रूदायन रोड स्थित सम्यक पुस्तकालय एवं वाचनालय अम्बेडकर पार्क, में भीम और बौद्ध गाथा के दौरान बुद्ध के जन्म तक की बोधिसत्व गाथा का संगीतमय एवं सारगर्भित वर्णन किया गया।
शनिवार को भीमराव अम्बेडकर शैक्षिक एवं सामाजिक विकास समिति सासनी, दि बुद्धिस्ट सोसायटी ऑफ इंडिया शाखा जनपद हाथरस और समस्त क्षेत्रीय संगठनों के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम का संचालन मिशनरी कवि पूरन सागर बौद्धाचार्य ने किया। कार्यक्रम के सह-संचालक सम्यक पुस्तकालय के प्रबंधक राजेश बौद्ध रहे। कार्यक्रम में बौद्धाचार्य पूरन सागर ने बुद्ध बनने के लिए आवश्यक दस पारमिताओं और बुद्ध के अतुलनीय गुणों पर प्रकाश डालते हुए श्रद्धालुओं को विस्तार से जानकारी दी। बौद्धाचार्य ने बताया कि बुद्ध बनने के लिए आवश्यक 10 पारमिताएं जैसे बौद्ध दर्शन के अनुसार, बोधिसत्व से सम्यक सम्बुद्ध बनने के लिए व्यक्ति को निरंतर प्रयास करके दस पारमिताओं (सर्वोच्च सद्गुणों) को पूर्ण करना होता है। बिना किसी स्वार्थ या बदले की भावना के अपना सब कुछ दूसरों के कल्याण के लिए त्यागी भाव से देना। नैतिक आचरण, मन, वचन और कर्म से कायिक-वाचिक संयम रखना। सांसारिक मोह-माया, भोग-विलास और तृष्णा का त्याग करना।

सत्य और असत्य का ज्ञान, वस्तुओं के वास्तविक स्वभाव को समझने की परम प्रज्ञा। लोक-कल्याण के मार्ग पर बिना रुके निरंतर प्रयास और अथक परिश्रम करना। क्षमाभाव, अत्यंत विकट परिस्थितियों में भी क्रोध न करना और सहनशीलता बनाए रखना। हमेशा सत्य पर कायम रहना, जो कहना वही करना और वचनों से न डिगना। कल्याणकारी लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए अडिग और दृढ़ संकल्पित रहना। बिना किसी भेदभाव के दुनिया के सभी प्राणियों के प्रति निस्वार्थ प्रेम और दयाभाव रखना। सुख-दुख, लाभ-हानि, मान-अपमान में मन का संतुलन बनाए रखना (तटस्थ रहना)। है। कथा के दौरान भगवान बुद्ध के प्रमुख 9 गुणों की व्याख्या भी की गई। जिसमें अरहं, सम्माशम्बुद्धो, विज्जाचरणसम्पन्नो, सुगतो, लोकविदू, अनुत्तरो पुरिसदम्मसारथि, सत्था देवमनुस्सानं, बुद्धो, भगवा, आदि बातें बताईं। कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने सभी क्षेत्रवासियों का आभार व्यक्त किया तथा पुस्तकालय के माध्यम से बच्चों व युवाओं में अध्ययन की प्रवृत्ति बढ़ाने का आह्वान किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।



