प्रयागराज, 30 अगस्त — कौड़िहार के पूर्व जिला पंचायत सदस्य रणधीर यादव (40) की हत्या के बाद पुलिस द्वारा लावारिस शव मानकर अंतिम संस्कार कर दिए जाने से परिजन स्तब्ध हैं। छह दिन तक बेटे की तलाश में दर-दर भटकते रहे पिता राम अभिलाष यादव ने जब कपड़ों और तस्वीरों से शव की पहचान की, तब तक अंतिम संस्कार हो चुका था।

🕵️♂️ दोस्ती में छिपी साजिश
हत्या के मामले में रणधीर के करीबी दोस्त राम सिंह और उदय यादव मुख्य आरोपी हैं। पुलिस जांच में सामने आया कि उदय की पत्नी अंजली यादव की संदिग्ध मौत (11 जुलाई) भी इस साजिश से जुड़ी हो सकती है। अंजली की मौत जहर खाने से हुई थी, लेकिन परिजनों ने पुलिस को सूचना दिए बिना अंतिम संस्कार कर दिया। अब इस मामले की जांच के लिए अलग टीम गठित की गई है।
🚨 हत्या की साजिश और फरार आरोपी
पुलिस के अनुसार, रणधीर को बहाने से ढाबे पर बुलाकर शराब पिलाई गई और स्कॉर्पियो में बैठाकर गला दबाकर हत्या की गई। शव को रेलवे ट्रैक पर फेंक दिया गया, जिससे वह आठ टुकड़ों में मिला। पहचान न होने पर पुलिस ने 72 घंटे बाद शव का अंतिम संस्कार कर दिया।
मुख्य आरोपी उदय यादव, उसके भाई विजय यादव, नौकर सुजीत श्रीवास्तव और अन्य की तलाश में पुलिस टीमें दबिश दे रही हैं। राम सिंह और लीला यादव को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है।
⚖️ प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल
नवाबगंज और पूरामुफ्ती थानों के बीच गुमशुदगी और अज्ञात शव की सूचना साझा न होने से यह चूक हुई। पुलिस नियमों के अनुसार अज्ञात शव मिलने पर आसपास के जिलों में फोटो और हुलिया साझा करना अनिवार्य है, साथ ही डीएनए/फिंगरप्रिंट सुरक्षित कर अंतिम संस्कार किया जाना चाहिए।
🗣️ राजनीतिक प्रतिक्रिया और न्याय की गुहार
रणधीर यादव के पैतृक गांव मोहम्मदपुर में विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता पहुंचे और परिजनों को सांत्वना दी। पत्नी बबली यादव, जो स्वयं जिला पंचायत सदस्य हैं, ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से न्याय की गुहार लगाई है। उन्होंने कहा कि पति की हत्या गहरी साजिश थी और परिवार को खतरा है।