
कुरुक्षेत्र। पवित्र ब्रह्मसरोवर के समक्ष केडीबी के मेला ग्राउंड में लगने वाले राज्य स्तरीय पशु मेले में धर्मनगरी में तीन दिन तक गाय, भैंस, भेड़, बकरी से लेकर ऊंट व घोड़े भी रैंप पर उतरेंगे और एक-दूसरे को पछाड़ते हुए इनाम जीतेंगे। करीब 20 साल बाद धर्मनगरी में लगने वाले इस मेले को खास पहचान देने की तैयारी की जा रही है। इसमें हर रोज प्रदेशभर से 15,000 पशुपालक भी पहुंचेंगे। पशुपालक न केवल अपने पशुओं को प्रदर्शित करेंगे बल्कि उन्हें पशु पालन की आधुनिक तकनीकों से रूबरू भी कराया जाएगा।
6 फरवरी से शुरू होने वाले मेले के लिए 200 सरकारी बसें लगाई गई हैं, जो प्रदेश के कोने-कोने से नि:शुल्क पशुपालकों को लेकर यहां पहुंचेंगे। वहीं आसपास के किसान भी मेले का हिस्सा बनेंगे। मेले में 1500 पशु पहुंचेंगे जिनमें सुअर भी शामिल होंगे। 53 श्रेणियों में पशुओं के बीच प्रतियोगिता कराई जाएंगी। रैंप पर उतारने के लिए खास रिंग तैयार किया जा रहा है। वहीं पशुओं के लिए चारे से लेकर पशुपालकों के रहने व खाने-पीने तक का इंतजाम किया गया है। हर रोज विजेता रहने वाले पशुओं के पशुपालकों को सम्मानित किया जाएगा। मेले के समापन अवसर पर मुख्यमंत्री नायब सैनी मुख्यातिथि होंगे।
20 साल पहले लगा था पशु मेला : डॉ. जसबीर
पशु पालन विभाग के एसडीओ डॉ. जसबीर सिंह का कहना है कि धर्मनगरी में करीब 20 साल पहले विभाग की ओर से पशु मेला लगाया गया था लेकिन वह भी इस स्तर पर नहीं था। यह पहला मौका होगा जब 53 श्रेणियों में पशुओं की प्रतियोगिताएं कराई जाएंगी। साहिवाल, एचएफ, मुर्राह जैसी विभिन्न नस्लों के पशुओं का रैंप पर वॉक कराया जाएगा। दो साल पहले इस तरह का पशु मेला महेंद्रगढ़ में लगाया गया था। इस मेले में सिर्फ प्रदेश के ही पशु व पशुपालकों को शामिल किया जाएगा। पशु पालकों को पशुपालन की खास तकनीकों से रूबरू कराने के लिए एनडीआरआई करनाल सहित अन्य पशु संस्थानों के विशेषज्ञ पहुंचेंगे। इससे पशुपालन को बढ़ावा मिलेगा।
पशु पालन विभाग के एसडीओ डॉ. जसबीर सिंह का कहना है कि धर्मनगरी में करीब 20 साल पहले विभाग की ओर से पशु मेला लगाया गया था लेकिन वह भी इस स्तर पर नहीं था। यह पहला मौका होगा जब 53 श्रेणियों में पशुओं की प्रतियोगिताएं कराई जाएंगी। साहिवाल, एचएफ, मुर्राह जैसी विभिन्न नस्लों के पशुओं का रैंप पर वॉक कराया जाएगा। दो साल पहले इस तरह का पशु मेला महेंद्रगढ़ में लगाया गया था। इस मेले में सिर्फ प्रदेश के ही पशु व पशुपालकों को शामिल किया जाएगा। पशु पालकों को पशुपालन की खास तकनीकों से रूबरू कराने के लिए एनडीआरआई करनाल सहित अन्य पशु संस्थानों के विशेषज्ञ पहुंचेंगे। इससे पशुपालन को बढ़ावा मिलेगा।




