PIT-NDPS Act: अलीगढ़ में पहली बार लगा पिट एनडीपीएस, जेल में बंद नशा तस्कर पर पुलिस ने की कार्रवाई

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बार बार जेल जाना और फिर जमानत पर बाहर आकर फिर से वही अपराध करना इनकी आदत में शामिल है। इन्हें रोकने के लिए इस सख्त कानून का इस्तेमाल किया गया ताकि अलीगढ़ में बढ़ती नशा तस्करी पर रोक लगाई

first time in Aligarh action under PIT NDPS Act

प्रदेश में नशा तस्करी का बड़ा केंद्र बनते जा रहे अलीगढ़ में पहली बार पिट एनडीपीएस एक्ट के तहत पुलिस ने कार्रवाई की है। डीएम और एसएसपी की संयुक्त संस्तुति पर जेल में बंद एक आदतन नशा तस्कर को पाबंद कर दिया। एनएसए की तर्ज पर माने जाने वाले इस सख्त कानून के तहत आरोपी को अधिकतम दो वर्ष तक जेल में रखा जा सकेगा। इसके अलावा, पुलिस ने आठ और तस्कर चिह्नित किए हैं, जिन पर ये कार्रवाई होगी।

जानकारी के अनुसार, इगलास क्षेत्र के गांव कोका के कोमल सिंह बीते एक साल से नशा तस्करी के आरोप में जेल में बंद है। नशा तस्करी में आरोपी कोमल सिंह का बार बार जेल जाना और फिर जमानत पर बाहर आने का रिकार्ड भी है। इसी अपराध शैली के चलते डीएम-एसएसपी की संयुक्त रिपोर्ट पर पहली बार जिले में पिट एनडीपीएस एक्ट का इस्तेमाल करते हुए आरोपी को पाबंद किया गया। पुलिस के मुताबिक, कोमल सिंह के अलावा रोरावर क्षेत्र में पकड़े गए गोधा के अख्तर व क्वार्सी के इजराइल और क्वार्सी से पकड़े गए आफताब उर्फ कप्तान, नवील, अब्दुल्ला, बिलाल, आफताब की दो बेटियों पर भी पिट एनडीपीएस की कार्रवाई की जाएगी। ये सभी आरोपी भी तस्करी के आरोप में जेल में बंद हैं।

पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि बार बार जेल जाना और फिर जमानत पर बाहर आकर फिर से वही अपराध करना इनकी आदत में शामिल है। इन्हें रोकने के लिए इस सख्त कानून का इस्तेमाल किया गया ताकि अलीगढ़ में बढ़ती नशा तस्करी पर रोक लगाई जा सके।

नशा तस्करी और तस्करों के खिलाफ जिले में ऑपरेशन दहन जारी है। पहली बार पिट एनडीपीएस का इस्तेमाल किया है लेकिन अब इसे आगे जारी रखा जाएगा। ताकि तस्करों के खिलाफ सख्ती से निपटा जा सके। पुलिस की कार्रवाई यहां तक सीमित नहीं है। एक तस्कर की 3.33 करोड़ की संपत्ति को जब्त भी किया है।– नीरज जादौन, एसएसपी

क्या है पिट एनडीपीएस एक्ट
पिट-एनडीपीएस एक्ट नशा तस्करी के आदतन अपराधियों के लिए कठोर कानून है। इसके तहत किसी सामान्य प्राथमिकी या जमानत प्रक्रिया का इंतजार किए बिना नशा तस्करों को सीधे हिरासत में ले लिया जाता है। इसके तहत पकड़े गए अपराधी को बिना किसी जमानत के सीधे एक साल या 2 साल तक जेल रखा जा सकता है। इसके तहत कार्रवाई गृह विभाग द्वारा जारी किए गए विशेष निरुद्ध आदेश के बाद ही होती है। एनएसए की तरह सरकार या सक्षम अधिकारी आदतन तस्कर को हिरासत में लेने का आदेश कर सकते हैं। फिर उच्च स्तरीय सलाहकार बोर्ड तय करता है कि व्यक्ति को निरुद्ध रखा जाएगा या रिहा किया जाएगा। बोर्ड हिरासत की अवधि को बढ़ाने की अनुमति दे सकता है।

ऑपरेशन दहन : 6200 में से 1800 किलो गांजा नष्ट
ऑपरेशन दहन के तहत जिला पुलिस ने पिछले छह माह में कुल 6200 किलो गांजा बरामद कर 40 से अधिक अपराधी गिरफ्तार किए हैं। इनसे बरामद माल में अब तक 1800 किलो जिला स्तरीय ड्रग डिस्पोजल कमेटी की अनुमति पर मथुरा की वायोवेस्ट फैक्टरी में नष्ट कर दिया। बीते 20 मई को जिला पुलिस ने 818 किलो माल नष्ट किया, जिसकी कीमत चार करोड़ 11 लाख रुपये है। बाकी 20 करोड़ रुपये से भी ज्यादा कीमत का 4400 किलो गांजा अभी भी जिले के थानों में मौजूद है।

ऐसे गांजा बेल्ट बन गया अलीगढ़
जिले के थानों में चार हजार किलो से भी ज्यादा गांजा मौजूद है। पुलिस के ही मानें तो इससे कहीं ज्यादा नशा उत्पाद अलीगढ़ आ और जा रहे हैं। ओडिशा, झारखंड से होते हुए अलीगढ़ अलग अलग कैरियर कभी ट्रक तो कभी ट्रेन के जरिए माल लेकर पहुंचते हैं। अलीगढ़ आने के बाद यह माल अलग अलग लोकेशन के लिए आगे बढ़ता है जिसमें उत्तर प्रदेश के अलावा दिल्ली और एनसीआर के शहर सबसे बड़े डिलीवरी पॉइंट हैं। अलीगढ़ शहर में भी इसकी मांग बहुत है। कई इलाकों में एजेंट सक्रिय हैं और किशोर या कम उम्र के युवाओं से छोटी छोटी पुड़िया में नशा उत्पाद बिकवा रहे हैं।

 

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Author: ILMA NEWSINDIA