डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम पर होगा साइंस सेंटर, शहीद स्मारक के पास लगेगी भव्य प्रतिमा : सीएम

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Science Centre to be named after Dr. Syama Prasad Mukherjee; grand statue to be installed near Martyrs' Memorial: CM

अंबाला सिटी। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के 125वीं स्मरण पक्ष कार्यक्रम में सोमवार को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बड़ी घोषणा की। उन्होंने कहा कि यहां 85 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले आधुनिक साइंस सेंटर का नाम महान स्वतंत्रता सेनानी और भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम पर रखा जाएगा इसके साथ ही, अंबाला में निर्माणाधीन भव्य शहीद स्मारक के समीप डॉ. मुखर्जी की एक विशाल प्रतिमा भी स्थापित की जाएगी। उन्होंने कहा कि इतिहास में कुछ लोग ऐसे होते हैं जिन्हें पढ़ा नहीं बल्कि जिया जाता है, डॉ. मुखर्जी ऐसे ही व्यक्तित्व थे।

अंबाला सिटी। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के 125वीं स्मरण पक्ष कार्यक्रम में सोमवार को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बड़ी घोषणा की। उन्होंने कहा कि यहां 85 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले आधुनिक साइंस सेंटर का नाम महान स्वतंत्रता सेनानी और भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम पर रखा जाएगा इसके साथ ही, अंबाला में निर्माणाधीन भव्य शहीद स्मारक के समीप डॉ. मुखर्जी की एक विशाल प्रतिमा भी स्थापित की जाएगी। उन्होंने कहा कि इतिहास में कुछ लोग ऐसे होते हैं जिन्हें पढ़ा नहीं बल्कि जिया जाता है, डॉ. मुखर्जी ऐसे ही व्यक्तित्व थे।

17 को पीएम जींद में आएंगे

सीएम नायब सैनी ने मंच से यह भी बताया कि 17 जुलाई को जींद में विशेष कार्यक्रम आयेाजित होने जा रहा है। इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुख्य अतिथि के तौर पर पधारेंगे। सीएम ने इस कार्यक्रम को भी विशेष तौर पर मनाने की घोषणा की वहीं लोगों से कार्यक्रम में आने के लिए निमंत्रण भी दिया।

वर्ष 2027 तक चलेगा दो वर्षीय जयंती समारोह
सीएम सैनी ने बताया कि डॉ. मुखर्जी के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए पिछले वर्ष से जुलाई 2027 तक दो वर्षीय जयंती समारोह मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि 33 वर्ष की आयु में कोलकाता विश्वविद्यालय के सबसे कम उम्र के कुलपति बनने वाले डॉ. मुखर्जी का राजनीतिक जीवन सत्ता के लिए नहीं, बल्कि देश सेवा और सिद्धांतों के लिए था। जब सिद्धांतों की बात आई, तो उन्होंने 19 अप्रैल 1950 को केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया और बाद में भारतीय जनसंघ की स्थापना की।
अंबाला से रहा है ऐतिहासिक नाता
मुख्यमंत्री ने डॉ. मुखर्जी के अंबाला से जुड़े ऐतिहासिक संदर्भ का जिक्र करते हुए कहा कि 8 मई 1953 को जब वे जम्मू-कश्मीर के लिए दिल्ली से रवाना हुए, तो अंबाला कैंट स्टेशन से ही उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री शेख अब्दुल्ला को संदेश भेजा था कि वे बिना परमिट वहां आ रहे हैं। यहां उन्होंने जनसभा को भी संबोधित किया था। बाद में बिना परमिट प्रवेश करने पर उन्हें गिरफ्तार कर नजरबंद कर दिया गया, जहां देश की एकता और अखंडता के लिए उन्होंने अपना सर्वोच्च बलिदान दे दिया।
एक देश में दो विधान का संकल्प हुआ पूरा
मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. मुखर्जी ने एक राष्ट्र में दो निशान, दो विधान और दो प्रधान नहीं चलेंगे का जो नारा दिया था, उसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूरा कर दिया गया है। आज पूरा देश उनके दिखाए मार्ग पर चलकर वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। इस अवसर पर संसदीय बोर्ड की सदस्य सुधा यादव, प्रदेशाध्यक्ष डॉ. अर्चना गुप्ता, पूर्व मंत्री असीम गोयल, प्रदेश उपाध्यक्ष बंतो कटारिया सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने डॉ. मुखर्जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
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Author: priya singh

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