पहलगाम में आतंकी हमले में मारे गए विनय नरवाल की पत्नी हिमांशी की दादी और बुआ का रो-रोकर बुरा हाल है। दादी का कहना है कि हाथों से मेहंदी नहीं उतरी और मेरी पोती का संसार उजड़ गया। उन्होंने कहा कि खुशियों को ग्रहण लग गया।

15 दिन में मेरी पोती का संसार उजड़ गया, क्या करूं नियति को शायद यही मंजूर था, अब क्या होगा मेरी पोती का… यह दर्द था पहलगाम में आतंकियों की गोली का शिकार बने नेवी में लेफ्टिनेंट विनय नरवाल की पत्नी हिमांशी की दादी का। घर में दादी फूट-फूटकर रो रहीं थी जबकि अन्य परिजन भी मातम में डूबे हुए थे।
लेफ्टिनेंट विनय नरवाल का विवाह 16 अप्रैल को गुरुग्राम की हिमांशी से हुआ था और उनका ससुराल गुरुग्राम के सेक्टर-47 में स्थित है। इस घटना के बाद से यहां परिवार को ढांढस बांधने के लिए लोगों का आना-जाना जारी रहा।

रोते हुए दादी ने अमर उजाला टीम को बताया कि जनवरी में विनय और उनकी पोती हिमांशी का रिश्ता पक्का हुआ था। छह अप्रैल को दोनों की सगाई हुई और 16 अप्रैल को दोनों की धूमधाम से शादी की गई मगर आज सात दिन बाद उनकी पोती की पूरी दुनिया ही खत्म हो गई। अभी तक तो उसके हाथों की मेहंदी भी नहीं उतरी थी।
Author: planetnewsindia
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