Nikay Chunav: सत्तारूढ़ दल पर भरोसा जताते रहे हैं अब तक मतदाता, निकाय चुनाव में इस गठजोड़ की मिली थी जीत

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निकाय चुनाव में सत्तारूढ़ दल पर मतदाताओं का भरोसा कायम रहता है। दावों का दम देखना होगा। साल 2015 में थी शिअद-भाजपा गठबंधन की सरकार थी, निकाय चुनाव में इसी गठजोड़ की जीत मिली थी। साल 2020 में कोविड की वजह से 2021 में निकाय चुनाव हुए थे। इस दौरान सत्ता में काबिज कांग्रेस ने  बढ़त ली थी। अबकी बार सत्ता में ‘आप’ सरकार है मगर विरोधियों की चुनौती कम नहीं है।

Punjab Civic Polls Heat Up Amid Violence Ballot Paper Row and Victory Claims

स्थानीय निकाय चुनाव में अक्सर सत्तारूढ़ दल पर ही पंजाब के मतदाताओं का भरोसा कायम रहता है क्योंकि सूबे के सयाने मतदाता जानते हैं कि डबल इंजन की सरकार होगी तभी उनके वार्डों के विकास को रफ्तार मिलेगी। अब की माैसम के गर्म मिजाज के साथ चुनावी माहाैल में भी काफी गर्मी दिखी। हिंसा हुई, हंगामे हुए और हो-हल्ले से चुनाव ग्रस्त दिखा।

उधर दिग्गजों से लेकर समर्थकों तक तल्खी देखी गई। परिस्थितियां संभालने के लिए पुलिस और अफसर भी दौड़ते रहे। शाम को चुनाव खत्म होने के तुरंत बाद आप के नेताओं ने जीत का दावा करना शुरू कर दिया।

उधर दिग्गजों से लेकर समर्थकों तक तल्खी देखी गई। परिस्थितियां संभालने के लिए पुलिस और अफसर भी दौड़ते रहे। शाम को चुनाव खत्म होने के तुरंत बाद आप के नेताओं ने जीत का दावा करना शुरू कर दिया।

साल 2015 में पंजाब में शिअद और भाजपा गठबंधन की सरकार थी। तब भी सूबे के मतदाताओं ने निकाय चुनाव में इसी गठजोड़ पर विश्वास जताया था। साल 2020 में कोविड महामारी की वजह से इन चुनाव को स्थगित कर दिया गया था।
निकाय चुनाव में कांग्रेस को मिली थी अच्छी बढ़त
चुनाव फरवरी 2021 में करवाए गए और उस समय कांग्रेस सरकार सत्ता में थी। लिहाजा निकाय चुनाव में कांग्रेस को अच्छी बढ़त मिली थी। इसी ट्रेंड को देखते हुए इस बार सत्तारूढ़ आप सरकार चुनाव में जीत हासिल करने के प्रति आश्वस्त दिख रही है मगर इस बात से इन्कार नहीं किया जा सकता कि अब की बार आप के सामने विरोधियों ने कड़ी चुनौतियां खड़ी की हैं।
गर्मी की तल्खी का असर
गर्मी की तल्खी ने भी इस बार निकाय चुनाव को खासा प्रभावित किया। साल 2015 और 2021 में चुनाव सर्द मौसम में हुए थे लेकिन 2026 का यह चुनाव 42 से 44.7 डिग्री सेल्सियस तापमान के बीच हुआ। शायद इस वजह से भी बहुत से मतदाताओं ने मतदान बूथों से दूरी बनाए रखी। साल 2021 में वोट प्रतिशत 73.53 था मगर इस बार यह शाम पांच तक वोट प्रतिशत करीब 61.5 प्रतिशत ही हुआ।

राजनीतिक मामलों के जानकार हरबंस सिंह कहते हैं कि 60 से 65 प्रतिशत मतदान को सत्ता विरोधी लहर नहीं माना जा सकता। आप के राष्ट्रीय अध्यक्ष अरविंद केजरीवाल ने भी कुछ दिन पहले लुधियाना में यह दावा किया था कि पंजाब में सरकार के खिलाफ एंटी इनकम्बेंसी (सत्ता विरोधी लहर) का माहौल नहीं है जबकि कांग्रेस, शिअद और भाजपा के आला नेता दावा कर रहे हैं कि इस बार मतदाता सरकार की नीतियों और सूबे की बिगड़ी कानून व्यवस्था से खासे तंग हैं।

रिपोर्ट कार्ड बनाम घेराबंदी
निकाय चुनाव में सरकार के चार साल का रिपोर्ट कार्ड और विरोधी दलों की घेराबंदी ही मुख्य मुद्दा बने क्योंकि भले ही चुनाव छोटा था मगर इसका असर आठ महीने बाद प्रस्तावित सूबे के विधानसभा चुनाव पर जरूर पड़ेगा।
आप प्रत्याशियों ने सरकार की योजनाओं और सुविधाओं पर फोकस करते हुए विकास के लिए डबल इंजन सरकार के महत्व पर ज्यादा जोर दिया। वहीं विरोधियों ने कई मुद्दों पर सरकार की घेराबंदी पर ज्यादा मेहनत की मगर तस्वीर नतीजों के बाद ही साफ होगी।
Farheen
Author: Farheen

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