हाईकोर्ट ने साफ किया कि अभियोजन यह दिखाने में असफल रहा कि बलजीत कौर ने जहर कहां से हासिल किया, उसे खरीदा या मृतक को किस तरह दिया। उसके पास से जहर बरामद नहीं हुआ।

करीब 23 साल पुराने जहरीला पदार्थ देकर पति की हत्या करने के मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए पत्नी बलजीत कौर को बरी कर दिया। अदालत ने माना कि मृतक की मौत जहरीले पदार्थ के कारण हुई थी, लेकिन अभियोजन यह साबित करने में नाकाम रहा कि जहर उसकी पत्नी ने ही दिया था।
हाईकोर्ट ने साफ किया कि अभियोजन यह दिखाने में असफल रहा कि बलजीत कौर ने जहर कहां से हासिल किया, उसे खरीदा या मृतक को किस तरह दिया। उसके पास से जहर बरामद नहीं हुआ। घटना का कोई प्रत्यक्षदर्शी भी नहीं था और ऐसा कोई वैज्ञानिक साक्ष्य नहीं मिला जो उसे जहरीले पदार्थ से सीधे जोड़ता हो। कोर्ट ने कहा कि केवल यह साबित हो जाना कि मौत जहर से हुई, अपने आप में यह साबित नहीं करता कि जहर किसने दिया। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अभियोजन को आरोपी के खिलाफ ऐसा आधार और परिस्थितियां साबित करनी होती हैं, जिनसे अपराध में उसकी संलिप्तता की कड़ी जुड़ती हो।
यहां परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की पूरी श्रृंखला नहीं बन सकी। हाईकोर्ट ने कहा कि जहरीले पदार्थ के कारण सरमुख सिंह की मौत होना साबित है, लेकिन यह संदेह से परे साबित नहीं हुआ कि बलजीत कौर ने ही उसे जहर दिया या हत्या की साजिश में उसकी भूमिका थी। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने दोषसिद्धि और उम्रकैद की सजा रद्द करते हुए बलजीत कौर को बरी कर दिया।



