इस बार पंद्रह जनवरी दिन सोमवार को मनाई जाएगी मकर संक्रांति क्यों कि रविवार चैदह जनवरी की रात्रि दो बजकर चैबीस मिनट पर संक्रांति में बैठे सूर्य धनु राशि को छोड़कर मकर में प्रवेश करेंगंे।
शनिवार को यह जानकारी देते हुए शिवशक्ति आराधना ज्योतिष केन्द्र के आचार्य खगेन्द्र शस्त्री ने बताया कि सूर्य पिता अपने पुत्र शनि की राशि मकर में जब आते हैं तब इसी पर्व को मकर संक्रांति कहते हैं सभी साधु संत तीर्थराज प्रयाग की शरण में जाते हैं। शरण में आते हैं शरण में जाते हैं, रामचरितमानस में बाबा तुलसीदास जी ने चैपाई लिखी है। माघ मकर रवि जब हुई तीरथपति आवत सब कोई । इस दिन तिल का दान सबसे उत्तम माना जाता है। तिल से अग्नि में हवन करने से देवता प्रसन्न होते है मन चाहा वरदान की प्राप्ति होती है।
Author: Sunil Kumar
SASNI, HATHRAS