विशेषज्ञों का कहना है कि मिलावटी और घटिया खाद न केवल फसलों को नुकसान पहुंचाती है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता घटाने के साथ-साथ जनस्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालती है।

पंजाब में खाद में मिलावट के मामलों में कमी जरूर आई है, लेकिन स्थिति अभी भी पूरी तरह संतोषजनक नहीं है। रसायन और उर्वरक मंत्रालय की ताजा रिपोर्ट के अनुसार राज्य में अब भी हर 20 में से एक खाद का सैंपल जांच में फेल हो रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि मिलावटी और घटिया खाद न केवल फसलों को नुकसान पहुंचाती है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता घटाने के साथ-साथ जनस्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालती है।
रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2020-21 में हर 17 में से एक सैंपल फेल हो रहा था। पिछले वित्तीय वर्ष में यह अनुपात सुधरकर 20 में एक तक पहुंचा है। लुधियाना और फरीदकोट में स्थापित खाद परीक्षण प्रयोगशालाओं की वार्षिक क्षमता 3600 सैंपल जांचने की है, लेकिन सरकार ने निगरानी बढ़ाते हुए इससे अधिक सैंपलों की जांच कराई है।
वर्ष 2024-25 में 3940 सैंपलों की जांच की गई, जिनमें से 191 मानकों पर खरे नहीं उतरे। वर्ष 2023-24 में 3856 सैंपलों में से 163 फेल पाए गए। वर्ष 2022-23 में 3571 में से 183, वर्ष 2021-22 में 3571 में से 183 और वर्ष 2020-21 में 3418 में से 198 सैंपल फेल हुए थे। आंकड़े बताते हैं कि मिलावट की दर में गिरावट आई है, पर समस्या अभी भी बनी हुई है।
नाै माह में 293 कारण बताओ नोटिस जारी
कृषि विभाग ने अप्रैल 2025 से जनवरी 2026 तक घटिया खाद बेचने के मामलों में 293 कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं। इस अवधि में 92 लाइसेंस निलंबित किए गए और तीन एफआईआर दर्ज की गईं। कालाबाजारी के मामलों में 37 नोटिस जारी कर एक लाइसेंस निलंबित किया गया तथा एक एफआईआर दर्ज हुई। हरियाणा में भी इसी अवधि में 51 नोटिस, 12 लाइसेंस निलंबन और छह एफआईआर दर्ज की गई हैं।
जांच के लिए बनाईं विशेष टीमें
घटिया खाद की रोकथाम के लिए कृषि विभाग ने पांच विशेष टीमें गठित की हैं। पिछले वर्ष अप्रैल और जून में चलाए गए विशेष अभियान के दौरान 737 सैंपल लिए गए, जिनमें 11 मामलों में मानक से कम गुणवत्ता पाई गई और दो एफआईआर दर्ज की गईं। हाल ही में मलेरकोटला में अनधिकृत खाद और कीटनाशकों के भंडारण के मामले में एक फर्म के खिलाफ कार्रवाई भी की गई।
उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी : खुड्डियां
कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने कहा कि किसानों को मानक कृषि उत्पाद उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। खाद और कीटनाशकों की बिक्री में किसी भी प्रकार के उल्लंघन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।