पावरकाॅम के पास अपने सभी स्रोतों से केवल 4114 मेगावाट बिजली उपलब्ध थी। शुक्रवार को तलवंडी साबो थर्मल की 660 मेगावाट की तीन नंबर यूनिट बंद रही। रोपड़ प्लांट की 210 मेगावाट की पांच नंबर यूनिट भी ठप रही।

पंजाब में शुक्रवार को बारिश से भी पावरकाॅम की मुश्किलें कम नहीं हुईं। शुक्रवार को बिजली की मांग ने पिछले दो साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया। यह मांग 16182 मेगावाट तक पहुंच गई।
खेतीबाड़ी क्षेत्र को भी आठ घंटे की पूरी बिजली आपूर्ति नहीं मिल रही है। किसानों को ट्यूबवेल के लिए पांच से सात घंटे ही बिजली मिल रही है, जिससे उनमें सरकार के प्रति रोष है। थर्मल संयंत्रों में कोयला संकट भी बना हुआ है। तलवंडी साबो में मात्र छह दिन का, राजपुरा प्लांट में सात दिन का और गोइंदवाल में 13 दिन का कोयला शेष है। लहरा मुहब्बत थर्मल में 15 दिन का कोयला बचा है, जबकि रोपड़ थर्मल में 29 दिन का कोयला स्टॉक नियमानुसार पर्याप्त है।
थर्मल संयंत्रों में शिविर कार्यालय स्थापित होंगे
बिजली की बढ़ती मांग को देखते हुए पावरकाॅम ने महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। प्रबंध निदेशक और अध्यक्ष (सीएमडी) तथा निदेशक तुरंत साइटों का दौरा करेंगे। वे थर्मल संयंत्रों में शिविर कार्यालय स्थापित करेंगे। इसके अतिरिक्त, मुख्य अभियंता और संयंत्र प्रभारी को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे अपने-अपने स्टेशनों पर लगातार मौजूद रहें। उन्हें संयंत्र की अधिकतम क्षमता पर बिना रुकावट बिजली उत्पादन बनाए रखने के लिए काम करना होगा।