सनटेक सिटी जमीन घोटाले में ED की बड़ी कार्रवाई, मुख्य प्रवर्तक अजय सहगल गिरफ्तार

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जांच एजेंसी ने मामले में सख्त रुख अपनाते हुए ग्रेटर मोहाली क्षेत्र विकास प्राधिकरण के मुख्य प्रशासक संदीप कुमार को भी तलब किया है। अधिकारियों को जमीन, भूमि उपयोग परिवर्तन और अन्य दस्तावेजों सहित व्यक्तिगत रूप से पेश होने के आदेश दिए गए हैं।

Major Action in Suntech City Land Scam Chief Promoter Ajay Sehgal Arrested

बहुचर्चित सनटेक सिटी ज़मीन घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय ने बड़ी कार्रवाई करते हुए ‘इंडियन कोऑपरेटिव हाउस बिल्डिंग सोसायटी’ के सचिव और सनटेक सिटी के मुख्य प्रवर्तक अजय सहगल को गिरफ्तार कर लिया है। उन्हें धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत हिरासत में लिया गया। ईडी अब विशेष अदालत से उनका रिमांड लेकर गहन पूछताछ की तैयारी में है।

जांच एजेंसी के अनुसार, मामले में करोड़ों रुपये की कथित हेराफेरी, निवेशकों के साथ धोखाधड़ी और जमीन संबंधी बड़े फर्जीवाड़े के सबूत सामने आए हैं। ईडी ने इस मामले में ग्रेटर मोहाली क्षेत्र विकास प्राधिकरण के मुख्य प्रशासक संदीप कुमार को भी तलब किया है। अधिकारियों को जमीन, भूमि उपयोग परिवर्तन और अन्य दस्तावेजों सहित व्यक्तिगत रूप से पेश होने के निर्देश दिए गए हैं।

ईडी जांच में बड़ा खुलासा हुआ है कि 15 किसानों की करीब 30.5 एकड़ ज़मीन से जुड़े कथित फर्जी कंसेंट लेटर तैयार किए गए। इन दस्तावेजों पर किसानों के नकली हस्ताक्षर और फर्जी अंगूठे के निशान लगाकर हासिल किया गया। इसी आधार पर ‘सनटेक सिटी’ नामक विशाल रियल एस्टेट परियोजना विकसित की गई।
जांच एजेंसी का दावा है कि अजय सहगल ने कथित फर्जी के आधार पर केवल सनटेक सिटी ही नहीं, बल्कि ‘ला कैनेला’ नामक मल्टी-स्टोरी रिहायशी परियोजना और ‘डिस्ट्रिक्ट-7’ कमर्शियल कॉम्प्लेक्स भी विकसित किए।

डी की जांच अब अजय सहगल के करीबी सहयोगियों, बिल्डरों और बिचौलियों तक पहुंच गई है। सुरेश कुमार बजाज पर किसानों के कथित जाली हस्ताक्षर और अंगूठे वाले सहमति पत्र तैयार करने के आरोप लगे हैं। वहीं खरड़ निवासी बिचौलिये नितिन गोहिल के ठिकानों पर लंबी छापेमारी की गई।

जांच एजेंसियों का आरोप है कि प्रभावशाली लोगों से सांठगांठ कर बिल्डरों को संरक्षण दिलाने और परियोजनाओं के नाम पर निवेशकों से भारी रकम जुटाने का नेटवर्क काम कर रहा था। जांच में यह भी सामने आया है कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए आरक्षित प्लॉट अब तक  के एस्टेट ऑफिसर को ट्रांसफर नहीं किए गए। एजेंसी इसे नियमों का गंभीर उल्लंघन मान रही है।

पीड़ित निवेशकों द्वारा पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में याचिका दायर किए जाने के बाद मामले ने तूल पकड़ा। अदालत के सख्त रुख को देखते हुए संबंधित सोसायटी का लाइसेंस पहले ही रद्द किया जा चुका है। फिलहाल ईडी जब्त किए गए डिजिटल रिकॉर्ड, बैंक खातों और कथित हवाला लेनदेन की गहराई से जांच कर रही है, ताकि घोटाले से जुड़े धन और उसके अंतिम लाभार्थियों तक पहुंचा जा सके।

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Author: Farheen