IDFC Bank Scam: 200 संदिग्ध लेनदेन उजागर, ऑडिट से बचने के लिए असली वेंडरों को भी किया भुगतान

Picture of priya singh

priya singh

SHARE:

सीबीआई से जुड़े सूत्रों के मुताबिक गबन की गई भारी-भरकम राशि का इस्तेमाल आरोपियों ने अपने लिए चल-अचल संपत्तियां खरीदने में किया है। वहीं ऋभव ऋषि के बयान में कुछ ऐसे बिचौलियों का जिक्र आया है जिनका सचिवालय में नियमित आना-जाना था।

IDFC Bank Scam 200 Suspicious Transactions Uncovered Payments Made Even to Genuine Vendors to Evade Audit

आईडीएफसी बैंक से जुड़े 590 करोड़ रुपये के बहुचर्चित घोटाले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की जांच में कई खुलासे हो रहे हैं। जांच के दौरान एजेंसी को 200 से अधिक ऐसे हाई-वैल्यू संदिग्ध लेनदेन का पता चला है जो जांच के दायरे में आए हैं।

सीबीआई से जुड़े सूत्रों के मुताबिक गबन की गई भारी-भरकम राशि का इस्तेमाल आरोपियों ने अपने लिए चल-अचल संपत्तियां खरीदने में किया है। वहीं ऋभव ऋषि के बयान में कुछ ऐसे बिचौलियों का जिक्र आया है जिनका सचिवालय में नियमित आना-जाना था। सीबीआई देख रही है कि क्या इन बिचौलियों ने सचिवालय के अधिकारियों के नाम का इस्तेमाल किया या वाकई कोई अधिकारी पर्दे के पीछे से इस सिंडिकेट को गाइड कर रहा था। 

फर्जी हस्ताक्षर और डेबिट नोट का खेल

जांच में खुलासा हुआ है कि सरकारी अधिकारियों के फर्जी हस्ताक्षरों के जरिये चेक और डेबिट नोट जारी किए गए। कागजों पर सरकारी पैसा फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) के रूप में बैंक में सुरक्षित दिखाया गया जबकि असल में उसे सिस्टम से बाहर निकाल लिया गया था। बैंक अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए सीबीआई ने पाया कि बिना मंजूरी के खाते खोले गए और करोड़ों का लेनदेन होने दिया गया। अब एजेंसी उन बैंक कर्मियों के हस्ताक्षरों की पहचान कर रही है जिन्होंने इन अवैध डेबिट नोट्स को क्लियर किया।

ऑडिट से बचने के लिए असली वेंडरों को भी पैसे ट्रांसफर किए

आरोपियों ने पूछताछ में माना है कि उन्होंने कुछ असली वेंडरों को भी सरकारी खातों से भुगतान किया था। असली वेंडरों को कुछ भुगतान इसलिए किए ताकि ऑडिट में लगे कि खाता सामान्य रूप से चल रहा है और किसी को शक न हो। सीबीआई अब आरोपियों की न्यायिक हिरासत के दौरान भी उन पर कड़ी नजर रखेगी और शायद भविष्य में कुछ गवाहों को प्रोटेक्शन देने की जरूरत पड़े। सीबीआई इस बात की जांच कर रही है कि क्या बैंक के भीतर कोई ऐसा सॉफ्टवेयर एक्सपर्ट या अधिकारी था जिसने सिस्टम की खामियों की जानकारी आरोपियों को दी। बिना तकनीकी मिलीभगत के इतने बड़े स्तर पर डेबिट नोट्स का खेल मुमकिन नहीं है।

स्वाति और अभय कुमार का डिजिटल कनेक्शन

सीबीआई ने आरोपी स्वाति और अभय कुमार के डिजिटल उपकरणों (फोन और लैपटॉप) से भारी मात्रा में डेटा रिकवर किया है। जांच में पाया है कि ये आरोपी केवल पैसे लेने वाले नहीं थे बल्कि शेल कंपनियों के संचालन और फर्जी ईमेल/दस्तावेज तैयार करने में सीधे तौर पर शामिल थे। उनके डिवाइस से मिली इमेल व अन्य रिपोर्ट यह साबित करती है कि घोटाले की साजिश का डिजिटल ब्लूप्रिंट इन्हीं के पास था।

अभिषेक सिंगला और अन्य की मनी लॉन्ड्रिंग में भूमिका

अभिषेक सिंगला और अन्य आरोपियों ने घोटाले की रकम को सीधे अपने पास रखने के बजाय तीसरे पक्ष को भेजा। सीबीआई ने इन पांचों से पूछताछ में उन कंपनियों और लोगों के नाम उगलवाए हैं जिनका बैंक से कोई लेना-देना नहीं था। यह लेयरिंग (पैसे को घुमाना) इसलिए की गई ताकि अगर पकड़े भी जाएं तो मुख्य रिकवरी न हो सके।

इंडिपेंडेंट विटनेस के सामने बयानों का मिलान

सीबीआई ने आरोपियों से पूछताछ केवल बंद कमरे में नहीं बल्कि स्वतंत्र गवाहों की मौजूदगी में की। इस दौरान आरोपियों ने एक-दूसरे के खिलाफ बयान दिए हैं। सीबीआई ने इन पांचों को एक साथ बिठाकर पूछताछ की जिससे पता चला कि घोटाले की रकम का बंटवारा किस अनुपात में हुआ था और किसका काम बैंक मैनेज करना था और किसका काम फर्जी कागजात बनाना। इस काम में लोक सेवकों का संरक्षण प्राप्त था। रिमांड के दौरान इन पांचों ने उन अधिकारियों के नाम और पद उजागर किए हैं जिनकी मिलीभगत से आईडीएफसी बैंक में बिना किसी फाइल नोटिंग के खाते खुले और करोड़ों रुपये ट्रांसफर हुए। इन पांचों आरोपियों ने रिमांड के दौरान उन संपत्तियों और बैंक खातों का खुलासा किया है जहां इन्होंने घोटाले का पैसा निवेश किया था। सीबीआई अब इन संपत्तियों को अटैच करने की प्रक्रिया शुरू कर चुकी है।

रिभव ऋषि का दो दिन का रिमांड बढ़ा

आईडीएफसी बैंक से जुड़े 590 करोड़ के गबन मामले में सीबीआई की जांच तेज हो गई है। एजेंसी ने सोमवार को पंचकूला की सीबीआई की विशेष कोर्ट में छह आरोपियों को पेश किया। इस दौरान मुख्य आरोपी रिभव ऋषि का तीन दिन का अतिरिक्त रिमांड मांगा गया, लेकिन कोर्ट ने उसे दो दिन की ही मंजूरी दी। वहीं अन्य पांच आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। सीबीआई अब डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पूछताछ को आगे बढ़ा रही है।

एजेंसी ने पंचकूला स्थित फाॅरेंसिक साइंस लैब से व्हाट्सएप चैट और अन्य डिजिटल डेटा की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। इन साक्ष्यों के आधार पर आरोपी से आमना-सामना कर पूछताछ की जाएगी ताकि साजिश की पूरी कड़ी को जोड़ा जा सके। सीबीआई ने कोर्ट को यह भी बताया कि अन्य पांच आरोपियों अभय कुमार, स्वाति, अभिषेक सिंगला, नरेश कुमार और मनीष जिंदल की भूमिका भी जांच में सामने आई है।

priya singh
Author: priya singh

सबसे ज्यादा पड़ गई