मौत का पुल’: अंधेरी रात, आंधी-तूफान और नीचे बिछी लाशें, शोर में दब गईं आखिरी चीखें तक, रुला देंगी ये तस्वीरें

Picture of ILMA NEWSINDIA

ILMA NEWSINDIA

SHARE:

Hamirpur Bridge Accident News: बेतवा नदी पर निर्माणाधीन पुल का सेगमेंटल स्पैन गिरने की घटना ने न केवल छह मजदूरों की जान ली, बल्कि पीछे छोड़ गई अनगिनत दर्द भरी दास्तानें। कहीं पिता अपने बेटे को नहीं बचा पाया, तो कहीं चार बेटियों ने अपने एकमात्र सहारा पिता को खो दिया।

Hamirpur Bridge Accident pitch black night raging storm and bodies strewn below final screams were drowned ou

हमीरपुर जिले में बेतवा नदी पर निर्माणाधीन पुल हादसे ने कई परिवारों को जिंदगीभर का दर्द दे दिया। स्वासा गांव निवासी राजेंद्र सिंह के लिए यह कभी न भरने वाला जख्म बन गया। तेज आंधी और बारिश के बीच वह अपने बेटे पुष्पेंद्र की आखिरी चीख तक नहीं सुन सके। राजेंद्र सिंह पुल निर्माण स्थल पर गनमैन की ड्यूटी करते हैं।

उसके नाम लाइसेंसी बंदूक होने से ठेकेदार ने उनको सुरक्षा की जिम्मेदारी दी थी। बाद में उन्होंने अपने बेटे पुष्पेंद्र को भी गार्ड के रूप में काम पर लगवा लिया। पिता-पुत्र दोनों रात में ड्यूटी करते थे। रोज साथ घर से निकलते और सुबह साथ लौटते थे। बृहस्पतिवार रात भी दोनों ड्यूटी पर थे। देर रात मौसम अचानक बिगड़ गया। तेज आंधी के साथ बूंदाबांदी शुरू हो गई।

पैर फिसला और वह नदी में जा गिरे
इस पर राजेंद्र ने बंदूक को भीगने से बचाने के लिए बेटे पुष्पेंद्र को थमा दिया।  पुष्पेंद्र बंदूक लेकर पास खड़ी हाइड्रा मशीन में बैठ गया। उधर राजेंद्र आंधी से बचने का प्रयास करने लगे। इसी दौरान पैर फिसला और वह नदी में जा गिरे। किसी तरह बाहर निकलकर आगे बढ़े तभी जोरदार धमाका हुआ। पीछे मुड़कर देखा, तो पुल का एक हिस्सा भरभराकर गिर चुका था।

पैर फिसला और वह नदी में जा गिरे
जिस जगह स्लैब गिरी थी, वहीं नीचे हाइड्रा मशीन खड़ी थी। यह देख राजेंद्र बिलख पड़े। उन्होंने हादसे को याद करते हुए कहा कि बेटे ने जरूर आवाज लगाई होगी, लेकिन आंधी का शोर इतना था कि कुछ सुनाई नहीं दिया। हादसे के बाद से गांव में मातम पसरा हुआ है। राजेंद्र बार-बार यह कहकर बिलख रहे थे कि काश वह उस वक्त बेटे तक पहुंच पाते, तो शायद उसे बचा लेते।

पापा ने दिया बेटों सा प्यार कहते हुए बिलख पड़ीं बेटियां
हादसे ने अचपुरा गांव निवासी गनमैन राजेश पाल के परिवार की खुशियां भी छीन ली हैं। खबर घर पहुंची तो बदहवास हालत में परिजन घटनास्थल पर पहुंचे। यहां मलबे के बीच पिता को तलाशती बेटियों की आंखों में सिर्फ आंसू और बेबसी थी। बेटियां यह कहते हुए फफक कर रो रही थीं कि पापा हम बहनों को बेटों सा प्यार देते थे। हमारी खुशी के लिए मेहनत करते थे।

पापा हमेशा कहते थे- मेरी बेटियां ही मेरे बेटे हैं
राजेश पाल की चारों बेटियां पिता की मौत की खबर सुनकर बेसुध हो गईं। बड़ी बेटी शिवानी ने कांपती आवाज में कहा कि हमारा कोई भाई नहीं है। पापा हमेशा कहते थे कि मेरी बेटियां ही मेरे बेटे हैं। शिवानी ने आंसू पोंछते हुए बताया कि पिता अपनी दोनाली बंदूक के सहारे गनमैन की नौकरी करते थे। उसी कमाई से घर चलता था, बेटियों की पढ़ाई होती थी और भविष्य के सपने बुने जाते थे। परिवार के पास आमदनी का कोई दूसरा साधन नहीं है।

परीक्षा परिणाम आया था, पापा सबसे ज्यादा खुश थे
शिवानी ने कहा कि पापा कहते थे कि तुम चारों खूब पढ़ो और तरक्की करो। खुद कितना भी परेशान रहे हों लेकिन हमारी जरूरत कभी अधूरी नहीं रहने दी। बताया कि उसने बीए चौथे सेमेस्टर की परीक्षा दी है। छोटी बहन रेखा ने इंटर पास किया है। रेखा का जिस दिन परीक्षा परिणाम आया था, पापा सबसे ज्यादा खुश थे। 65 फीसदी अंक लाने पर वह मिठाई लाए थे।

बेटियों की चीख-पुकार सुन लोगों की आंखें भी भर आईं
रीना कक्षा आठ और छोटी बहन अंशिका कक्षा सात में पढ़ती है। बेटियों की चीख-पुकार सुन वहां मौजूद लोगों की आंखें भी भर आईं। गांव की महिलाएं उन्हें संभालने की कोशिश करती रहीं। बेटियों को ढांढस बंधाने के लिए मृतक की मां कल्ली देवी और दादी बिंदी देवी अपने आंसू रोकने का भरसक प्रयास करती रहीं, लेकिन जब वह पोस्टमार्टम हाउस पहुंची, तो धैर्य जवाब दे गया और दहाड़ मारकर रो पड़ीं।

27 को कमाने के लिए घर से निकला था सावंत
हादसे में बांदा जिले के भुरैड़ी भूरागढ़ निवासी सावंत उर्फ गंगाचरण यादव की भी मौत हुई है। घटना की जानकारी मोबाइल के माध्यम से मिलने के बाद मृतक के पिता सोबरन सिंह अन्य परिजनों के साथ चार घंटे की दूरी तय करके घटना स्थल पर पहुंचे। यहां पर उनकी आंखें अपने बेटे को तलाश रहीं थीं। वह बदहवास हालत में एक जगह बैठ गए। उन्हें साथ में आए गांव के लोग ढांढस बंधा रहे थे। आंखों के आंसू पोंछते हुए सोबरन ने कहा कि 27 मई को ही तो बेटा कमाने की बात कहकर घर से निकला था। मैं कितना दुर्भाग्यशाली हूं कि अब अपने बेटे का शव लेकर गांव जाऊंगा। बताया कि वह भी मजदूरी करते हैं और उनका छोटा बेटा भी प्राइवेट काम करता है। सावंत बड़ा था अभी उसकी शादी नहीं हुई थी।

बेटे के घायल होने की मिली थी जानकारी
हादसे में भूरागढ़ गांव का सभाजीत भी अपने दोस्त सावंत के साथ काम करने के लिए 27 मई को आया था। यहां पर आकर उसे फौरन काम मिल गया। पिता नीलकंठ ने बताया कि मुझे फोन पर बेटे के घायल होने की जानकारी दी गई थी। यहां पर बेटे का शव मिला। तीन भाइयों में वह सबसे बड़ा था अभी उसकी शादी नहीं हुई थी। दो छोटे बेटे भी मजदूरी करते हैं। नीलकंठ ने कहा कि बेटे की मौत से पूरा परिवार टूट गया। नीलकंठ की आंखों में आंसू तो जैसे सूख ही गए थे। वह गुमसुम एक स्थान पर बैठे रहे। इसके बाद पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। यहां जब अपनों को देखा तो फफक पड़े।

एक ही गाड़ी में गए दोनों दोस्तों के शव
बांदा जिला के मंटौध थाना क्षेत्र के गांव भुरैड़ी भूरागढ़ निवासी सावंत और सभाजीत अच्छे दोस्त थे। दोनों कमाने के लिए एक ही साथ घर से निकले थे। ठेकेदार हीरालाल ने उन्हें फौरन काम दे दिया था। रात में दोनों दोस्त एक साथ काम कर रहे थे उसी दौरान आई आंधी के बाद हुए हादसे में दोनों ही एक साथ मलबे में दब गए और मौत हो गई। पोस्टमार्टम हाउस से एक प्राइवेट एंबुलेंस में उनके शव एक साथ रखे गए तो मौजूद परिजनों के मुख से निकल पड़ा देखो अब मरने के बाद भी दोनों एक साथ जा रहे हैं।

सबसे ज्यादा पड़ गई
Suomalaisten pelaajien keskuudessa nettikasinoiden suosio on kasvanut huomattavasti, ja yhä useampi valitsee alustan juuri selkeiden käytäntöjen sekä läpinäkyvän toiminnan perusteella. Kasinopelaamiseen liittyy aina vastuullisuuden teema, joten on tärkeää tietää, miten operaattori käsittelee henkilötietoja, pelitilejä ja maksutapahtumia. Tässä yhteydessä Dudespin Tietosuojakaytanto -sivu tarjoaa selkeän kuvauksen tietojen keräämisestä, säilyttämisestä ja käyttäjän oikeuksista, mikä helpottaa luotettavan pelipaikan valinnassa. Hyvä nettikasino panostaa aina reiluun peliin, nopeisiin kotiutuksiin sekä monipuoliseen pelivalikoimaan, mutta yhtä tärkeää on toimiva asiakaspalvelu ja selkeät käyttöehdot. Uudet pelaajat arvostavat usein tervetuliaisbonuksia ja ilmaiskierroksia, joiden taustalla olevat säännöt kannattaa kuitenkin lukea huolellisesti ennen pelaamisen aloittamista.
Canadian players exploring dragon-themed slot lobbies often compare payout structures and bonus rounds across licensed operators, and Spin Dragons shows up frequently in those discussions because of its clear wagering terms and province-friendly banking options for regulated iGaming fans in 2026.
Danske spillere, der ønsker en moderne casinooplevelse med fokus på farverigt design og varierede spil, finder et stærkt bud på markedet hos LuckyNiki Danmark. Siden kombinerer klassiske bordspil, jackpots og live dealer-borde med en brugervenlig platform, og kundesupporten er tilgængelig på dansk hele døgnet. Derudover tilbyder operatøren løbende turneringer og loyalitetsfordele, som gør det værd at holde øje med de ugentlige tilbud.
Savvy slot enthusiasts in New Zealand tend to compare welcome packages, weekly reloads, and cashback rates before settling on a new casino lobby. Keeping tabs on the current Spinskull promo code can stretch a first deposit further, especially when combined with free spin drops on featured pokies. Responsible play still matters: set a session budget, verify the operator's licence, and review the bonus terms — including wagering multipliers, game contribution rates, and maximum withdrawal caps — before you commit a single cent.