पीड़ित भोला सिंह ने बताया कि उनकी शादी को 26 साल हो चुके हैं, लेकिन संतान नहीं है। फरवरी 2025 में ई-रिक्शा में सफर के दौरान उनकी मुलाकात किरन नामक महिला से हुई, जिसने खुद को जीएमसीएच-48 में अटेंडेंट बताया और बच्चा गोद दिलाने का विश्वास दिया।

बातचीत के दौरान जब भोला ने अपनी संतान न होने की बात बताई तो किरन ने भरोसा दिलाया कि वह मेडिकल फील्ड और अनाथालय से जुड़ी हैं और बच्चा गोद दिला सकती हैं। लेकिन लंबे समय तक बच्चा न मिलने पर उन्होंने पैसे वापस मांगे। लेकिन आरोपियों ने पीड़ित के पैसे नहीं लौटाए। पीड़ित ने पुलिस को सभी रिकॉर्डिंग और अन्य सबूत दे दिए हैं।
भोला के अनुसार शुरुआत में उन्होंने किरन को तीन किस्तों में 60 हजार रुपये नकद दिए। इसके बाद सेक्टर 32 में एक डॉक्टर से मुलाकत करवाई, जिसने सफेद रंग का एप्रैन पहना हुआ था। डॉक्टर ने भोला को किरन को पैसे देने के लिए कहा।
इसके बाद भोला ने किरन को डेढ़ लाख रुपये और दे दिए। पीड़ित ने कमेटी से पैसे उठाकर रकम दी थी। पीड़ित के अनुसार किरन ने कहा था कि बच्चा दिलाने के लिए वह चार लाख लेते हैं, लेकिन उससे सिर्फ दो लाख ही ले रही हैं।
सेक्टर-32 अस्पताल में डॉक्टर से मुलाकात
किरन ने दोबारा फिर सेक्टर-32 अस्पताल में पुलिस चौकी के पास डॉक्टर से मुलाकात करवाई। डॉक्टर ने एप्रन पहन रखा था और भरोसा दिलाया कि काम हो जाएगा तथा पैसे किरन को देने के लिए कहा। दोबारा सेक्टर-32 में मुलाकात के दौरान डॉक्टर ने 50 हजार रुपये और मांगे, जिससे भोला को शक हो गया। बाद में उन्हें पता चला कि भारत में गोद लेने की कानूनी प्रक्रिया पूरी तरह निशुल्क है।
फोटो-वीडियो भेजकर बनाया भरोसा
भोला ने बताया कि रकम देने के बाद किरन ने बच्चों की तस्वीरें और एक बच्चे की रोते हुए वीडियो व्हाट्सऐप पर भेजी। शक होने पर उन्होंने आरोपियों की बातचीत रिकॉर्ड करनी शुरू कर दी, जिसमें किरन बच्चा दिलाने और रुपये लेने की बात कबूल रही है, जबकि डॉक्टर 50 हजार रुपये मांगते और नौकरी जाने का डर जताता सुनाई दे रहा है।
जांच अधिकारी ने नहीं की कार्रवाई
पीड़ित ने 16 जुलाई को सेक्टर-9 स्थित एसएसपी ऑफिस में शिकायत दी, जिसे मौलीजागरां थाने में जांच के लिए मार्क किया गया। भोला का आरोप है कि थाने में जांच अधिकारी ने उनकी कोई सुनवाई की। एक बार किरन को थाने बुलाया गया, लेकिन उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई, जबकि उसने पुलिस के सामने सब कुछ कबूल किया था। वहीं एसएचओ हरिओम शर्मा ने कहा कि निष्पक्ष जांच की जाएगी।

