Rajasthan: सरकारी योजनाओं में करोड़ों की ठगी उजागर, ई-मित्र संचालक गिरफ्तार, मास्टरमाइंड विक्रम से जुड़े तार

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Shikha Bhardwaj

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दौसा जिले के सिकराय इलाके में ई-मित्र संचालक की गिरफ्तारी ने सरकारी योजनाओं में हो रही करोड़ों की साइबर ठगी का पूरा जाल उजागर कर दिया है। झालावाड़ पुलिस की कार्रवाई में सामने आए तथ्यों से पता चला है कि यह कोई सामान्य फर्जीवाड़ा नहीं, बल्कि एक संगठित नेटवर्क था, जिसकी कमान कथित मास्टरमाइंड विक्रम सैनी संभाल रहा था। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े सभी लोगों और उनकी गतिविधियों की गहराई से जांच कर रही है।Rajasthan police bust interstate cyber syndicate defrauding welfare schemes  - The Hindu

मामला तब सामने आया जब सरकारी योजनाओं—खासकर पीएम किसान सम्मान निधि—में गड़बड़ी की शिकायतें बढ़ने लगीं। इसके बाद झालावाड़ पुलिस ने सिकराय में तहसील कार्यालय के बाहर चल रही एक ई-मित्र दुकान पर छापा मारा। दुकान से कंप्यूटर, लैपटॉप, डिजिटल रिकॉर्ड और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए गए। प्रारंभिक पूछताछ में संचालक ने माना कि वह विक्रम सैनी के संपर्क में था और उसी के निर्देश पर लाभार्थियों के डाटा में हेरफेर कर फर्जी ट्रांजैक्शन किए जाते थे।

पुलिस जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि इस गिरोह ने सरकारी पोर्टलों की तकनीकी कमजोरियों का फायदा उठाकर अपात्र व्यक्तियों को योजनाओं की सूची में शामिल किया और ओटीपी बायपास जैसी तकनीकों से सरकारी धन की निकासी की। आरोपी विक्रम सैनी पर पहले से 25 हजार रुपये का इनाम घोषित था और उसे हाल ही में जयपुर से गिरफ्तार किया गया था। बताया जा रहा है कि वह सैकड़ों फर्जी आईडी बनाकर एजेंटों को बेचता था और बदले में भारी रकम वसूलता था।

जांच टीम के अनुसार, इस नेटवर्क में कई स्तरों पर लोग जुड़े थे। रामावतार सैनी नाम का व्यक्ति अपात्र लोगों का डाटा इकट्ठा करता था, जिसे आगे नरेश सैनी के माध्यम से विक्रम तक पहुंचाया जाता था। इसके बाद फर्जी लाभार्थी तैयार किए जाते और योजनाओं के पैसे गलत खातों में ट्रांसफर किए जाते थे। इस पूरे मामले में अब तक 40 से अधिक लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि कई और नाम पुलिस की निगरानी में हैं।

छापेमारी के दौरान पुलिस को विक्रम सैनी की अवैध कमाई से खरीदी गई करोड़ों की संपत्तियों से संबंधित दस्तावेज भी मिले हैं। जांच में पता चला है कि उसने अलग-अलग शहरों में मकान, फ्लैट और दुकानें खरीदीं, जिनमें कई संपत्तियां परिवार और रिश्तेदारों के नाम पर दर्ज हैं। पुलिस अब इस साइबर गिरोह की मनी ट्रेल, संपत्तियों और जुड़े सभी लोगों की भूमिका की विस्तृत जांच कर रही है, ताकि पूरे नेटवर्क को खत्म किया जा सके।

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Author: Shikha Bhardwaj

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