किलो चांदी के गहनों से सजी होती है। इसे ‘गोल्डन गणपति’ भी कहा जाता है। हर साल इस पंडाल की झलक पाने के लिए भक्त बड़ी संख्या में पहुंचते हैं।