फिरोजपुर में एक बेटी ने मां को बचाने के लिए जमीन तक बेच दी, पांच लाख का कर्ज भी हो गया, फिर भी मां नहीं बची। पीड़ित ने बठिंडा, मुक्तसर, फरीदकोट और श्रीगंगानगर के अस्पतालों के चक्कर काटे। आर्थिक मदद भी नहीं मिली।

मां को बचाने की उम्मीद में बेटी ने अपनी जमा-पूंजी लगा दी। इलाज का खर्च पूरा करने के लिए जमीन बेच दी और कर्ज भी लिया। बठिंडा, मुक्तसर, फरीदकोट और श्रीगंगानगर के अस्पतालों के चक्कर काटे। हर मुमकिन कोशिश के बावजूद कैंसर के आगे जिंदगी की जंग हार गई।
मां चली गईं लेकिन पीछे करीब पांच लाख रुपये का कर्ज छोड़ गईं। परिवार का सुख-चैन भी इलाज के खर्च में खत्म हो गया। ब्लॉक ममदोट के गांव हजारा सिंह वाला निवासी बिमला ने बताया कि उनकी मां कैंसर से पीड़ित थीं। उन्होंने इलाज में कोई कसर नहीं छोड़ी।
परिवार की जमा पूंजी खत्म होने के बाद इलाज का खर्च जुटाने के लिए जमीन तक बेचनी पड़ी। लंबे समय तक इलाज चलता रहा और कई अस्पतालों में उपचार कराया गया लेकिन मां को बचाया नहीं जा सका। बिमला के अनुसार अब परिवार पर करीब पांच लाख रुपये का कर्ज है।
उनका आरोप है कि आर्थिक रूप से कमजोर होने के बावजूद इलाज के दौरान सरकार की ओर से परिवार को किसी तरह की आर्थिक सहायता नहीं मिली। उन्होंने सरकार से आर्थिक मदद की मांग की है।
दूषित पेयजल भी बढ़ा रहा बीमारियां
जोगिंदर सिंह ने गांव में दूषित पेयजल की समस्या भी उठाई। उनका कहना है कि प्रदूषित पानी के कारण लोगों को विभिन्न बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने क्षेत्र में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने और कैंसर से प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता देने की मांग की है। क्षेत्र के भूजल में यूरेनियम की मात्रा अधिक होने की बात भी सामने आती रही है जिसे कैंसर का बड़ा कारण माना जाता है।
जोगिंदर सिंह ने गांव में दूषित पेयजल की समस्या भी उठाई। उनका कहना है कि प्रदूषित पानी के कारण लोगों को विभिन्न बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने क्षेत्र में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने और कैंसर से प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता देने की मांग की है। क्षेत्र के भूजल में यूरेनियम की मात्रा अधिक होने की बात भी सामने आती रही है जिसे कैंसर का बड़ा कारण माना जाता है।
पत्नी के इलाज पर खर्च किए तीन लाख से अधिक
इसी गांव के जोगिंदर सिंह ने बताया कि उनकी पत्नी फामा की भी कैंसर से मौत हो गई। उन्होंने पत्नी के इलाज पर तीन लाख रुपये से अधिक खर्च किए। श्रीगंगानगर और फरीदकोट मेडिकल कॉलेज में भी इलाज कराया गया लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद उनकी जान नहीं बच सकी। पत्नी की मौत के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो गई है। उनका कहना है कि सरकार की ओर से अब तक कोई आर्थिक सहायता नहीं मिली।
इसी गांव के जोगिंदर सिंह ने बताया कि उनकी पत्नी फामा की भी कैंसर से मौत हो गई। उन्होंने पत्नी के इलाज पर तीन लाख रुपये से अधिक खर्च किए। श्रीगंगानगर और फरीदकोट मेडिकल कॉलेज में भी इलाज कराया गया लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद उनकी जान नहीं बच सकी। पत्नी की मौत के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो गई है। उनका कहना है कि सरकार की ओर से अब तक कोई आर्थिक सहायता नहीं मिली।