
यमुनानगर। निजी अस्पताल में छापामारी के दौरान महिला डॉक्टर से स्वास्थ्य विभाग के दो डॉक्टरों पर लगे दुर्व्यवहार करने के आरोप का मामले ने वीरवार को तूल पकड़ लिया। आईएमए के आह्वान पर महिला डॉक्टर के समर्थन व सरकारी दो डॉक्टरों पर कार्रवाई की मांग के लिए जिले के 102 निजी अस्पतालों में 12 घंटे तक ओपीडी-आईपीडी बंद रखी गई।
डॉक्टरों ने सिर्फ गंभीर मरीजों का इलाज किया। अन्य मरीज जांच व इलाज के लिए भटकते रहे, जिन्हें शाम छह बजे ओपीडी-आईपीडी शुरू होने पर राहत मिली। इससे पूर्व सुबह महिला डॉक्टर व आईएमए पदाधिकारी डीसी पार्थ गुप्ता से मिले, जिसमें सीएमओ डॉ. मंजीत सिंह को बुलाकर डीसी ने जांच के निर्देश दिए। डॉ. मंजीत ने तीन सदस्य कमेटी बनाई, जिसे एक हफ्ते जांच रिपोर्ट देनी है।
जिला सचिवालय में डीसी से मिलने पहुंची संतोष अस्पताल के संचालक डॉ. लोकेश की पत्नी डॉ. प्रियंका ने बताया कि बुधवार को जगाधरी एसडीएम विश्वनाथ की अगुवाई में स्वास्थ्य विभाग की टीम अस्पताल पहुंची थी। टीम ने अस्पताल में आयुष्मान भारत योजना पोर्टल पर मरीजों का डाटा देखा जो शून्य था। टीम ने इसका स्क्रीन शॉट लिया। टीम को बताया कि आईएमए के समर्थन में सात अगस्त से अस्पताल में आयुष्मान योजना में मरीजों काे कैशलेस इलाज नहीं कर रहे हैं। ऐसे मरीजों को हम सिविल अस्पताल में भेज रहे हैं। जो मरीज सिविल अस्पताल नहीं जाना चाहते और उनके अस्पताल में इलाज करना चाहता है। ऐसे मरीजों से लिखित में ले रहे हैं कि वह यहां कैश में इलाज कराना चाहते हैं। टीम को बताया कि अस्पताल में चार ऐसे मरीज हैं, जिनका आयुष्मान कार्ड है। तीन मरीज वार्ड में हैं और एक अस्पताल के निजी कमरे में। वार्ड के तीन मरीज गवर्नमेंट रिजर्व पैकेज वाले थे, जिनका सरकारी अस्पताल में कैशलेस इलाज हो सकता था, पर निजी अस्पताल में नहीं। तीनों मरीज चाहते थे कि वह उनके अस्पताल में कैश देकर इलाज कराएं, इस बारे उनसे लिखित में लिया था। यह बात टीम को भी बताई, पर टीम के सदस्यों ने कहा कि यह बात स्पष्टीकरण में देना। अभी वह केस बनाएंगे कि ये मरीज यहां गलत भर्ती किए। टीम निजी कमरे में गई, जहां उन्होंने मरीज से कहा कि अस्पताल में जो कैश जमा कराया है उसकी रसीद दिखाओ वह उसकी फोटो लेंगे। वह कमरे में पहुंची तो मरीज की माता ने कहा कि ये लोग जबरदस्ती कर रहे हैं कि अपना आयुष्मान कार्ड लाओ। मरीज की माता ने उन्हें बताया कि वह आयुष्मान के बजाय अच्छी सुविधा में इलाज चाहते हैं, चूंकि आयुष्मान में एसी कमरा नहीं मिलेगा। तब स्वास्थ्य विभाग के दोनों डॉक्टरों ने उन्हें कमरे से निकलने के लिए कह कर दुर्व्यवहार किया है। जिस संबंध में उन्होंने आईएमए के पदाधिकारियों को बताया और दोनों डॉक्टरों पर कार्रवाई की मांग की।
आईएमए के राज्य सचिव डॉ. धीरेंद्र कुमार सोनी ने बताया कि महिला डॉक्टर से दुर्व्यवहार के विरोध में बुधवार शाम जिमखाना क्लब में बैठक की। इसमें लिए फैसला अनुसार जिले के सभी निजी अस्पतालों में वीरवार सुबह छह से शाम छह बजे तक ओपीडी-आईपीडी बंद रखी गई। सिर्फ इमरजेंसी में गंभीर मरीजों का इलाज किया। साथ ही डीसी पार्थ गुप्ता मिले, जिन्होंने उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया। बाद में सीएमओ डॉ. मंजीत सिंह से सिविल अस्पताल में मिलकर ज्ञापन सौंपा। इसमें दोनों डॉक्टरों पर सख्त कार्रवाई की मांग की। शाम में आईएमए पदाधिकारियों ने जिमखाना क्लब में प्रेसवार्ता की। इसमें महिला डॉक्टर से दुर्व्यवहार की निंदा की गई। साथ ही बताया कि आयुष्मान योजना में निजी अस्पतालों ने 15 दिन से इलाज बंद कर रखा है, चूंकि सरकार द्वारा भुगतान समय पर नहीं है। सरकार द्वारा समस्या समाधान के लिए बातचीत भी नहीं की जा रही।