UP: निजी संपत्ति पर नमाज पढ़ने पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक, कहा- शांतिभंग होने पर प्रशासन कार्रवाई के लिए स्वतंत्र

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इलाहाबाद हाईकोर्ट  ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि व्यक्तिगत सुरक्षा और निजी संपत्ति की आड़ में सार्वजनिक व्यवस्था और शांति को खतरे में नहीं डाला जा सकता। कोर्ट ने निजी संपत्ति पर नमाज पढ़ने पर रोक लगा दी है।

High Court bans offering namaz on private property, administration free to take action if peace is disturbed

इलाहाबाद हाईकोर्ट  ने एक महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए स्पष्ट किया है कि व्यक्तिगत सुरक्षा और निजी संपत्ति की आड़ में सार्वजनिक व्यवस्था और शांति को खतरे में नहीं डाला जा सकता। कोर्ट ने याचियों को निजी संपत्ति पर भीड़ जुटाकर नमाज पढ़ने पर रोक लगा दी है। साथ ही कहा कि शांति व्यवस्था भंग होने पर प्रशासन कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है। यह आदेश न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने तारिक खान की याचिका पर दिया है।

बरेली निवासी याची तारिक खान ने रमजान के दौरान निजी संपत्ति पर नमाज पढ़ने से रोक लगाने और शांति भंग में किए गए चालान को चुनौती देते हुए याचिका दायर की थी। इस मामले में कोर्ट ने बरेली की डीएम और एसएसपी को तलब किया था। न्यायालय के पूर्व  आदेश के अनुपालन में बरेली के जिला मजिस्ट्रेट और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश हुए। सुनवाई के दौरान अपर महाधिवक्ता अनूप त्रिवेदी ने शासन का पक्ष रखते हुए न्यायालय को अवगत कराया कि याचिकाकर्ता सुरक्षा की आड़ में नियमों का दुरुपयोग कर रहा है।

हलफनामे और साक्ष्यों के माध्यम से अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता की निजी संपत्ति पर प्रतिदिन 52 से 62 लोग नमाज के लिए एकत्रित हो रहे हैं, जिससे क्षेत्र की सांप्रदायिक शांति और सुरक्षा के लिए जोखिम पैदा हो रहा है। कानून और व्यवस्था बनाए रखना अधिकारियों का प्राथमिक कर्तव्य है, और ऐसी प्रथाओं को जारी रहने की अनुमति नहीं दी जा सकती जो सार्वजनिक शांति में व्यवधान डालें। 

16 जनवरी को किया गया चालान वापस लेने का निर्देश

न्यायालय के कड़े रुख को देखते हुए याचिकाकर्ता के अधिवक्ता  राजेश कुमार गौतम ने अदालत को आश्वस्त किया कि भविष्य में उक्त संपत्ति पर नमाज के लिए बड़ी संख्या में लोगों को एकत्रित नहीं किया जाएगा। इस वचन को रिकॉर्ड पर लेते हुए हाईकोर्ट ने उम्मीद जताई कि याचिकाकर्ता अपने वादे का पालन करेगा। हालांकि, पीठ ने कड़े शब्दों में कहा कि यदि इस वचन का उल्लंघन होता है और नमाज के बहाने भीड़ जुटाई जाती है, जिससे क्षेत्र की शांति प्रभावित होती है, तो जिला प्रशासन और पुलिस कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र होंगे।

इसी क्रम में, न्यायालय ने राज्य अधिकारियों को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता और अन्य संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध 16 जनवरी 2026 को जारी किए गए चालान तत्काल वापस लिए जाएं और इस मामले में पूर्व में जारी किए गए अवमानना नोटिसों को भी रद्द कर दिया गया। साथ ही कोर्ट ने पूर्व में हसीन खान को दी गई सुरक्षा प्रशासन को वापस लेने का निर्देश दिया। इन टिप्पणियों और दिशा-निर्देशों के साथ उच्च न्यायालय ने रिट याचिका का निस्तारण कर दिया।

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Author: ILMA NEWSINDIA

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