स्वतंत्रता दिवस पर बीएसएफ के उन 16 जांबाजों को वीरता पदक से सम्मानित किया गया है, जिन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में पाकिस्तान को करार जवाब दिया था। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में बहादुर सीमा प्रहरियों द्वारा प्रदर्शित अदम्य साहस और बेजोड़ वीरता का यह उचित ही प्रतिफल है। इसके अतिरिक्त, विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पदक (पीएसएम), ऐसे पांच पदक बीएसएफ कार्मिकों को मिले हैं। उत्कृष्ट सेवा के लिए पदक (एमएसएम), 46 बीएसएफ अधिकारियों और कर्मियों को प्रदान किए गए हैं।
ये है बीएसएफ जवानों की वीरता की कहानी …
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान एसआई व्यास देव और कांस्टेबल सुद्दी राभा को जम्मू क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर 7वीं बटालियन बीएसएफ की अग्रिम चौकियों पर तैनात किया गया था। उन्हें अग्रिम सैनिकों के लिए गोला-बारूद की सप्लाई करने की अहम जिम्मेदारी दी गई थी। जब वे इस जोखिम भरे मिशन को अंजाम दे रहे थे, दुश्मन का 82 मोर्टार शेल अचानक उनके पास आकर गिरा। जब वह शेल फटा तो इन दोनों को गंभीर छर्रे लग गए। एसआई व्यास देव को जानलेवा चोटें आई थीं। खुद की चोटों की विनाशकारी प्रकृति के बावजूद वे होश में रहे और उन्होंने खुद को स्थिर किया। बहादुरी से अपने दिए गए कार्य में लगे रहे। उन्होंने अपने अनुगामी सैनिकों को प्रेरित किया और जबरदस्त साहस का प्रदर्शन किया। बाद में जम्मू के सैन्य अस्पताल में उनके बाएं पैर को दर्दनाक तरीके से काटना पड़ा। कांस्टेबल सुद्दी राभा भी उतने ही दृढ़ और साहसी थे। अत्यधिक पीड़ा व जानलेवा घावों के बावजूद, कांस्टेबल सुद्दी राभा ने हार मानने से इनकार कर दिया। इन दोनों को जो ड्यूटी सौंपी गई थी, इन्होंने उसे पूरा करने में कोई कसर बाकी नहीं रखी। इस वीरतापूर्ण कार्य के सम्मान में, दोनों सीमा प्रहरियों को ‘वीरता पदक’ से सम्मानित किया गया है।

