पूर्व मुख्यमंत्री चन्नी वीडियो में बोलते दिखे रहे हैं कि पंजाब में प्रदेश अध्यक्ष, महासचिव, नेता प्रतिपक्ष और महिला विंग की अध्यक्ष सभी अपर कास्ट से हैं। ऐसे में बड़े पदों पर दलितों को प्रतिनिधित्व कैसे मिलेगा।

ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के अनुसूचित विभाग की बैठक के दौरान पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी के वायरल वीडियो से कांग्रेस असहज हो गई है। इस वीडियो ने पंजाब कांग्रेस में एक जातिगत विवाद पैदा कर दिया है। यह विवाद ज्यादा तूल न पकड़े, इसके लिए कांग्रेस हाईकमान ने 23 जनवरी को दिल्ली में पंजाब के नेताओं की बैठक बुलाई है।
पूर्व मुख्यमंत्री चन्नी वीडियो में बोलते दिखे रहे हैं कि पंजाब में प्रदेश अध्यक्ष, महासचिव, नेता प्रतिपक्ष और महिला विंग की अध्यक्ष सभी अपर कास्ट से हैं। ऐसे में बड़े पदों पर दलितों को प्रतिनिधित्व कैसे मिलेगा। चन्नी कहते हैं कि यदि पार्टी मानती है की पंजाब में 38% दलित आबादी है तो बड़े पदों पर दलितों को मौका क्यों नहीं दिया गया। इस बैठक में कांग्रेस के अनुसूचित विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेंद्र पाल गौतम भी मौजूद थे।
चन्नी के इस बयान के बाद पंजाब कांग्रेस में खासी हलचल है। पंजाब के नेताओं को यह विवाद पार्टी के भीतर ही कांग्रेसी नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच और लोअर और अपर कास्ट में बढ़ती खाई की तरह दिखने लगा है। चन्नी के यह तेवर भी उस वक्त सामने आए हैं जब पंजाब में विधानसभा चुनाव को सिर्फ एक साल का समय बचा है।
बताते चलें कि पिछले दिनों मुक्तसर रैली के दौरान पंजाब के प्रभारी व पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने साफ कर दिया था कि अगले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस बिना मुख्यमंत्री चेहरे के चुनाव लड़ेगी। इसी घोषणा के बाद से चन्नी मायूस नजर आ रहे हैं क्योंकि वे खुद को इस चुनाव में सीएम फेस के रूप में प्रोजेक्ट कर रहे थे। बहरहाल, कांग्रेस हाईकमान इस इस विवाद को जल्द खत्म करना चाहती है।
इस विवाद पर पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह वेडिंग ने कहा कि चन्नी को सांसद बनाया गया। रंधावा की जगह उन्हें मुख्यमंत्री भी बनाया गया था। वे कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सदस्य भी हैं। इसके बावजूद चन्नी को ऐसी बात नहीं करनी चाहिए। दलित हमारे सिर का ताज हैं और आगे भी रहेंगे। पंजाब एक सेक्युलर स्टेट है और यहां जात-पात नहीं चलता। इसलिए इन बातों का कोई मतलब नहीं है।