SC Dismisses Justice Verma plea: सुप्रीम कोर्ट ने कैशकांड में जज वर्मा को दिया झटका, याचिका खारिज।

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Centre elevates Delhi High Court Chief Justice Manmohan as Supreme Court  judge - India Legal

 

सुप्रीम कोर्ट से जस्टिस यशवंत वर्मा को बड़ा झटका लगा है।  याचिका सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी है। जस्टिस वर्मा ने दिल्ली हाई कोर्ट के जज रहते अपने घर से जला हुआ कैश मिलने के मामले में जांच कमेटी की रिपोर्ट को अमान्य करार देने की मांग की थी। इसके साथ ही जस्टिस वर्मा ने तत्कालीन चीफ जस्टिस संजीव खन्ना की उन्हें पद से हटाने के  लिए राष्ट्रपति और पीएम को भेजी गई सिफारिश को भी चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस वर्मा की इस याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि उनकी याचिका विचार के योग्य नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने आंतरिक जांच पैनल और पूर्व CJI संजीव खन्ना द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया को कानूनी और संवैधानिक माना। पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि जब जस्टिस वर्मा खुद जांच समिति की प्रक्रिया में शामिल हुए थे, तो अब वे उसकी वैधता पर सवाल कैसे उठा सकते हैं। जज ने क्या कहा वो बता दें…. इसके साथ ही उन्होंने कहा, ‘प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को पत्र भेजना असंवैधानिक नहीं था. हमने कुछ टिप्पणियां की हैं जिनके तहत भविष्य में अगर जरूरत पड़ी तो आप कार्यवाही कर सकते हैं.’ इस याचिका पर सुनवाई करते हुए अंत में न्यायमूर्ति दत्ता ने बताया कि इन सभी तथ्यों के आधार पर हमने यह रिट याचिका खारिज कर दी है.दरअसल, सुप्रीम कोर्ट की कमेटी ने जस्टिस यशवंत वर्मा को हटाने का प्रस्ताव लाने की सिफारिश की थी.

Supreme Court Dismisses Justice Yashwant Varma's Plea Challenging CJI's  Recommendation For His Removal

याचिका में तत्कालीन CJI संजीव खन्ना द्वारा पीएम और राष्ट्रपति को 8 मई को की गई सिफारिश को रद्द करने की भी मांग थी. याचिका में कहा गया था कि उन्हें व्यक्तिगत सुनवाई का मौका दिए बिना ही दोषी ठहराया गया है. याचिका में तीन सदस्यीय जांच पैनल पर आरोप लगाया है कि उसने उन्हें पूरी और निष्पक्ष सुनवाई का मौका दिए बिना ही प्रतिकूल निष्कर्ष निकाले. सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में कहा कि जांच कमेटी के गठन में कोई कानूनी कमी नहीं थी. हालांकि, कोर्ट ने माना कि उनके घर पर मिले जले हुए कैश का वीडियो अपलोड करना गलत हो सकता है, लेकिन याचिकाकर्ता ने तब उसका विरोध नहीं किया. न ही अपनी याचिका में इसे उठाया. उनके वकील कपिल सिब्बल ने सुनवाई के दौरान जस्टिस वर्मा के घर पर जला हुआ कैश मिलने का वीडियो सार्वजनिक किए जाने का विरोध किया था. उन्होंने कहा था, ‘माहौल पहले ही उनके खिलाफ बना दिया गया. ऐसा खुद चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने किया. उन्होंने सिर्फ इतना ही नहीं किया, कमेटी की रिपोर्ट के बाद जज को पद से हटाने की सिफारिश भी राष्ट्रपति को भेज दी.’

पूर्व सीजेआई संजीव खन्ना की ओर से पद से हटाने और कमेटी गठित करने की सिफारिश राष्ट्रपति को भेजे जाने पर जस्टिस वर्मा की आपत्ति को लेकरसुप्रीम कोर्ट ने आज अपने फैसले में कहा कि इसमें कुछ भी गलत नहीं है. कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी और जस्टिस यशवंत वर्मा पर एफआईआर की मांग वाली वकील मैथ्यूज नेदुंपरा की याचिका भी खारिज दी है.क्या है पूरा कैश कांड….
जस्टिस यशवंत वर्मा कैश कांड इसी साल मार्च में आया. यह विवाद तब शुरू हुआ जब होली की रात यानी 14 मार्च को जस्टिस यशवंत वर्मा के नई दिल्ली स्थित घर से जले हुए नोट मिले. उनके घर पर आग लग गई थी. आग पर काबू पाने के लिए दमकल विभाग की टीम आई थी. इसी टीम ने उनके घर में कैश देखा था. कुछ कैश जले भी बरामद किए गए थे. इस घटना ने न्यायिक हलकों में हड़कंप मचा दिया. इसके बाद जस्टिस वर्मा को दिल्ली हाई कोर्ट से इलाहाबाद हाई कोर्ट भेज दिया गया और आरोपों की जांच के लिए एक आंतरिक समिति गठित की गई. सुप्रीम कोर्ट के पैनल ने हटाने की सिफारिश की थी.

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Author: ILMA NEWSINDIA

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