Rajasthan News: ‘आपसी सहमति से तलाक पर फैमिली कोर्ट रोक नहीं लगा सकता’, राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

Picture of SHAREEN NEWSINDIA

SHAREEN NEWSINDIA

SHARE:

Rajasthan: कोर्ट ने साफ कहा कि जब मुस्लिम पति-पत्नी दोनों तलाक पर सहमत हों, तो फैमिली कोर्ट को तकनीकी आधार पर विवाह विच्छेद से इनकार नहीं करना चाहिए।

राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: 1 फरवरी से नहीं चलेगी हाथ से लिखी रिपोर्ट,  जान लीजिए क्या होंगे बड़े बदलाव - rajasthan high court big decision  handwritten reports ...

राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ ने मुस्लिम पर्सनल लॉ से जुड़े एक अहम और नजीर बनने वाले फैसले में आपसी सहमति से हुए मुबारात को पूरी तरह वैध तलाक घोषित किया है। कोर्ट ने साफ कहा कि जब मुस्लिम पति-पत्नी दोनों तलाक पर सहमत हों, तो फैमिली कोर्ट को तकनीकी आधार पर विवाह विच्छेद से इनकार नहीं करना चाहिए।

यह मामला फैमिली कोर्ट, मेड़ता के उस आदेश से जुड़ा था, जिसमें पत्नी की तलाक याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी गई थी कि तलाक की प्रक्रिया में दो गवाहों की उपस्थिति सिद्ध नहीं है और क्रूरता के ठोस प्रमाण पेश नहीं किए गए। इस आदेश को पत्नी ने राजस्थान हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
मामले की सुनवाई जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस योगेंद्र कुमार पुरोहित की खंडपीठ ने की। हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के आदेश को पलटते हुए कड़ी टिप्पणी की कि यह मामला मियां-बीवी राजी, काजी नहीं मान रहा की स्थिति का जीवंत उदाहरण है। कोर्ट ने कहा कि जब दोनों पक्ष तलाक पर सहमत हैं, तब निचली अदालत का अनावश्यक हस्तक्षेप उचित नहीं है।

हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड के आधार पर माना कि पति ने तीन अलग-अलग तुहर (मासिक धर्म के बीच की अवधि) में तलाक का उच्चारण किया था, जिसे पत्नी ने स्वीकार किया। इसके बाद 20 अगस्त 2024 को दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से लिखित तलाक समझौता (मुबारात) किया, जिसमें मेहर, इद्दत अवधि का भरण-पोषण और आजीवन गुजारा भत्ता तय किया गया था।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सुन्नी मुस्लिम कानून में तलाक के लिए गवाहों की अनिवार्यता नहीं है और फैमिली कोर्ट ने शिया कानून से जुड़े निर्णयों को गलत तरीके से लागू किया। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि जब दोनों पक्ष तलाक को स्वीकार कर चुके हों और कोई विवाद शेष न हो, तो अदालत का दायित्व केवल यह सुनिश्चित करना है कि सहमति स्वेच्छा से और बिना किसी दबाव के दी गई हो।

क्या है मुबारात?
फैसले में यह भी रेखांकित किया गया कि मुबारात मुस्लिम कानून के तहत तलाक का एक मान्य तरीका है, जिसमें पति और पत्नी दोनों आपसी सहमति से विवाह समाप्त करते हैं। ऐसे मामलों में फैमिली कोर्ट को विवाह की स्थिति घोषित करने का अधिकार है और उसे इस अधिकार का प्रयोग करना चाहिए।

राजस्थान की फैमिली अदालतों के लिए दिशा-निर्देश जारी करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि यदि याचिका में यह दावा किया जाए कि विवाह पहले ही मुस्लिम कानून के तहत समाप्त हो चुका है, तो दोनों पक्षों की व्यक्तिगत उपस्थिति में बयान दर्ज कर उनकी स्वेच्छा सुनिश्चित की जाए और लिखित तलाकनामा अथवा समझौते को रिकॉर्ड पर लिया जाए। अंततः अपील स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट ने घोषित किया कि अपीलकर्ता और प्रतिवादी का विवाह मुबारात के माध्यम से विधिवत रूप से समाप्त हो चुका है।

सबसे ज्यादा पड़ गई