उमरिया के पुराने बस स्टैंड के पास स्थित हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में गुरुवार को एक दर्दनाक घटना सामने आई। आदिम जाति कल्याण विभाग में निरीक्षक (Inspector) के पद पर पदस्थ संदीप सिंह धुर्वे अपने सरकारी क्वार्टर में अचेत अवस्था में मिले। देर तक उनके बाहर न दिखने पर पड़ोसियों को शक हुआ और उन्होंने तुरंत पुलिस को इसकी सूचना दी।
घर में बेहोशी की हालत में मिले, अस्पताल ले जाते ही डॉक्टर ने किया मृत घोषित
नीलगंगा थाना पुलिस मौके पर पहुँची और दरवाज़ा खोलकर देखा तो संदीप सिंह धुर्वे फर्श पर पड़े हुए थे। उन्हें तुरंत जिला अस्पताल पहुँचाया गया, लेकिन वहाँ मौजूद डॉक्टरों ने जाँच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। अचानक हुई इस घटना से विभाग और स्थानीय इलाक़े में शोक की लहर दौड़ गई है।
दो दिन से दफ़्तर नहीं पहुँचे थे, कुछ महीनों में दो बार अटैक भी आया था
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक संदीप सिंह पिछले दो दिनों से ऑफिस नहीं आए थे। बताया जा रहा है कि पिछले कुछ महीनों में उन्हें दो बार अटैक आ चुका था, जिस कारण उनके स्वास्थ्य को लेकर पहले से ही चिंता बनी हुई थी। वे अकेले रहते थे, और इसी वजह से उनकी तबीयत बिगड़ने का किसी को समय पर पता नहीं चल सका।
2006 से सेवा में, शांत और जिम्मेदार अधिकारी के रूप में जाने जाते थे
संदीप सिंह मूल रूप से छिंदवाड़ा जिले के निवासी थे और वर्ष 2006 से आदिम जाति कल्याण विभाग में कार्यरत थे। सहकर्मियों का कहना है कि वे शांत स्वभाव, जिम्मेदार और अपने कार्य के प्रति समर्पित अधिकारी थे। उनकी अचानक मौत की खबर से पूरा विभाग सदमे में है।
पुलिस की जांच जारी, पोस्टमार्टम रिपोर्ट से स्पष्ट होगा मौत का कारण
पुलिस टीम ने कमरे के हालात, मिले सामान और आसपास के सभी तथ्यों की बारीकी से जांच की है।
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मौत का सही समय
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और असली कारण
— दोनों ही पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद स्पष्ट होंगे।
फिलहाल पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। परिजनों को सूचना दे दी गई है और अंतिम संस्कार की तैयारी की जा रही है।
अकेले रहने वालों की सुरक्षा को लेकर फिर उठे सवाल
स्थानीय लोगों ने कहा कि यदि उनकी तबीयत खराब होने की जानकारी किसी को समय रहते मिल जाती तो शायद स्थिति अलग होती। घटना ने एक बार फिर अकेले रहने वाले लोगों की सुरक्षा, स्वास्थ्य निगरानी और समय-समय पर पड़ोसियों द्वारा ध्यान देने की आवश्यकता पर सवाल खड़ा किए हैं।
विभागीय अधिकारी और कर्मचारी इस दुख की घड़ी में संदीप सिंह के परिवार के साथ खड़े होने की बात कह रहे हैं।