Shammi Kapoor Death Anniversary: बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता शम्मी कपूर की आज पुण्यतिथि है। इस मौके पर आइए जानते हैं उनकी जिंदगी से जुड़े किस्से।

आज शम्मी कपूर की पुण्यतिथि है। उनका पूरा नाम शमशेर राज कपूर था। उन्हें फिल्मों में अपनी अलग स्टाइल के लिए जाना जाता था। उन्होंने अपने अभिनय करियर की शुरुआत 1950 के दशक में की थी। वह 1960 के दशक में एक बेहतरीन अभिनेता के तौर पर उभरे। आज उनकी पुण्यतिथि के मौके पर आइए जानते हैं उनके दिलचस्प किस्से।
शम्मी कपूर का जन्म शमशेर राज कपूर के तौर पर हुआ था। उनके पिता का नाम पृथ्वीराज कपूर और मां का नाम रामसरनी मेहरा कपूर था। शम्मी कपूर के दो भाई थे, राज कपूर और शशि कपूर। दोनों हिंदी सिनेमा के बेहतरीन अभिनेता थे। मुंबई में पैदा होने के बावजूद शम्मी कपूर ने अपनी जिंदगी का ज्यादातर हिस्सा कोलकाता में बिताया। उनके पिता थिएटर, स्टूडियो और फिल्मों में एक्टिंग के चलते यहीं रहते थे।

शम्मी कपूर ने साल 1953 में रिलीज हुई फिल्म ‘जीवन ज्योति’ से बॉलीवुड में कदम रखा। इसके बाद उनकी 18 फिल्में असफल रहीं। इससे वह काफी निराश हो गए थे। फिर उन्होंने 1957 में फिल्म ‘तुमसा नहीं देखा’ में काम किया। इस फिल्म के बाद उन्हें कामयाबी मिलनी शुरू हो गई। उन्होंने लगभग 100 फिल्मों में काम किया। उनकी मशहूर फिल्मों में ‘जंगली’, ‘प्रोफेसर’, ‘दिल देके देखो’, ‘चाइना टाउन’, ‘कश्मीर की कली’, ‘प्यार किया तो डरना क्या’, ‘जानवर’ और ‘सिंगापुर’ शामिल हैं।
पत्नी की याद में नहीं पी शराब
शम्मी कपूर के बारे में एक किस्सा बहुत मशहूर है, वह यह है कि उन्होंने अपनी पत्नी के निधन के बाद हर साल 1 जनवरी से लेकर 21 जनवरी तक कभी शराब नहीं पी। गीता बाली शम्मी कपूर की पहली पत्नी थीं। उनका निधन 21 जनवरी 1965 को हुआ था। उनकी पत्नी 1 जनवरी को बीमार हुईं थीं और 21 जनवरी को उनका निधन हुआ था ऐसे में उन्होंने अपनी जिंदगी में 1 जनवरी से लेकर 21 जनवरी के दरमियान कभी शराब नहीं पी।
शम्मी कपूर की दूसरी पत्नी नीला ने एक इंटरव्यू में बताया ‘जब शम्मी कपूर सिगरेट पीने पर आते थे तो वह किसी की नहीं सुनते थे। ऐसा वह किसी खास दिन करते थे। सिगरेट पीने की वजह से साल 2003 में उनके फेफड़े खराब हुए।’ उनके मुताबिक फेफड़ों को ठीक करने के लिए उन्हें जो दवाएं दी गईं इससे उनके गुर्दे खराब हो गए।
कश्मीर से था खास लगाव
शम्मी कपूर को कश्मीर से बहुत लगाव था। उनकी कई फिल्मों की शूटिंग कश्मीर में हुई थी। कश्मीर में शूट हुई उनकी फिल्म ‘कश्मीर की कली’ बहुत मशहूर है। वह कश्मीर के लोगों के बीच बहुत मशहूर थे। निर्देशक राहुल रवैल के मुताबिक वह कश्मीर के लोगों को अक्सर पैसे बांटते थे।
शम्मी कपूर को ‘याहू’ की आवाज के लिए जाना जाता है। उन्होंने 1961 में रिलीज हुई फिल्म ‘जंगली’ के गाने ‘चाहे कोई मुझे जंगली कहे’ के बीच में ‘याहू’ शब्द का इस्तेमाल किया था। यह आवाज इतनी मशहूर हुई कि यह उनकी पहचान बन गई।
भारत में आने से पहले चलाया इंटरनेट
शम्मी कपूर को तकनीक से लगाव था। वह नई चीजों को लेकर उत्साहित रहते थे। उन्होंने 1990 के दशक के शुरुआती दौर में इंटरनेट का इस्तेमाल किया था। उस वक्त भारत में इंटरनेट नहीं आया था। शम्मी कपूर ने कपूर परिवार के लिए एक वेबसाइट भी बनाई थी। इस पर कपूर परिवार के बारे में जानकारी थी। यह वेबसाइट आज भी मौजूद है।

अभिनेत्री मुमताज ने एक इंटरव्यू में बताया कि शम्मी कपूर के निधन से पहले वह उनसे एक पार्टी में मिली थीं। वह शराब पी रहे थे। जब उन्होंने पूछा कि वह शराब क्यों पी रहे हैं, तो उन्होंने कहा कि उनके पास जीने के लिए कुछ ही महीने हैं। कपूर को गुर्दे की बीमारी के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया। 14 अगस्त 2011 को उनका निधन हो गया। भारतीय सिनेमा के 100 वर्ष पूरे होने के मौके पर मई 2013 में उनके सम्मान में भारतीय डाक द्वारा उनकी तस्वीर वाला एक डाक टिकट जारी किया गया।
शम्मी कपूर के कुछ दिलचस्प किस्से
शम्मी कपूर अपने बेबाक अंदाज और जिंदादिली के लिए जाने जाते थे।
वह अपने ऊर्जावान अभिनय और बेहतरीन डांस के लिए जाने जाते थे।
शम्मी कपूर ने मोहम्मद रफी की आवाज को बहुत अहमियत दी।
उन्होंने अभिनेत्री मुमताज को प्रपोज किया था।

