Hamirpur Betwa Bridge Tragedy: हमीरपुर पुल हादसे में फंसे तीन मजदूरों को एसडीआरएफ की टीम ने सुरक्षित बचा लिया है। रात भर मजदूर करीब 20 मीटर ऊंचाई पर फंसे रहे। हादसे में छह मजदूरों की मौत हो गई है, जिनके शव मलबे से निकाल लिए गए हैं।

हमीरपुर जिले के पुल हादसे में सुरक्षित बचाए गए तीन मजदूरों के लिए बृहस्पतिवार की रात डरावने सपने से कम नहीं थी। कुछ मिनट पहले तक वह जिन साथियों के साथ काम कर रहे थे वही उनकी आंखों के सामने काल के गाल में समा गए। नीचे चीख-पुकार मची थी, अंधेरा छाया था और वह करीब 15 से 20 मीटर की ऊंचाई पर टूटे पुल के एक हिस्से में फंसे थे।
हादसे में सुरक्षित बचे राजेश निषाद, कल्लू यादव और अवधेश निषाद ने बताया कि रात करीब 12 बजे के बाद मौसम अचानक बिगड़ गया। तेज हवा के साथ बूंदाबांदी शुरू हो गई। उस समय पुल पर केबल ट्रेडिंग, बेरिंग लगाने से जुड़े कार्य चल रहे थे। आंधी तेज होने पर मजदूर निर्माणाधीन पुल के पांच व छह नंबर पिलर के स्लैब के बीच जाकर बैठ गए। किसी को अंदाजा नहीं था कि कुछ ही मिनट बाद सामने वाला हिस्सा मौत का जाल बन जाएगा।
पुल और पिलर हिलते महसूस होने लगे
राजेश निषाद ने बताया कि पहले रात करीब 12:05 बजे तेज हवा का झोंका आया। इसके बाद 12:15 बजे के आसपास आंधी और अधिक तेज हो गई। कुछ ही देर में पुल और पिलर हिलते महसूस होने लगे। मजदूरों को लगा कि स्थिति सामान्य हो जाएगी लेकिन अचानक जोरदार झटका लगा और आगे का स्पैन भरभराकर नीचे चला गया। उस हिस्से में मौजूद लोकेंद्र निषाद, कुलदीप निषाद, गंगाचरण और सभाजीत मलबे में दब गए।
लगा- अब शायद हम भी नहीं बचेंगे
नीचे हाइड्रा मशीन के पास मौजूद राजेश पाल और पुष्पेंद्र सिंह चौहान भी गिरते स्लैब की चपेट में आ गए। उन्होंने बताया कि हादसे के बाद कुछ पल तक किसी को समझ ही नहीं आया कि हुआ क्या है। नीचे अफरा-तफरी मच गई थी। तेज हवा और बारिश के बीच किसी की आवाज साफ सुनाई नहीं दे रही थी। पहली बार मौत को इतने करीब से देखा। लगा कि अब शायद हम भी नहीं बचेंगे।
देखते ही देखते सब खत्म हो गया
कल्लू यादव ने बताया कि हादसे में उनके सगे भतीजे गंगाचरण और पारिवारिक भतीजे सभाजीत की मौत हुई है। दोनों सिर्फ दो दिन पहले ही काम पर आए थे। कुछ देर पहले तक सभी लोग साथ बैठकर आंधी थमने का इंतजार कर रहे थे। अचानक स्पैन खिसकने की आवाज आई और देखते ही देखते सब खत्म हो गया। उन्होंने बताया कि दोनों की आखिरी आवाज आज भी कानों में गूंज रही है। हादसे के बाद सबसे पहले उन्होंने 112 पर फोन कर सूचना दी और फिर अपने बड़े भाई प्रमोद गौतम तथा परिजनों को घटना की जानकारी दी।
हर मिनट दूसरा हादसा होने का डर सता रहा था
अवधेश निषाद ने बताया कि हादसे के बाद बिजली और जनरेटर बंद हो गए थे। चारों तरफ अंधेरा छा गया था। प्यास से गला सूख रहा था लेकिन पानी तक नहीं मिल सका। नीचे उतरने का कोई रास्ता नहीं था। उन्होंने साथी के मोबाइल से मदद के लिए फोन किया। पूरी रात यही डर बना रहा कि कहीं पुल का बचा हुआ हिस्सा भी न गिर जाए। उन्होंने बताया कि हवा इतनी तेज थी कि पूरा ढांचा हिलता महसूस हो रहा था और हर मिनट दूसरा हादसा होने का डर सता रहा था।
नदी में कूदकर जान बचाने का बनाया था विचार
राजेश निषाद ने बताया कि हादसे के बाद तीनों मजदूरों ने नदी में कूदकर जान बचाने तक का विचार बना लिया था। पुल और पिलर हिलते महसूस हो रहे थे और आशंका थी कि बचा हुआ हिस्सा भी ढह सकता है लेकिन नीचे झांकने पर एक तरफ पानी नहीं था और दूसरी तरफ इतनी ऊंचाई थी कि बचने की उम्मीद बेहद कम दिखाई दे रही थी। ऐसे में तीनों ने वहीं बैठे रहकर मदद का इंतजार करने का फैसला किया। उन्होंने बताया उस समय लग रहा था कि नीचे कूदे तो भी मौत और ऊपर रहें तो भी मौत सामने खड़ी है।
रात भर ऊपर से देखते रहे नीचे की गतिविधियां
हादसे के बाद नीचे मलबे में दबे साथियों की कोई आवाज नहीं आ रही थी। ऊपर फंसे वे लोग बार-बार नीचे झांककर हालात समझने की कोशिश कर रहे थे लेकिन अंधेरा, बारिश और तेज हवा के कारण कुछ साफ दिखाई नहीं दे रहा था। उन्हें अपने साथियों और घरवालों की चिंता भी लगातार सता रही थी। कई बार उन्होंने नीचे मौजूद लोगों को आवाज लगाई। जवाब में नीचे से उन्हें भरोसा दिलाया जाता रहा कि बचाव दल रास्ते में है। रातभर नीचे पुलिस, प्रशासन, फायर सर्विस और स्थानीय लोग राहत कार्य में जुटे रहे। ऊपर फंसे मजदूर नीचे टॉर्च और वाहनों की रोशनी में चल रही गतिविधियां देखते रहे। पूरी रात उन्हें यह डर सताता रहा कि कहीं जिस हिस्से पर वे बैठे हैं वह भी नीचे न आ जाए।
पहली बचाव टीम सुबह 6:05 बजे पहुंची
एसडीआरएफ के उपनिरीक्षक एवं मीडिया सेल प्रभारी अर्पित गुप्ता ने बताया कि कंट्रोल रूम को रात 2:27 बजे हादसे की सूचना मिली थी। सूचना मिलते ही 37वीं वाहिनी पीएसी श्यामनगर कानपुर से एसडीआरएफ की टीम रवाना की गई। इसके अलावा जालौन इकाई को भी सक्रिय किया गया। कमांडेंट एवं सेनानायक एसडीआरएफ श्याम नारायण सिंह के निर्देशन में रेस्क्यू अभियान संचालित किया गया। इंस्पेक्टर लालचंद यादव के नेतृत्व में पहली टीम सुबह 6:05 बजे घटनास्थल पहुंच गई थी।
तीनों मजदूरों को सुरक्षित नीचे उतारा गया
अर्पित गुप्ता ने बताया कि घटनास्थल पर पहुंचने के बाद सबसे बड़ी चुनौती टूटे पुल के ऊपरी हिस्से तक पहुंचना था। पुल का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त था और सामान्य रास्ते से ऊपर पहुंचना संभव नहीं था। ऐसे में एसडीआरएफ जवानों ने पहले पहुंच मार्ग तैयार किया। इसके बाद रस्सी की सीढ़ी और अन्य उपकरणों की मदद से ऊपर तक पहुंच बनाई गई। काफी सावधानी के साथ तीनों मजदूरों तक पहुंचा गया और उन्हें सुरक्षित नीचे उतारा गया।
क्षतिग्रस्त हिस्सा और टूटने का था खतरा, चरणबद्ध पूरा किया बचाव अभियान
उन्होंने बताया कि मजदूर शारीरिक रूप से सामान्य थे, लेकिन बेहद डरे हुए थे। पूरी रात फंसे रहने के कारण मानसिक दबाव साफ दिखाई दे रहा था। रेस्क्यू के दौरान यह आशंका भी बनी रही कि कहीं क्षतिग्रस्त हिस्सा और न टूट जाए। इसी वजह से अभियान को चरणबद्ध और बेहद सावधानी के साथ पूरा किया गया। एसडीआरएफ टीम ने तीन मजदूरों को सुरक्षित निकालने के साथ ही मलबे में दबे लोगों की तलाश का अभियान भी चलाया।
हादसे का मंजर चेहरे पर साफ दिखाई दे रहा था
रेस्क्यू टीम ने छह मृतकों के शव बरामद किए। अभियान कई घंटों तक चलता रहा। टीम ने यह सुनिश्चित करने के बाद ही अभियान समाप्त किया कि मलबे में कोई अन्य व्यक्ति दबा नहीं है। सुबह जब तीनों मजदूर सुरक्षित जमीन पर उतरे, तो वहां मौजूद लोगों ने राहत की सांस ली। लेकिन नीचे पड़े छह शव और रातभर आंखों के सामने घूमता हादसे का मंजर उनके चेहरे पर साफ दिखाई दे रहा था। जिन साथियों के साथ कुछ घंटे पहले तक वे काम कर रहे थे, वे अब इस दुनिया में नहीं थे। यही दर्द उनके शब्दों और आंखों में साफ झलक रहा था।
ये था पूरा हादसा
कुरारा थाना क्षेत्र में बेतवा नदी पर निर्माणाधीन पुल का एक पिलर और स्लैब बृहस्पतिवार देर रात आई तेज आंधी में अचानक ढह गया। हादसे में चार मजदूर और दो सुरक्षा गार्डों की इसके नीचे दबकर मौत हो गई। पुल के ऊपरी हिस्से में फंसे तीन श्रमिकों को रेस्क्यू कर सुरक्षित निकाल लिया गया। घटना के बाद पुल निर्माण में भ्रष्टाचार और मानकों की अनदेखी के आरोप लगने लग रहे हैं।
पिलर अचानक भरभराकर गिर पड़ा
प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। हादसा रात करीब 12:20 बजे हुआ। उस समय पुल पर डाले गए केबल का खिंचाव करने के लिए जैक लगाया जा रहा था। इसी दौरान तेज आंधी और तकनीकी दबाव के बीच पांच नंबर पिलर अचानक भरभराकर गिर पड़ा। पिलर गिरते ही पुल का स्लैब (ऊपरी हिस्सा) भी टूटकर नीचे आ गिरा और वहां काम कर रहे मजदूर उसकी चपेट में आ गए।
छह लोगों की दर्दनाक मौत
हादसे में बांदा जिले के मंटौध थाना क्षेत्र के भूरागढ़ भुरैड़ी निवासी सावंत यादव उर्फ गंगाचरण (28), सभाजीत उर्फ लाला (26), चिल्ला गांव निवासी लोकेंद्र निषाद (22) और कुलदीप निषाद (19) की मलबे में दबकर मौत हो गई। इसके अलावा हाइड्रा मशीन में बैठे गनमैन राजेश पाल (45) निवासी अचपुरा थाना मौदहा और गार्ड पुष्पेंद्र सिंह चौहान (34) निवासी स्वासा खुर्द थाना ललपुरा की भी दबकर मौत हो गई। प्रशासन ने सभी शव पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिए हैं।