कानपुर के ग्रामीण क्षेत्रों में आवारा कुत्तों, बंदरों और अन्ना मवेशियों का आतंक दिनों-दिन बढ़ता जा रहा है। हालात ऐसे हो गए हैं कि लोग खेतों, सड़कों और घरों में इन जानवरों से परेशान हैं। ग्रामीणों का कहना है कि रोजाना इन जानवरों के हमलों से कोई न कोई घायल हो रहा है।

खासकर गली-कूचों में घूमने वाले खूंखार कुत्तों का खतरा ज्यादा बढ़ गया है। मीट की दुकानों से बचा मांस खाकर यह और भी आक्रामक हो गए हैं। पिछले तीन दिनों में बाढ़ प्रभावित एक बच्चा भी इनके हमले का शिकार हो चुका है। वहीं खेतों में अन्ना मवेशी फसलों को बर्बाद कर रहे हैं और घरों के आसपास बंदरों का झुंड उत्पात मचा रहा है।
ग्रामीणों की मुश्किल यह है कि अगर वे जानवरों को लाठी-डंडों से भगाने की कोशिश करते हैं तो एनिमल लवर्स सोशल मीडिया पर वीडियो डालकर उन पर केस करवा देते हैं।
शिकायतें बेअसर
नारायणपुर गांव के प्रधान ने बताया कि बंदरों को पकड़वाने के लिए कई बार प्रशासन से शिकायत की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। थक-हारकर ग्रामीणों ने चंदा इकट्ठा कर खुद बंदरों को पकड़वाने का प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द ही प्रशासन ने ठोस कदम नहीं उठाए तो यह समस्या और विकराल रूप ले लेगी।