Gulzar: एक ऐसा फनकार, जिसने जिस विधा को छुआ उसे ‘गुलजार’ कर दिया; गीतों ही नहीं निर्देशन में भी बिखेरी चमक

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Gulzar Birthday: बॉलीवुड के दिग्गज गीतकार और निर्देशक गुलजार आज अपना 91वां जन्मदिन मना रह हैं। इस मौके पर जानते हैं उनके बारे में और उनके निर्देशन में बनी प्रमुख फिल्में।

Gulzar Birthday Apart From Legendary Lyricist He Is One Of The Finest Director Of Bollywood Know His Movies

विस्तार

आपने कई लोग ऐसे देखे होंगे जो किसी एक काम में पारंगत होंगे और उन्हें उस काम का मास्टर कहा जाता होगा। लेकिन अगर कोई एक नहीं कई कामों में पारंगत हो और जिस काम को करे, उसका मास्टर ही लगे तो उसे ‘गुलजार’ कहते हैं। 18 अगस्त 1934 को अब के पाकिस्तान के झेलम के दीना में जन्में संपूर्ण सिंह कालरा एक ऐसे शख्स हैं, जिन्होंने जिस भी विधा में हाथ डाला उसे गुलजार ही कर दिया। फिर वो चाहें कहानी हो, पटकथा हो, गीत हो, कविता हो या फिर निर्देशन हो। गुलजार ने साहब ने हर काम को बड़ी शिद्दत और लगन से किया है और हर काम में शिखर पर पहुंचकर सफलता हासिल की है। जिंदगी के नौवें दशक में भी वो एक युवा जोश की तरह ही अपने काम को लेकर उत्सुक हैं और उसमें पूरी तन्मयता से लगे हैं।

ये गुलजार ही हैं जो पिछले छह दशक से हर उम्र वर्ग के पसंदीदा बने हुए हैं और आज भी उतने ही रिलेटेबल हैं, जितने 60-70 और 80 के दशक में थे। गुलजार नमक की तरह हैं, जो हर उम्र के लोगों के बीच बड़ी आसानी से घुल जाता है और उसे उसका मनपसंद स्वाद दे जाता है। छह दशक से भी इस लंबे करियर में गुलजार ने स्क्रिप्ट राइटर और स्टोरी राइटर से लेकर गीतकार, निर्देशक और कवि तक अपने अलग-अलग रंग दिखाए हैं। उन्होंने जब कलम पकड़ी है, तो ऐसा जादू ही बिखेरा है, जो हमेशा लोगों को दीवाना बना गया है। फिर उसकी विधा भले कोई भी हो। आज गुलजार उम्र के 91वें वर्ष में प्रवेश कर चुके हैं, लेकिन आज भी उनकी कलम चल रही है और कुछ न कुछ नया गढ़ रही है।

उनके जन्मदिन के मौके पर जानते हैं उनसे जुड़ी कुछ बातें और उनके अलग-अलग रंगों के बारे में। आपने गुलजार के लिखे हुए गाने तो कई सुने होंगे, लेकिन आज आपको प्रमुख रूप से गुलजार के उस पहलू से मिलवाते हैं, जिसके बारे में लोगों को शायद अधिक न पता हो। क्योंकि इसे गुलजार काफी वक्त पहले पूरी तरह से छोड़ चुके हैं, लेकिन छोड़ने से पहले उन्होंने इस विधा में कई यादगार और सुपरहिट कहानियां दी हैं। आज आपको गुलजार से एक निर्देशक के तौर पर मिलवाते हैं और जानते हैं उनके द्वारा निर्देशित कुछ प्रमुख फिल्मों के बारे में।Gulzar Birthday Apart From Legendary Lyricist He Is One Of The Finest Director Of Bollywood Know His Movies

गुलजार एक, रंग अनेक
गुलजार एक हैं, लेकिन उनके रंग अनेक हैं। जब वह गाने लिखने बैठते हैं तो पहला ही गाना लिखते हैं- ‘मोरा गोरा अंग लइ ले, मोहे श्याम रंग दई दे’। जिस बॉलीवुड की दुनिया में गोरे रंग की चमक-दमक ही सबकुछ मायने रखती हो, वहां पहले ही गाने में श्याम रंग की चाहत। जब वो स्क्रीन प्ले लिखते हैं तो ‘आनंद’ जैसी फिल्म सामने आती है। जिसका सार ही ये है कि ‘जिंदगी लंबी नहीं बड़ी होनी चाहिए’। जब वो निर्देशक की कुर्सी पर बैठते हैं तो ‘आंधी’, ‘मौसम’ और ‘माचिस’ जैसी फिल्में सामने आती हैं। जहां संवेदनाएं अपने चरम पर हैं और आपके अंदर भावनाओं का एक तूफान सा छोड़ जाती हैं। जब बड़े पर्दे से छोटे पर्दे की ओर रुख करते हैं और टीवी सीरियल बनाते हैं तो ‘मिर्जा गालिब’ जैसे एक शाहकार से मुलाकात होती है। जब उनके अंदर का बच्चा जागता है तो वो कहता है कि ‘जंगल जंगल बात चली है पता चला है, चड्ढी पहनकर फूल खिला है।’

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‘मेरे अपने’ से निर्देशन की दुनिया में उतरे गुलजार
गीत, स्क्रीन राइटिंग और डायलॉग लिखने के बाद गुलजार ने साल 1971 में निर्देशन की दुनिया में कदम रखा। निर्देशक की कुर्सी पर बैठने के बाद उन्होंने पहली फिल्म बनाई ‘मेरे अपने’। ‘श्याम आए तो उससे कहना कि छेनू आया था।’ ये डायलॉग तो आपने कई बार सुना होगा। ये सुपरहिट डायलॉग गुलजार की ‘मेरे अपने’ का ही है। ये फिल्म एक बूढ़ी विधवा, उसका एक कथित रिश्तेदार और दो युवकों के बीच की कहानी है। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट रही थी और इस फिल्म ने विनोद खन्ना और शत्रुघ्न सिन्हा के करियर में एक अहम बदलाव लाया था। फिल्म में इन दोनों के अलावा मीना कुमार, देवेन वर्मा, असित सेन, असरानी, डैनी डेन्जोंगपा, कैस्टो मुखर्जी, ए के हंगल, दिनेश ठाकुर, महमूद और योगिता बाली प्रमुख भूमिकाओं में नजर आए हैं।

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Author: PRIYA NEWSINDIA