‘सैयारा’ और ‘उदयपुर फाइल्स’ फिल्म ‘सैयारा’ ने बॉक्स ऑफिस पर महीनाभर सफलता पूर्वक पूरा किया। 18 जुलाई को रिलीज हुई यह फिल्म ब्लॉकबस्टर बन चुकी है। अब यह लाखों में सिमट गई है और टिकट खिड़की से विदा लेने की कगार पर है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कल सोमवार को ‘सैयारा’ ने 17 लाख रुपये का कलेक्शन किया है। इस फिल्म का टोटल नेट कलेक्शन 324.4 करोड़ रुपये हो गया है। वहीं, ‘उदयपुर फाइल्स’ सिनेमाघरों से विदा ले चुकी है।

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Ashutosh Rana Interview: एक्टर आशुतोष राणा इन दिनों अपने नाटक ‘हमारे राम’ और आगामी फिल्म ‘हीर एक्सप्रेस’ को लेकर सुर्खियों में हैं। अमर उजाला डिजिटल से बात करते हुए उन्होंने अपने अनुभव साझा किए हैं।

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विस्तार

फिल्मों और थिएटर में अपनी गहरी छाप छोड़ चुके अभिनेता आशुतोष राणा इन दिनों नाटक ‘हमारे राम’ और फिल्म ‘हीर एक्सप्रेस’ को लेकर चर्चा में हैं। अपने शानदार अभिनय के लिए पहचाने जाने वाले राणा ने अमर उजाला से बातचीत में अपने हालिया अनुभवों, ड्रीम रोल्स और नए कलाकारों के साथ काम करने के नजरिए पर खुलकर बात की। पढ़िए बातचीत के कुछ प्रमुख अंश:

आपका नाटक ‘हमारे राम’ देशभर में काफी सराहा जा रहा है। इसकी सफलता को आप कैसे देखते हैं?
भगवान की कृपा से सिर्फ 14 महीनों में हमने पूरे देश में 260 शोज कर लिए हैं और 16 राज्यों तक पहुंच चुके हैं। थिएटर के इतिहास में इतनी जल्दी इतने शोज मिलना बहुत बड़ी उपलब्धि है।

रामायण इतनी विशाल है कि उस पर दस फिल्में भी बनें तो कम हैं, दस धारावाहिक भी आएं तो भी कम हैं। हम पहली बार दुबई गए और वहां भी शो हाउसफुल रहे। ऑडियंस का जो प्यार मिला है, उससे लगता है जैसे किसी बड़ी फिल्म को जब अपार सफलता मिलती है, वैसा ही अपनापन हमारे नाटक को भी मिला है।

आपकी नई फिल्म ‘हीर एक्सप्रेस’ भी रिलीज के लिए तैयार है। इसका अनुभव और निर्देशक उमेश शुक्ला के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा?
मेरे लिए हर फिल्म एक नया मौका होती है, खुद को तोड़कर फिर से नया बनाने का। उमेश शुक्ला ऐसे निर्देशक हैं जो कलाकार को स्वतंत्रता भी देते हैं और जरूरत पड़ने पर गाइड भी करते हैं।

गुलशन ग्रोवर जैसे बेहतरीन अभिनेता के साथ काम करना शानदार अनुभव था। और नए कलाकार प्रीत और दिविता के साथ काम करके भी बहुत मजा आया।
उमेश शुक्ला थिएटर, लेखन और निर्देशन – तीनों को गहराई से समझते हैं। उनकी फिल्में ‘ओह माय गॉड’ और ‘102 नॉट आउट’ इसका उदाहरण हैं। जब आप ऐसे निर्देशक के साथ काम करते हैं जो हर पहलू को जानते हों, तो अभिनेता बिना चिंता के खुद को पूरी तरह उनके हवाले कर सकता है।

आपने कई यादगार भूमिकाएं निभाई हैं। कौन-से ड्रीम रोल्स हैं जिन्हें अभी निभाने की चाहत है?
रावण का किरदार तो मैंने कर लिया। अब मेरा मन है कि मैं कृष्ण का रोल निभाऊं। कृष्ण सिर्फ भगवान ही नहीं, बल्कि गहरे विचारों वाले और जीवन को दिशा देने वाले इंसान भी हैं। उनके ऊपर कई किताबें लिखी गई हैं और उन पर काम करना मेरे लिए बहुत दिलचस्प होगा।

इसी तरह मैं चाणक्य का किरदार करना चाहता हूं। उनका उनका ज्ञान और उनकी नीतियाँ आज भी उतनी ही काम की हैं। कर्ण का रोल भी मेरे दिल के बहुत करीब है … वो महाभारत का सबसे दुखद लेकिन महान योद्धा है। और अगर मौका मिला तो परशुराम भी करना चाहूंगा, जिनमें शक्ति और तपस्या दोनों का अद्भुत संगम है।

ये सब किरदार भारतीय संस्कृति और इतिहास के ऐसे प्रतीक हैं जो समाज को दिशा देते हैं। इन भूमिकाओं को निभाना मेरे लिए सौभाग्य की बात होगी। मैं तो यही प्रार्थना करता हूं कि ये ख्वाहिशें मेरी जरूरत बनकर पूरी हों। और इस सफर की शुरुआत रावण से हो चुकी है।

इस फिल्म में आपने नए कलाकारों के साथ भी काम किया। आज की पीढ़ी के अभिनेताओं को आप किस नजर से देखते हैं?
हमसे पहले की पीढ़ी के पास बहुत सीमित विकल्प थे। हमारे दौर में थिएटर, सिनेमा और टीवी तीनों मौजूद थे। लेकिन आज की पीढ़ी के पास इससे भी ज्यादा विकल्प हैं – रंगमंच, फिल्म, टीवी, ओटीटी और सोशल मीडिया।

इंस्टाग्राम, यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म कलाकारों को अपनी कला दिखाने का मौका देते हैं। जब विकल्प बढ़ते हैं तो असुरक्षा कम होती है और आत्मविश्वास बढ़ता है। यही वजह है कि आज के युवा कलाकार इतने कॉन्फिडेंट नजर आते हैं।

आजकल कई बार कास्टिंग में सोशल मीडिया फॉलोअर्स को देखा जाता है। इससे असली टैलेंट कहीं पीछे तो नहीं छूट जाता?
देखिए, असली कलाकार को हमेशा सही अवसर की जरूरत होती है। कई बार बहुत टैलेंटेड लोगों को मौका नहीं मिल पाता और कभी कम टैलेंट वाले को बड़ा मौका मिल जाता है। लेकिन टिकता वही है जिसके पास हुनर और मेहनत दोनों हों।

सोशल मीडिया सिर्फ आपकी मौजूदगी की घोषणा करता है। आगे वही कलाकार लंबे समय तक चलेगा जिसकी प्रतिभा और कौशल एक साथ काम करें। असली बात यही है कि जब भी मौका मिले, आप उसे कितनी निष्ठा और ईमानदारी से निभाते हैं।

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Author: admln

सबसे ज्यादा पड़ गई

आरोप है कि करीब 45 मिनट बाद फैक्टरी के कुछ वर्कर, जिनका नेतृत्व वर्क हाउस मैनेजर पारस कर रहा था, ने आयकर टीम पर हमला बोल दिया। टीम के सदस्य जब अपनी जान बचाने के लिए गाड़ियों में बैठे तो आरोपियों ने उन्हें बाहर खींचने की कोशिश की। टीम की अर्टिगा गाड़ी पर भारी पथराव किया गया, जिससे उसके शीशे टूट गए। हमले में ड्राइवर जगदीप को गंभीर चोटें आई हैं। एक अन्य हुंडई वर्ना गाड़ी के हैंडल तोड़ दिए और ड्राइवर के साथ हाथापाई कर उसके कपड़े फाड़ दिए। सरकारी दस्तावेज और मुहर फैक्ट्री में छूटे टीम के अनुसार, हमले के दौरान टीम को जान बचाकर भागना पड़ा। इस दौरान आयकर अधिकारी अमरजीत की कुछ किताबें, आधिकारिक मुहर और मोबाइल चार्जर फैक्टरी परिसर में ही छूट गए। मौके पर मौजूद एएसआई तेजपाल ने किसी तरह टीम को सुरक्षित बाहर निकाला, जिसके बाद जॉइंट कमिश्नर शक्ति सिंह भी मौके पर पहुंचे।