अलीगढ़ नगर निगम के आंकड़ों के मुताबिक महानगर में ही 60 हजार आवारा कुत्ते हैं। हमलावर होते यही कुत्ते जनवरी से जुलाई तक 72978 लोगों को काट चुके हैं। इनमें बुजुर्ग और बच्चों की संख्या ज्यादा है।

अलीगढ़ शहर में आवारा कुत्तों का बड़ा आतंक है। अब ये आवारा कुत्ते अकेले चलने वालों राहगीरों के लिए बड़ा खौफ बनते जा रहे हैं। राहगीर एवं दो पहिया वाहन चालक रात में अकेले जाने से डरने लगे हैं। राह चलते कब कुत्ते हमला कर दें कोई पता नही हैं। लेकिन जिम्मेदार फिर भी खामोश हैं।
आवारा कुत्तों का खौफ इस कदर छाया हुआ है कि लोग रात तो रात दिन में भी इनके झुंड को देखकर अपना रास्ता बदल लेने में ही भलाई समझते हैं। सड़कों के बाद अब आवारा कुत्तों का झुंड पार्कों में पहुंचने लगा है। जहां पर आने वाले लोगों को कुत्ते काट रहे हैं। इनकी लगातार बढ़ रही आबादी को लेकर न तो नगर निगम प्रशासन संजीदा है और न ही इनकी आबादी को कम करने के लिए किसी तरह का प्रयास किया जा रहा है। शहर में कुत्तों के काटने की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। इसकी पुष्टि जिला मलखान सिंह अस्पताल समेत अन्य सरकारी अस्पतालों में रोजाना लगने वाले रैबीज के इंजेक्शन की संख्या से की जा सकती है।
सात महीने में 72978 लोगों को कुत्तों ने काटा
अलीगढ़ नगर निगम के आंकड़ों के मुताबिक महानगर में ही 60 हजार आवारा कुत्ते हैं। हमलावर होते यही कुत्ते जनवरी से जुलाई तक 72978 लोगों को काट चुके हैं। इनमें बुजुर्ग और बच्चों की संख्या ज्यादा है। यह आंकड़ा सिर्फ उन लोगों का जिन्होंने जिला अस्पताल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर एंटी रेबीज का इंजेक्शन लगवाया है। रेबीज क्लीनिक दीन दयाल अस्पताल में स्थापित है। इस क्लीनिक में प्रतिदिन 35 से 40 नए मरीज और 45 से 50 पुराने उपचार के लिए पहुंचते हैं। जिले भर में जनवरी से जुलाई तक के आंकड़ों में 72978 लोगों को कुत्ते काट चुके हैं।
हो जाएं सावधान
– अगर कुत्ते में रैबीज का संक्रमण है तो शरीर में भी रैबीज के वायरस आने की आशंका बनी रहती है ।
– खासकर अगर कुत्ते ने शरीर के उस कटे हुए हिस्से को चाट लिया हो ।
– कुत्ते के काटने के बाद त्वचा पर उसके एक या दो दांतों के निशान दिखाई दें तो एहतियात बरतना जरूरी है।
– कुत्ते के काटने की अनदेखी घातक हो सकती है। रैबीज का वायरस एक बार शरीर में जाकर कई साल तक रह जाता है।
– हाथ या चेहरे पर काटने के बाद एक भी गहरा निशान बनता है तो यह खतरनाक है।
नगर निगम करे व्यवस्था
कुत्ते के काटने पर लोगों को हल्दी, चूना और नमक के भरोसे नहीं रहना चाहिए। तत्काल चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए। माता-पिता बच्चों को कुत्ते को रोटी खिलाने नहीं भेजें, क्योंकि कुत्तों का व्यवहार कभी भी बदल सकता है और वह हमलावर हो सकता है।– डॉक्टर जितेंद्रवीर सिंह, फिजीशियन
शहर में आबादी के हिसाब से कुत्तों की संख्या 55- 60 हजार है। नगर निगम के स्तर से पिछले तीन साल में करीब 18 हजार से अधिक आवारा कुत्तों को वैक्सीन लगाने के साथ ही उनकी नसबंदी की जा चुकी है। निरंतर यह प्रक्रिया जारी है।– डाॅक्टर राजेश वर्मा, पशु कल्याण अधिकारी, नगर निगम
कुत्ते के काट लेने पर पीड़ित को तुरंत साफ पानी और साबुन से उस जगह को अच्छे से धो लेना चाहिए। क्योंकि कुत्तों के लार में रैबीज नामक कीटाणु होते हैं, जो जानलेवा होते हैं। इसलिए कुत्ते के काटने पर इंजेक्शन लगवाना जरूरी होता है। वैक्सीन की पूरी प्रक्रिया का पालन करना चाहिए। कुत्ते के काटने के बाद इंजेक्शन नहीं लगवाने से मौत तक हो सकती है। पालतू कुत्तों की अपेक्षा स्ट्रीट डॉग को रैबीज होने का खतरा ज्यादा रहता है, क्योंकि इनका नियमित टीकाकरण नहीं हो पाता है।– डॉक्टर दिवाकर वशिष्ठ, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी
नगर निगम प्रशासन फोटो खींच कर झाड़ लेते हैं पल्ला
आवारा कुत्तों को पकड़ने के अभियान में नगर निगम कर्मचारी खानापूर्ति करते हैं। एक या दो जगहों पर कुत्ते को पकड़ने का फोटो खींचकर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं। जो जनहित मे सही नही है। सरकार को इन कर्मचारियों के लिए भी एक गाइड लाइन बनानी चाहिए, जिससे नगर निगम कर्मचारियों के कार्यों की पारदर्शिता बनी रहे ।– आशीष माहेश्वरी, मामू भांजा
पालतू व आवारा कुत्तों की नसबंदी जरूरी
आवारा कुत्तों की नसबंदी आवश्यक रूप से होनी चाहिए, जिससे भविष्य में इनकी जनसंख्या वृद्धि पर थोड़ा अंकुश लग सके। यदि ऐसा नही होता तो फिर सड़को और गलियों में आवारा कुत्ते बच्चों के साथ- साथ बड़ो को भी अपना शिकार बनाएंगे।– तारकेश वार्ष्णेय, किशनपुर, रामघाट रोड
बढ़ती जनसंख्या नियंत्रण के लिए बने कानून
आवारा कुत्तों की बढ़ती जनसंख्या के लिए सरकार को कानून बनाकर नसबंदी आदि योजना चलकर जनसंख्या नियंत्रण करना चाहिए। आवारा कुत्तों को रखने के लिए शहर में पर्याप्त जगह की व्यवथा की जाए। इसके साथ ही नगर निगम द्वारा इन आवारा कुत्तों के लिए जगह की व्यवस्था के बाद इनके खाने का भी इंतजाम करना चाहिए।– मनीष ठाकुर, लाल मंदिर, रामघाट रोड
शिकायतों पर नहीं होती कार्रवाई
शहर में कुत्तों एवं बदरों के हमलों की शिकायतें लगातार की जाती रही हैं, लेकिन इन शिकायतों पर न नगर निगम अफसर ध्यान दे रहे हैं और न ही प्रशासनिक अफसर ही इस ओर ध्यान दे रहे हैं। इससे इनके हमले बढ़ रहे हैं।– अखिलेश शर्मा, नाैरंगाबाद छावनी
बच्चों को अकेले भेजने में लगता है डर
शहर से लेकर देहात तक कुत्तों का अच्छा खासा आतंक देखने को मिल रहा है। राह चलना तक मुश्किल हो रहा है पता नहीं किसी गली, मुहल्ले से अचानक कुत्ता आ जाए और हमलावर हो जाए । बच्चों को अकेले घर से बाहर भेजने में दिक्कतें होती है।– सरिता वार्ष्णेय , एडीए काॅलोनी, सासनीगेट
रात के साथ दिन में भी बना रहता है खतरा
कुत्तों का आतंक रात में ही नहीं दिन में भी देखने को मिल रहा है। शहर की हर गली, मोहल्ले,चौराहों पर आवारा कुत्तों का झुंड बना रहता है। इस ओर शिकायतों के बाद भी कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।– रिचा दीक्षित, बैंक काॅलोनी, प्रीमियर नगर