भागीरथपुरा दूषित पानी कांड ने पूरे इलाके को दहशत और मातम में डुबो दिया है। बीते 30 दिनों में यहां जहरीला और दूषित पानी पीने से 30 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि दर्जनों लोग गंभीर रूप से बीमार हैं और अलग-अलग अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि हर दिन नए मरीज सामने आ रहे हैं और मौत का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है।

मामले की शुरुआत तब हुई जब भागीरथपुरा इलाके में बड़ी संख्या में लोगों को उल्टी, दस्त, बुखार और पेट दर्द की शिकायत होने लगी। शुरुआत में इसे मौसमी बीमारी मानकर नजरअंदाज किया गया, लेकिन जब लगातार मौतें होने लगीं, तब प्रशासन हरकत में आया। जांच में सामने आया कि इलाके में सप्लाई होने वाला पानी गंभीर रूप से दूषित है, जिसमें हानिकारक बैक्टीरिया और रसायन पाए गए।
स्वास्थ्य विभाग की प्रारंभिक रिपोर्ट के मुताबिक, पानी की पाइपलाइन में लीकेज और गंदे नाले का पानी मिल जाने से यह स्थिति बनी। कई जगहों पर वर्षों पुरानी पाइपलाइन जर्जर हालत में पाई गई, जिसकी समय पर मरम्मत नहीं कराई गई। स्थानीय लोगों का आरोप है कि उन्होंने पहले भी कई बार दूषित पानी की शिकायत की थी, लेकिन प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
मौतों के बाद प्रशासन ने इलाके में वैकल्पिक पेयजल की व्यवस्था शुरू की और टैंकरों से साफ पानी सप्लाई कराया जा रहा है। साथ ही प्रभावित इलाकों में मेडिकल कैंप लगाए गए हैं, जहां लोगों की जांच और दवाइयां दी जा रही हैं। गंभीर मरीजों को जिला और मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में रेफर किया गया है।
इस पूरे मामले को लेकर राजनीति भी तेज हो गई है। विपक्ष ने इसे प्रशासनिक लापरवाही बताते हुए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है। वहीं प्रशासन का कहना है कि मामले की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दे दिए गए हैं और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल भागीरथपुरा में हालात अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाए हैं। लोग डर और गुस्से के माहौल में जीने को मजबूर हैं। प्रशासन की चुनौती अब न सिर्फ बीमारी पर काबू पाना है, बल्कि लोगों का टूटा हुआ भरोसा भी वापस जीतना है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि इस भयावह त्रासदी के लिए आखिर जिम्मेदार कौन है।

