US Tariffs: ट्रंप के टैरिफ को संघीय अदालत ने क्यों बताया अवैध, भारत पर लगे आयात शुल्क पर आगे क्या; कितनी राहत?

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संघीय अपीलीय अदालत का ट्रंप के टैरिफ पर रोक लगाने का फैसला क्यों अहम है? कोर्ट ने निचली अदालत के निर्णय पर मुहर लगाने के साथ अमेरिकी राष्ट्रपति की शक्तियों को लेकर क्या कहा है? संघीय अदालत के फैसले का क्या असर होगा? भारत के लिए यह फैसला कितनी राहत लेकर आया है? ट्रंप के टैरिफ पर अब आगे क्या होगा? आइये जानते हैं.

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से दुनिया के अलग-अलग देशों पर लगाए गए टैरिफ को वॉशिंगटन की एक संघीय अपीलीय अदालत ने अवैध करार दे दिया है। कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले पर मुहर लगाते हुए कहा कि ट्रंप की तरफ से लगाए गए अधिकतर आयात शुल्क गैरकानूनी हैं। इस दौरान कोर्ट ने इस ताकत का इस्तेमाल करने की राष्ट्रपति की शक्तियों पर भी सवाल उठाया।

क्या संघीय अदालत के फैसले से दुनिया की अधिकतर अर्थव्यवस्थाओं पर असर?
गौरतलब है कि ट्रंप प्रशासन की तरफ से अपने व्यापार साझेदारों पर कम से कम 10 फीसदी टैरिफ लगाया गया है। वहीं, भारत और ब्राजील जैसे देशों पर अमेरिका की तरफ से लगाए गए टैरिफ की दर अब 50 फीसदी हो चुकी है। हालांकि, अमेरिकी संघीय अदालत का फैसला दुनिया की अधिकतर अर्थव्यवस्थाओं के लिए राहत भरा फैसला बनकर आया है।

ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर संघीय अपीलीय अदालत का ट्रंप के टैरिफ पर रोक लगाने का फैसला क्यों अहम है? कोर्ट ने निचली अदालत के निर्णय पर मुहर लगाने के साथ अमेरिकी राष्ट्रपति की शक्तियों को लेकर क्या कहा है? संघीय अदालत के फैसले का क्या असर होगा? भारत के लिए यह फैसला कितनी राहत लेकर आया है? ट्रंप के टैरिफ पर अब आगे क्या होगा?

ट्रंप के टैरिफ के खिलाफ क्यों अहम है संघीय कोर्ट का फैसला?

  • संघीय अदालत का फैसला ट्रंप के उस वैश्विक व्यापार ढांचे को बदलने की कोशिश पर बड़ा अवरोध है, जिसके जरिए वह अमेरिका के साथ व्यापार करने वाले देशों पर टैरिफ लगाकर ज्यादा से ज्यादा राजस्व जुटाने का मौका ढूंढ रहे थे।
  • कोर्ट के फैसले के बाद अब ट्रंप की तरफ से लगाए गए टैरिफ पर रोक लगना लगभग तय माना जा रहा है। हालांकि, व्हाइट हाउस कई बार कह चुका है कि वह टैरिफ के खिलाफ दिए गए किसी भी फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगा।

संघीय अदालत ने ट्रंप के टैरिफ के फैसले-राष्ट्रपति की शक्तियों पर क्या कहा?
⦁    संघीय अपीलीय अदालत ने अमेरिकी राष्ट्रपति की ओर से आपातकाल में मिलने वाली शक्तियों के गलत इस्तेमाल की बात कही। 11 जजों की पीठ में 7 जजों ने ट्रंप के टैरिफ लगाने के फैसले को गैरकानूनी करार दिया, वहीं 4 जजों के फैसले असहमति वाले थे।
⦁    बहुमत के फैसले में अदालत ने कहा, “क्योंकि हम सहमत हैं कि आपातकाल कानून (अंतरराष्ट्रीय आपातकाल आर्थिक शक्ति कानून) राष्ट्रपति को आयात पर नियम बनाने की शक्ति देता है, लेकिन यह उन्हें कार्यकारी आदेशों के जरिए टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं देता।

⦁    कोर्ट ने कहा, “टैक्स और टैरिफ लगाने की शक्तियां संविधान की तरफ से सिर्फ और सिर्फ विधायी शाखा- संसद (कांग्रेस) के पास है। ट्रंप ने अपने सबसे व्यापक टैरिफ लागू करते समय जिस कानून का सहारा लिया, वह असल में उन्हें आयात शुल्क लागू करने की शक्ति नहीं देता है।”
⦁    “जब संसद ने आईईईपीए कानून तैयार किया था, तब इसमें टैरिफ, शुल्क या टैक्स जैसे शब्द नहीं रखे। इस तरह के शब्द न होने की वजह से तय तौर पर संसद राष्ट्रपति को मिलने वाली असीमित ताकत को सीमित करना चाहता था।”

निचली अदालत ने मई में क्या कहा था?
गौरतलब है कि इस साल मई में अमेरिका की निचली अदालत- यूएस कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड यानी अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय व्यापार न्यायालय ने भी ट्रंप के टैरिफ को अवैध करार दिया था। निचली अदालत ने कहा था कि अमेरिकी संविधान संसद को अन्य देशों के साथ व्यापार को विनियमित करने का विशेष अधिकार देता है। लेकिन, अमेरिकी अर्थव्यवस्था की सुरक्षा के लिए राष्ट्रपति आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल कर इस प्रावधान को रद्द नहीं कर सकते।

अदालत ने कहा था कि ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम (आईईईपीए) का गलत इस्तेमाल किया है। ये कानून राष्ट्रपति को आपातकाल में कुछ खास शक्तियां देता है, लेकिन कोर्ट ने कहा कि ट्रंप ने इसका बिना किसी ठोस आधार के ही इस्तेमाल कर लिया। हालांकि, अदालत ने ऑटोमोबाइल, स्टील और एल्युमीनियम पर एक अलग कानून का इस्तेमाल कर लगाए गए कुछ इंडस्ट्री विशिष्ट टैरिफ पर रोक नहीं लगाई गई है।

संघीय अदालत के फैसले का क्या असर होगा?
वॉशिंगटन स्थित संघीय अपीलीय अदालत ने अपने फैसले को 14 अक्तूबर से लागू करने की बात कही है। यानी इस तारीख तक ट्रंप की ओर से लगाए गए टैरिफ लागू रहेंगे। इस दौरान ट्रंप प्रशासन कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे सकता है, जो कि तय माना जा रहा है।

कोर्ट के इस निर्णय के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने ट्रूथ सोशल प्लेटफॉर्म पर शुक्रवार को एक पोस्ट में कहा, “सभी टैरिफ अभी भी प्रभावी हैं। अगर यह टैरिफ हट जाते हैं, तो यह हमारे देश के लिए पूरी तरह आपदा जैसा होगा।”

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फैसले पर व्हाइट हाउस के प्रवक्ता कुश देसाई ने कहा, “राष्ट्रपति ट्रंप ने कानूनी तरीके से संसद द्वारा दी गई टैरिफ लगाने की ताकतों का इस्तेमाल किया, ताकि हमारी राष्ट्रीय और आर्थिक सुरक्षा को विदेशी खतरों के खिलाफ बरकरार रखा जा सके। हम इस मामले में अंतिम जीत की तरफ देख रहे हैं।”

दुनिया-भारत के लिए यह फैसला कितना राहत भरा?
कुल मिलाकर कोर्ट के आदेश के मुताबिक, ट्रंप के टैरिफ फिलहाल प्रभावी रहेंगे। यानी भारत के निर्यातकों को 14 अक्तूबर तक 50 फीसदी टैरिफ से कोई छूट मिलने की संभावना नहीं है। हालांकि, इस दौरान मामला सुप्रीम कोर्ट जाने की संभावना है और इस पर सुनवाइयों का दौर भी अगले कुछ महीनों तक चल सकता है।

अमेरिकी मीडिया के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट सुनवाई के दौरान टैरिफ 14 अक्तूबर तक प्रभावी रहने की डेडलाइन को और आगे बढ़ाने का फैसला ले सकता है। इससे आगे सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद ही टैरिफ के मुद्दे पर किसी तरह की राहत मिलने की संभावना है।

दूसरी तरफ भारत के लिए भी संघीय अपीलीय अदालत का फैसला कोई तत्काल राहत लेकर नहीं आया है। यानी भारतीय उत्पादों पर 50 फीसदी टैरिफ लगना जारी रहेगा। अगर कोर्ट की तरफ से ट्रंप के टैरिफ को तत्काल हटाने की बात भी कह दी जाती तो भी भारत के कुछ उत्पादों पर लगा सिर्फ 25 फीसदी टैरिफ ही हटता, क्योंकि ट्रंप ने अमेरिका के व्यापार घाटे को कम करने के लिए आईईईपीए कानून के जरिए भारतीय उत्पादों पर आयात शुल्क लगाने का फैसला किया था।

यानी भारत पर रूस से तेल खरीद की वजह से जुर्माने के तौर पर लगाया गया 25 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ फिर भी बरकरार रहेगा। ट्रंप प्रशासन ने इस जुर्माने के लिए आईईईपीए कानून के साथ-साथ व्यापार विस्तार अधिनियम 1962 की धारा 232, व्यापार अधिनियम 1974 की धारा 301 और धारा 604 के तहत पाबंदियां लागू की हैं।

अमेरिकी टैरिफ के मुद्दे पर अब आगे क्या?
ट्रंप प्रशासन को निचली अदालत और उच्च न्यायालय में टैरिफ के मुद्दे पर हार मिलने के बाद अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट में जाना तय हो गया है। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट में अब इस मामले में संविधान की व्याख्या से संबंधित विधि के महत्वपूर्ण प्रश्नों पर निर्णय होना है। चूंकि सुप्रीम कोर्ट का फैसला सर्वमान्य और अंतिम होना तय है, इसलिए यह एक तरह से अमेरिकी राष्ट्रपति और अमेरिकी संसद की शक्तियों के बंटवारे और इसकी सीमाओं को बताने का निर्णय होगा।

माना जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट ट्रंप के टैरिफ के मुद्दे पर अक्तूबर के पहले हफ्ते से सुनवाई शुरू कर सकती है। इसके बाद मामला कोर्ट में कितना लंबा खिंचेगा, यह तय नहीं है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगर ट्रंप प्रशासन सुप्रीम कोर्ट में हार जाता है तो यह देखना अहम होगा कि अमेरिकी सरकार अपने आयातकों से ही वसूला गया टैरिफ कैसे लौटाएगी।

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