हरियाणा के भिवानी में शिक्षिका मनीषा की मौत के मामले में अब परिजनों ने पुलिस की जांच पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजनों का कहना है कि घटना के पांच दिन बाद सोमवार को उन्हें सोशल मीडिया से यह जानकारी मिली कि मनीषा के शव के पास से एक सुसाइड नोट भी बरामद हुआ था।
परिजनों ने आरोप लगाया कि इस महत्वपूर्ण तथ्य की जानकारी पुलिस ने उन्हें शुरू से नहीं दी। उनका कहना है कि अगर सुसाइड नोट मिला था, तो इसकी आधिकारिक जानकारी परिवार को तुरंत दी जानी चाहिए थी। इस चुप्पी के बाद परिवार ने पुलिस की “सुसाइड थ्योरी” पर भरोसा जताने से इंकार कर दिया है और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
भिवानी में शिक्षिका मनीषा की मौत मामले में नया खुलासा हुआ है। पुलिस के अनुसार, 13 अगस्त को शव के पास से हरियाणवी लहजे में लिखा सुसाइड नोट मिला था। जांच में यह भी सामने आया कि मनीषा ने 11 अगस्त को कीटनाशक खरीदा था। फिलहाल पोस्टमार्टम और एफएसएल रिपोर्ट पर विशेषज्ञ राय ली जा रही है। रिपोर्ट आने के बाद ही साफ होगा कि मामला आत्महत्या है या हत्या।
भिवानी में 19 वर्षीय शिक्षिका मनीषा की मौत का मामला उलझता जा रहा है। 11 अगस्त को घर से प्ले स्कूल के लिए निकली मनीषा का शव 13 अगस्त को सिंघानी नहर के पास बाजरे के खेतों में मिला था। पुलिस ने एफएसएल टीम से जांच कराई और वारदात स्थल का दो बार निरीक्षण भी किया, लेकिन अब तक न कोई गिरफ्तारी हुई है और न ही कोई ठोस सुराग मिला है।
इस बीच, पुलिस द्वारा पेश की गई सुसाइड थ्योरी पर परिजनों ने आपत्ति जताई है। परिवार का कहना है कि उन्हें मनीषा की मौत के पांच दिन बाद सोशल मीडिया से पता चला कि शव के पास से एक सुसाइड नोट बरामद हुआ था, जबकि पुलिस ने इसकी जानकारी पहले कभी साझा नहीं की। मामले में पारदर्शिता की कमी को लेकर परिजन सवाल उठा रहे हैं और न्याय की मांग कर रहे हैं।
मीडिया से बात करते हुए मनीषा के दादा रामकिशन भावुक हो उठे। उन्होंने बताया कि मनीषा हर छोटी-बड़ी बात उनसे साझा करती थी और उसका सपना था तीन साल का नर्सिंग कोर्स करना। रामकिशन ने उसे भरोसा दिलाया था कि अगर पिता मदद न भी करें तो वह खुद उसकी पढ़ाई का खर्च उठाएंगे। उन्होंने सवाल उठाया कि इतनी हिम्मती और सपनों से भरी पोती आखिर आत्महत्या कैसे कर सकती है।
परिजनों का कहना है कि पुलिस सुसाइड नोट का हवाला देकर मामले को गलत दिशा में मोड़ने की कोशिश कर रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि कोई व्यक्ति खुद अपना गला कैसे काट सकता है या चेहरे पर तेजाब कैसे डाल सकता है। जिस दिन शव खेत से मिला था, उसी दिन पुलिस ने माना था कि यह हत्या है, लेकिन अब सुसाइड थ्योरी बताकर सच दबाने की कोशिश की जा रही है। परिजनों ने साफ कहा कि मनीषा को न्याय दिलाने के लिए वे हर स्तर पर संघर्ष करेंगे।
शंका जताई जा रही है कि मनीषा की मौत के कई घंटे बाद जब उसका शव बरामद हुआ, उस दौरान रात में जंगली जानवरों ने उसे नुकसान पहुंचाया हो सकता है। पुलिस के अनुसार, शव से श्वासनली और भोजन नली जैसे कुछ अंग गायब थे, जिससे अंदेशा है कि ये अंग जानवरों ने नोच लिए होंगे। हालांकि, इस पर अभी तक कोई पुख्ता निष्कर्ष नहीं निकाला गया है।
सोमवार शाम दस सदस्यीय जांच समिति एफएसएल रिपोर्ट प्राप्त करने के लिए सुनारिया लैब पहुंची। तय किया गया है कि यह रिपोर्ट चिकित्सकों की मौजूदगी में परिजनों को सौंपी जाएगी। कमेटी में परिवार के सदस्य भी शामिल हैं। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे किसान नेता रवि आजाद ने बताया कि उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक के साथ हुई बैठक में निर्णय लिया गया कि परिवार और कमेटी जांच में सहयोग करेंगे। साथ ही, मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी से धैर्य और संयम बनाए रखने की अपील की गई है।
अब भी कई सवाल अनुत्तरित हैं, जो मामले को और पेचीदा बना रहे हैं—
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अगर शव के पास सुसाइड नोट मिला था, तो पुलिस ने इसे तुरंत सार्वजनिक क्यों नहीं किया?
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क्या उस नोट की लिखावट का मिलान मनीषा की हैंडराइटिंग से कराया गया?
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मनीषा 11 अगस्त से लापता थी, तो 13 अगस्त तक खेतों में शव कैसे अनदेखा रहा?
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परिवार को सुसाइड नोट की जानकारी कब दी गई और पुलिस ने इसे छिपाने की कोशिश क्यों की?
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मनीषा की गर्दन पूरी तरह काटे जाने की असल वजह क्या है?
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यदि शव को जंगली जानवरों ने क्षतिग्रस्त किया था, तो इसका उल्लेख पहली पोस्टमार्टम रिपोर्ट में क्यों नहीं किया गया?
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अगर परिवार में किसी तरह का विवाद था, तो उसका कोई सबूत अब तक सामने क्यों नहीं आया?
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एसपी के तबादले और बड़े कदम उठाए जाने के बावजूद सुसाइड नोट की जानकारी पहले सामने क्यों नहीं आई?
ये सभी सवाल जांच की दिशा और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर संदेह खड़े कर रहे हैं।
मनीषा की मौत की गुत्थी में पुलिस को एक सुसाइड नोट मिला है, साथ ही यह भी सामने आया है कि उसने दुकान से कीटनाशक खरीदा था जिसकी पुष्टि जांच में हो चुकी है। हालांकि, पुलिस का कहना है कि फिलहाल पोस्टमार्टम और एफएसएल रिपोर्ट पर विशेषज्ञ चिकित्सकों की राय ली जा रही है। इन्हीं रिपोर्ट्स के आधार पर यह तय होगा कि मामला आत्महत्या का है या हत्या का।
भिवानी के ढाणी लक्ष्मण की शिक्षिका मनीषा की मौत को लेकर फॉरेंसिक जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। पीजीआई की रिपोर्ट में पुष्टि हुई है कि उनकी मौत कीटनाशक के असर से हुई थी। रिपोर्ट में मोनोप्रोटोफोस इंसेक्टिसाइड पाया गया, जो बेहद घातक और इंसान के लिए जानलेवा माना जाता है।
पीजीआई के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. कुंदन मित्तल ने सोमवार शाम जांच कमेटी के साथ बैठक के बाद बताया कि मनीषा के चेहरे पर तेजाब डालने की आशंका गलत साबित हुई है। उन्होंने कहा कि एफएसएल रिपोर्ट की विस्तृत जांच के लिए पीजीआई में विशेषज्ञ चिकित्सकों का एक पैनल गठित किया गया है, ताकि हर पहलू की सटीक जांच हो सके।
भिवानी में प्रारंभिक पोस्टमार्टम के बाद पीजीआई में भी मनीषा का शव परीक्षण हुआ। ताजा रिपोर्ट में दुष्कर्म की संभावना से इनकार किया गया है। शरीर पर किसी भी प्रकार की चोट के निशान नहीं पाए गए। जांच में सामने आया कि गर्दन पर जो घाव मिले थे, वे जंगली जानवरों के हमले के कारण बने, जिससे गर्दन की हड्डियां भी क्षतिग्रस्त हुईं। रिपोर्ट के अनुसार गला रेतकर हत्या की बात सही नहीं है।
मनीषा की मौत मामले में नया खुलासा हुआ है। पुलिस ने सोमवार को दावा किया कि शव मिलने के पांच दिन बाद घटनास्थल से एक सुसाइड नोट बरामद हुआ था। इसके साथ ही, भिवानी और पीजीआई रोहतक की टीम ने शव के कुछ अंग जांच के लिए मधुबन लैब भेजे हैं। अब इन रिपोर्टों के आने का इंतजार है, जो मामले की सच्चाई उजागर करने में अहम साबित होंगी।
पुलिस का कहना है कि मनीषा ने मौत से पहले 11 अगस्त को एक दुकान से कीटनाशक खरीदा था, जिसकी पुष्टि हो चुकी है। वहीं दूसरी ओर, धरना कमेटी ने पुलिस की जांच पर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग कर दी है।