बैतूल में जनधन खातों के ज़रिए करोड़ों का साइबर फ्रॉड, मृत व्यक्ति का खाता भी किया गया इस्तेमाल
मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में पुलिस ने एक ऐसे साइबर फ्रॉड नेटवर्क का पर्दाफाश किया है, जिसने गरीब और मजदूर वर्ग के लोगों के जनधन खातों को अवैध रूप से इस्तेमाल कर करीब 10 करोड़ रुपये के हेरफेर को अंजाम दिया। जांच में यह भी सामने आया है कि जिन खातों से लेनदेन किए जा रहे थे, उनमें से एक मृत व्यक्ति का खाता भी शामिल था, जिसे नियमों के विपरीत सक्रिय कर लिया गया था।
मामला तब उजागर हुआ जब खेड़ी गांव के विश्राम इवने ने शिकायत दी कि उनके जनधन खाते से लगभग दो करोड़ रुपये की संदिग्ध ट्रांजेक्शन हुई है। पुलिस ने जब खाते की गतिविधियों की तहकीकात की, तो पता चला कि सिर्फ उनके नहीं, बल्कि गांव के छह अन्य लोगों के खातों से भी लगातार भारी रकम का लेन-देन किया जाता रहा है।
बैतूल एसपी वीरेंद्र जैन के मुताबिक, जांच के दौरान पुलिस को पता लगा कि इस पूरी धोखाधड़ी का संचालन इंदौर निवासी अंकित राजपूत कर रहा था। उसके साथ बैतूल के खेड़ी गांव में कार्यरत दो बैंक कर्मचारी—राजा और आयुष चौहान—इस नेटवर्क में शामिल थे। इसके अलावा इंदौर का ही नरेंद्र राजपूत भी इस रैकेट से जुड़ा हुआ पाया गया।
पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर इनके पास से 15 मोबाइल फोन, 26 सिम कार्ड, 11 पासबुक, महत्त्वपूर्ण दस्तावेज और 28,000 रुपये नकद बरामद किए हैं।
जांच में यह सामने आया कि गिरोह पहले गरीब और अनजान लोगों के बैंक खाते हासिल करता था। फिर साइबर ठगी से प्राप्त राशि को इन्हीं खातों में ट्रांसफर करवाया जाता था और बाद में पैसा निकालकर बांट लिया जाता था। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि जिन सात खातों में लेन-देन हुआ है, उनमें से एक व्यक्ति राजेश बर्डे का खाता था, जिसकी मौके पर ही मृत्यु हो चुकी थी, लेकिन खाते को अवैध तरीके से चालू रखकर फ्रॉड किया जा रहा था।
मुंबई, बैंगलुरु और देश के अन्य शहरों से जब ठगी के पीड़ितों ने शिकायत की, तब कई खातों को ब्लॉक किया गया और पूरे नेटवर्क का खुलासा हुआ। फिलहाल पुलिस ने लगभग 10 करोड़ रुपये की ठगी को प्रमाणित किया है, लेकिन अधिकारियों का मानना है कि यह आंकड़ा जांच में बढ़कर 30 से 40 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।