उत्तर प्रदेश में फर्जी पुलिस से जुड़ा यह पूरा केस क्या है? इसके तार कहां-कहां तक फैले थे? पुलिस ने इस मामले में जिन लोगों को गिरफ्तार किया, वे कौन हैं? आरोपी इस पूरी घटना को कब से और कैसे अंजाम दे रहे थे? आइये जानते हैं…

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में पिछले महीने पुलिस ने एक अवैध दूतावास के मामले में नटवरलाल की गिरफ्तारी की थी। अब इसी कड़ी में एक और फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। सामने आया है कि यहां पुलिस ने फर्जी ‘अंतरराष्ट्रीय पुलिस’ का भंडाफोड़ किया है। इस मामले में पुलिस ने छह लोगों को गिरफ्तार किया है।
पुलिस ने इस मामले में जिन छह लोगों को गिरफ्तार किया है, वे सभी पश्चिम बंगाल के रहने वाले हैं। इनमें से चार लोग- विभाष चंद्र अधिकारी (27), अराग्य अधिकारी (26), पिंटू पाल, और समापदमल (25) बीरभूम जिले से हैं। वहीं, बाबुल चंद्र मंडल (27) 24 परगना और आशीष कुमार कोलकाता का रहने वाला है। पुलिस के मुताबिक, विभाष आर्ट्स में ग्रैजुएट है, वहीं अराग्य कानून की पढ़ाई कर चुका है। इसके अलावा बाकी चार लोग 12वीं पास हैं।
पुलिस का कहना है कि चार आरोपियों ने 4 जून को सेक्टर 70 में एक घर किराए पर लिया था। एक हफ्ते के अंदर ही इन लोगों ने इस घर के बाहर कई पोस्टर और संकेतक लगा दिए। इनमें केंद्रीय बलों के अधिकार चिह्नों का भी इस्तेमाल किया गया था, ताकि आम लोगों को यह भारत के सुरक्षाबलों से जुड़े अधिकारियों का दफ्तर ही लगे।यह गैंग अंतरराष्ट्रीय संस्था- इंटरपोल, यूरेशियन पुलिस और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (आईएचआरसी) के साथ भी अपने कथित संपर्क होने का दावा करता था। आरोपी आम लोगों को यह झांसा देते थे कि वे अंतरराष्ट्रीय स्तर को अपराधों और अपराधियों से निपटने वाले संगठन से हैं। यह लोग अपने आप को एक समानांतर पुलिस संगठन करार देते थे, जो कि आधिकारिक कामों में शामिल रहते थे। यह गैंग बीते दो महीनों से इसी तरह फर्जीवाड़े के जरिए चल रहा था।
एक अधिकारी के मुताबिक, आपराधिक गुट खुद को अंतरराष्ट्रीय पुलिस बताने के साथ दावा करता था कि वह विदेश में फंसे लोगों को भारत लौटाने के साथ वीजा दिलाने और जमीन पर कब्जे को छुड़ाने का भी काम करता है। इसके लिए यह संगठन मदद मांगने वाले लोगों से रकम भी लेता था।
चौंकाने वाली बात यह है कि इस गिरोह के लोगों ने खुद को नौकरशाह के तौर पर दर्शाया और खुद पुलिस की तरह कानून से जुड़ा हर काम कराने की भ्रामक जानकारी भी फैलाने लगे। आरोपियों ने अपनी एक वेबसाइट- www.intlpcrib.in भी तैयार की थी, जिसके जरिए ये लोग दान जुटाने का दावा करते थे। इस वेबसाइट पर कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के सर्टिफिकेट लगाए गए थे, ताकि लोगों को यह असली अंतरराष्ट्रीय पुलिस लगे। इन लोगों के पास कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से जुड़ी मोहरें, नकली वर्दियां और फर्जी आईडी कार्ड मौजूद थे, जिनके जरिए यह पीड़ितों से ठगी का काम करते थे।
इस मामले में पूछताछ के दौरान आरोपियों ने कहा कि उनका दफ्तर ब्रिटेन में भी है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी पहले पश्चिम बंगाल में भी ऐसा ऑफिस चला चुके हैं। इनका क्राइम रिकॉर्ड भी पुलिस खंगाल रही है। संदिग्ध कार्यशैली को लेकर कमिश्नरेट पुलिस के साथ एजेंसियां भी सक्रिय हो गई हैं। फिलहाल पुलिस इस गिरोह के चार बैंक खातों की जांच में जुटी है। पुलिस को अंदेशा है कि इन बैंक खातों को हवाला के जरिए धन का आदान-प्रदान करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
