पीलीभीत: धार्मिक स्थल पर निर्माण को लेकर बवाल, हाईवे जाम करने की कोशिश
पीलीभीत शहर की केजीएन टू कॉलोनी में गुरुवार को एक पुराने धार्मिक स्थल के नवनिर्माण को लेकर तनाव की स्थिति बन गई। हिंदूवादी संगठनों के कार्यकर्ताओं ने वहां काम शुरू कराने की कोशिश की, तो दूसरे समुदाय के लोगों ने इसका विरोध किया। विवाद बढ़ने पर प्रशासन व पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और निर्माण रुकवा दिया। नाराज पदाधिकारियों ने टनकपुर हाईवे पर जाम लगाने की कोशिश की, लेकिन अफसरों की समझाइश के बाद स्थिति नियंत्रित हो सकी।
सुबह से ही बढ़ा तनाव
गुरुवार की सुबह हिंदू जागरण मंच और हिंदू महासभा से जुड़े कार्यकर्ता कॉलोनी के धार्मिक स्थल पहुंचे और सफाई करवा कर निर्माण सामग्री डलवा दी। जैसे ही काम शुरू हुआ, दूसरे पक्ष के लोगों ने डीएम को ज्ञापन सौंपकर आपत्ति जताई। उनका कहना था कि जिस जमीन पर निर्माण हो रहा है वह नजूल भूमि है और नगर पालिका के रिकॉर्ड में दर्ज है, इसलिए वहां निर्माण पूरी तरह अवैध है। मामले की गंभीरता देखते हुए डीएम ने जांच का जिम्मा सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपा।
प्रशासन ने रोका काम, हाईवे पर हंगामा
नगर पालिका और राजस्व विभाग की टीम पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची और निर्माण कार्य रोक दिया। इसके बाद संगठन से जुड़े लोग सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय पहुंचे। अधिकारियों ने साफ कहा कि जमीन नजूल की है और अनुमति लिए बिना कोई निर्माण संभव नहीं है। इस चेतावनी से नाराज कार्यकर्ता नकटादाना चौराहे पर पहुंच गए और टनकपुर हाईवे जाम करने लगे।
जाम के बीच पलटा ई-रिक्शा, दो घायल
जाम के दौरान दबाव में एक ई-रिक्शा चालक ने फुटपाथ से वाहन निकालने की कोशिश की, जिससे वह पलट गया। हादसे में सात सवारियों में से दो लोग घायल हो गए। पुलिस ने तुरंत घायलों को जिला अस्पताल पहुंचाया।
पुलिस की सख्ती से पीछे हटे कार्यकर्ता
तनाव को बढ़ता देख सिटी मजिस्ट्रेट विजय वर्धन तोमर, एसडीएम सदर श्रद्धा सिंह, सीओ सिटी दीपक चतुर्वेदी और कोतवाली व सुनगढ़ी थानों की पुलिस फोर्स मौके पर पहुंच गई। कार्यकर्ताओं और अफसरों के बीच नोकझोंक भी हुई, लेकिन पुलिस की सख्ती देखकर अधिकांश लोग पीछे हट गए और जाम समाप्त हो गया।
सिटी मजिस्ट्रेट का बयान
सिटी मजिस्ट्रेट विजय वर्धन तोमर ने बताया कि जिस भूमि पर निर्माण का प्रयास किया गया वह नजूल और पालिका की संपत्ति है। ऐसे में बिना अनुमति किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य संभव नहीं है। मामले में नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।