जापान ने सूचना प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमीकंडक्टर और स्वास्थ्य सेवाओं जैसे क्षेत्रों में बड़ी संख्या में भारतीय पेशेवरों की भर्ती की है। भारत-जापान के मजबूत होते आर्थिक संबंधों के बीच भारतीयों की मांग बढ़ रही है जिस पर नए नियम सीधा असर डालेंगे।

जापान में हजारों भारतीय पेशेवरों के लिए स्थायी निवास (पीआर) हासिल करना अब पहले से कहीं अधिक कठिन होगा। जापानी सरकार ने पीआर के लिए नए और सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। ये नियम 1 अगस्त से प्रभावी होंगे, जबकि आवेदनों की जांच अप्रैल 2027 से शुरू होगी।
ये बदलाव उन भारतीय पेशेवरों पर अधिक असर डालेंगे जो जापान में लंबे समय तक बसने की योजना बना रहे हैं। माना जा रहा है कि इससे मध्यम आय वर्ग के विदेशी कर्मचारियों के लिए पीआर प्राप्त करना अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाएगा।
जापान ने सूचना प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमीकंडक्टर और स्वास्थ्य सेवाओं जैसे क्षेत्रों में बड़ी संख्या में भारतीय पेशेवरों की भर्ती की है। भारत-जापान के मजबूत होते आर्थिक संबंधों के बीच भारतीयों की मांग बढ़ रही है जिस पर नए नियम सीधा असर डालेंगे।
विशेषज्ञों की राय और राहत
अंतरराष्ट्रीय शिक्षण एवं आव्रजन मामलों के जानकार प्रोफेसर करमजीत सिंह बराड़ के अनुसार, जापान आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर और सामाजिक रूप से एकीकृत लोगों को स्थायी निवास देना चाहता है। उन्होंने कहा कि कनाडा और ऑस्ट्रेलिया की तुलना में जापान में पीआर हासिल करना पहले से ही आसान नहीं था, अब यह प्रक्रिया और कठोर होगी।
जापान की हाईली स्किल्ड प्रोफेशनल प्रणाली के तहत योग्य विशेषज्ञों को राहत मिलेगी। वे उच्च योग्यता और बेहतर आय के आधार पर अपेक्षाकृत कम समय में आवेदन कर सकेंगे पर उन्हें भी कर, पेंशन और अन्य सार्वजनिक दायित्वों से जुड़े नए मानकों का पूरी तरह पालन करना होगा।