महाराष्ट्र की राजनीति का 23 नवंबर 2019 आज भी सियासी गलियारों में रहस्य और रोमांच का पर्याय बना हुआ है। उसी दिन का एक किस्सा अब एक बार फिर चर्चा में है, जब मलबार हिल स्थित राजभवन की एक लिफ्ट में लिए गए फैसलों ने पूरे राज्य की राजनीति की दिशा बदल दी। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर रित्विक भालेकर ने अपनी ज़ुबानी उस दिन की अनकही कहानी साझा की है।

रित्विक भालेकर के मुताबिक, वह सुबह का वक्त था, जब अचानक राजनीतिक हलचल तेज हो गई। राजभवन में हलचल, फोन कॉल्स की गूंज और चेहरों पर तनाव साफ दिखाई दे रहा था। उसी दौरान मलबार हिल की लिफ्ट में हुई एक संक्षिप्त मुलाकात और बातचीत ने बड़े सियासी फैसलों की नींव रख दी। भालेकर बताते हैं कि उस वक्त किसी को अंदाजा नहीं था कि कुछ घंटों में महाराष्ट्र की सत्ता की तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी।
उनके अनुसार, अजित पवार उस दिन पूरी तरह आत्मविश्वास में नजर आ रहे थे। फैसले तेजी से लिए जा रहे थे और रणनीति बेहद गोपनीय रखी गई थी। लिफ्ट के भीतर हुई बातचीत भले ही कुछ मिनटों की थी, लेकिन उसका असर महीनों तक महसूस किया गया। भालेकर का कहना है कि उस समय कई नेता असमंजस में थे, जबकि अजित पवार अपनी राजनीतिक चाल को लेकर पूरी तरह स्पष्ट दिखाई दे रहे थे।
23 नवंबर की सुबह अजित पवार ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली और देवेंद्र फडणवीस मुख्यमंत्री बने। इस अप्रत्याशित घटनाक्रम ने उद्धव ठाकरे सहित कई नेताओं की नींद उड़ा दी थी। हालांकि यह सरकार ज्यादा दिन नहीं चल सकी, लेकिन इस पावर गेम ने अजित पवार को एक ऐसे नेता के रूप में स्थापित किया, जो अचानक और निर्णायक कदम उठाने से नहीं हिचकते।
रित्विक भालेकर का कहना है कि मलबार हिल की उस लिफ्ट में जो कुछ हुआ, वह कभी आधिकारिक रिकॉर्ड का हिस्सा नहीं बनेगा, लेकिन महाराष्ट्र की राजनीति में उसका असर हमेशा याद रखा जाएगा। यह कहानी न सिर्फ सत्ता की चालों को उजागर करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि राजनीति में कुछ मिनट और कुछ फैसले इतिहास बदलने के लिए काफी होते हैं।

