Donkey Route: पढ़े-लिखे कम, अंग्रेजी कमजोर… विदेश जाने की चाह में अपनाते हैं डंकी रूट, PU की स्टडी में खुलासा

Picture of NIMRA SALEEM

NIMRA SALEEM

SHARE:

पंजाब के लाखों युवा विदेश जाने की चाह रखते हैं। परिवार बच्चों को विदेश भेजने के लिए अपने जमा-पूंजी लगा देते हैं। लोग अवैध तरीके (डंकी रूट) से विदेश जाने के लिए भी लाखों रुपये खर्च करते हैं।

Indians still go on Dunki Route for American Dream what is the truth of  dangerous Donkey route - India Hindi News 'अमेरिकन ड्रीम' के लिए आज भी  Dunki रूट पर जाते हैं

पंजाब यूनिवर्सिटी के यूबीएस के अध्ययन में खुलासा, कम्पैरेटिव माइग्रेशन स्टडीज–2025 में प्रकाशित, माझा, मालवा और दोआबा के 350 परिवारों पर फील्ड सर्वे। पंजाब से विदेश जाने का सपना अब सिर्फ महत्वाकांक्षा नहीं बल्कि कई युवाओं के लिए जोखिम भरा जुआ बनता जा रहा है। पंजाब यूनिवर्सिटी के यूनिवर्सिटी बिजनेस स्कूल (यूबीएस) के ताजा शोध ने खुलासा किया है कि कम शिक्षा, कमजोर अंग्रेजी और कानूनी प्रक्रियाओं की जटिलता के कारण बड़ी संख्या में युवा जान जोखिम में डालकर डंकी रूट अपना रहे हैं। यह शोध अंतरराष्ट्रीय जर्नल कम्पैरेटिव माइग्रेशन स्टडीज–2025 में प्रकाशित हुआ है जिसे माइग्रेशन स्टडी के क्षेत्र में विश्व की प्रमुख पत्रिकाओं में गिना जाता है।

यह शोध पंजाब यूनिवर्सिटी के प्रो. कुलविंदर सिंह, सेंट्रल यूनिवर्सिटी के डॉ. नरेश सिंगला, डॉ. बली बहादुर और डॉ. निरवैर सिंह ने अपने सहयोगियों के साथ किया है। शोध में पंजाब के माझा, मालवा और दोआबा क्षेत्रों के 350 परिवारों का फील्ड सर्वे शामिल है। यह गुणात्मक और मात्रात्मक दोनों पद्धतियों पर आधारित है। शोध को पूरा करने में दो साल लगे, जबकि इसके प्रकाशन में करीब डेढ़ साल का समय लगा। शोध के अनुसार डंकी रूट से विदेश जाना न केवल जानलेवा जोखिमों से भरा है, बल्कि आर्थिक रूप से भी शुरुआती दौर में भारी नुकसान का सौदा साबित हो रहा है।

कौन चुन रहा है डंकी रूट
शोध में कानूनी और अनियमित (डंकी) प्रवासियों के बीच स्पष्ट सामाजिक-आर्थिक अंतर सामने आया है। कानूनी तरीके से विदेश जाने वाले प्रवासी आमतौर पर अपेक्षाकृत संपन्न परिवारों से आते हैं जिनके पास औसतन 7.8 एकड़ जमीन और 5 से 6 सदस्यों का परिवार होता है। वहीं, डंकी रूट अपनाने वाले परिवारों के पास औसतन 6.9 एकड़ जमीन है, लेकिन उन पर 6 से 7 सदस्यों की जिम्मेदारी होती है। शिक्षा यहां निर्णायक भूमिका निभाती है। कम पढ़े-लिखे और अंग्रेजी में कमजोर युवा अक्सर एजेंटों के झांसे में आकर खतरनाक और अनिश्चित रास्ते चुन लेते हैं।

खर्च में तीन गुना का अंतर
शोध का सबसे चौंकाने वाला पहलू प्रवासन की लागत है। कानूनी तरीके से विदेश जाने में जहां औसतन 4 लाख रुपये खर्च होते हैं, वहीं डंकी रूट से जाने पर यह खर्च 13 से 14.4 लाख रुपये या उससे अधिक तक पहुंच जाता है यानी लगभग तीन गुना। इस भारी रकम की व्यवस्था के लिए करीब 90 प्रतिशत परिवारों को जमीन बेचनी या कर्ज लेना पड़ता है। डंकी रूट से विदेश पहुंचने के बाद लोगों को तुरंत काम नहीं मिलता, किराया अधिक देना पड़ता है और कम वेतन पर काम करना पड़ता है। नतीजतन पहला साल आर्थिक नुकसान में गुजरता है। कई लोग 15 लाख रुपये से अधिक खर्च होने की बात स्वीकारने से भी डरते हैं, ताकि किसी तरह की कानूनी कार्रवाई न हो।

डंकी रूट अपनाने की मुख्य वजहें
अध्ययन के अनुसार डंकी प्रवासन के पीछे प्रमुख कारणों में अंग्रेजी लैंग्वेज टेस्ट में असफलता, कम शिक्षा और स्किल सर्टिफिकेट का अभाव शामिल है। कई युवा काम में दक्ष होते हैं लेकिन प्रमाण पत्र न होने के कारण वे कानूनी प्रवासन के योग्य नहीं हो पाते। डंकी प्रवासियों में 98 प्रतिशत पुरुष और सिर्फ 2 प्रतिशत महिलाएं हैं जबकि कानूनी प्रवासियों में 87.3 प्रतिशत पुरुष और शेष महिलाएं शामिल हैं। शोध यह भी संकेत देता है कि सोशल नेटवर्क और एजेंटों के जरिए बना यह सिस्टम मानव तस्करी के नेटवर्क से जुड़ा हुआ है।

इसलिए नहीं हो पाती एजेंटों पर कार्रवाई
शोध में बताया गया है कि स्थानीय एजेंट लोगों को पहले विजिटर वीजा पर कानूनी तरीके से विदेश भेजते हैं। इसके बाद दुबई, जॉर्जिया या अन्य देशों के जरिए उन्हें अमेरिका या यूरोप पहुंचाया जाता है। कागजों में सब कुछ ‘लीगल’ दिखने के कारण इस अनियमित प्रवासन पर कार्रवाई करना मुश्किल हो जाता है।

शोधकर्ताओं के सुझाव

  • शोधकर्ताओं ने केंद्र और राज्य सरकारों को सुझाव दिए हैं कि
  • स्किल सर्टिफिकेशन कोर्स शुरू किए जाएं
  • लैंग्वेज टेस्ट को अधिक व्यावहारिक बनाया जाए
  • सुरक्षित और कानूनी प्रवासन के रास्ते आसान किए जाएं
  • माइग्रेशन पॉलिसी को अनरिस्ट्रिक्टिव बनाया जाए
NIMRA SALEEM
Author: NIMRA SALEEM

सबसे ज्यादा पड़ गई