पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने झाड़ग्राम में रैली निकालकर बंगाली प्रवासियों पर कथित हमलों और उनकी पहचान पर सवाल उठाने का विरोध किया। उन्होंने कहा कि बांग्ला बोलने वालों को बांग्लादेशी कहना गलत है। ममता ने चेतावनी दी कि वोटर लिस्ट से किसी बंगाली का नाम नहीं हटना चाहिए। रैली में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए और ‘बंगाल का अपमान नहीं सहेंगे’ के नारे लगे।

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प्रवासी बंगालियों के साथ कथित दुर्व्यवहार
रैली की पृष्ठभूमि में देश के कुछ राज्यों से ऐसी खबरें आई थीं कि बंगाली प्रवासी मजदूरों और कामगारों के साथ भाषा और पहचान को लेकर दुर्व्यवहार हो रहा है। ममता बनर्जी ने कहा कि यह सिर्फ एक भाषा पर हमला नहीं, बल्कि पूरे बंगाली समुदाय की अस्मिता पर वार है। उन्होंने कहा कि बंगाल की संस्कृति, भाषा और पहचान को दबाने की कोई भी कोशिश सफल नहीं होगी। इसके साथ ही ममता ने ये भी कहा कि भाजपा नेता लोगों से उनकी पहचान साबित करने के लिए जन्म प्रमाण पत्र मांग रहे हैं, लेकिन क्या उनके पास अपने दस्तावेज हैं? झारग्राम रैली में उन्होंने ये दावा भी किया कि पिछले दरवाजे से एनआरसी लाने की कवायद चल रही है।
वोटर लिस्ट से नाम हटाने पर ममता की चेतावनी
रैली के दौरान ममता बनर्जी ने ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ के नाम पर वोटर लिस्ट से बंगाली बोलने वालों के नाम हटाने के आरोपों पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने निर्वाचन आयोग को चेतावनी दी कि किसी भी मतदाता का नाम सिर्फ इसलिए नहीं हटना चाहिए क्योंकि वह बंगाली है। ये लोकतंत्र के साथ धोखा होगा और बंगाल की जनता इसे बर्दाश्त नहीं करेगी। वहीं, असम सरकार पर सावल उठाते हुए कहा कि वहां की सरकार को बंगाल के लोगों को एनआरसी नोटिस भेजने का क्या अधिकार है?