
महिला सशक्तीकरण को बेहद आसान शब्दों में परिभाषित किया जा सकता है कि इससे महिलाएं शक्तिशाली बनती है, जिससे वह अपने जीवन से जुड़े सभी फैसले स्वयं ले सकती है और परिवार और समाज में अच्छे से रह सकती है। समाज में उनके वास्तविक अधिकार को प्राप्त करने के लिए उन्हें सक्षम बनाना महिला सशक्तीकरण है। इसमें ऐसी ताकत है कि वह समाज और देश में बहुत कुछ बदल सके।
यह बातें महिला शशक्तिकरण पखवाड़े के अंतर्गत श्रीमती जलधारा देवी महाविद्यालय हसायन, में कालेज एवं अष्टांगपथ योगपीठ हाथरस के बैनर तले योग कार्यशाला के दौरान योगाचार्य सुमित कुमार सिंह ने बताईं उन्होने कहा कि महिला का स्थान प्राचीन काल से ही महत्वपूर्ण रहा है। महिला को ही सृष्टि रचना का मूल आधार कहा गया है। महिलाएॅ समाज का एक महत्वपूर्ण और आवश्यक अंग है, क्योंकि विश्व की आधी जनसंख्या तकरीबन इन्हीं की है। महिलाएॅ आज भी पूरी तरह सशक्त नहीं हुई हैं, बाहर तो वे हिंसा का शिकार होती है कहा कि महिला सशक्तिकरण का अर्थ है, महिलाओं में आत्म सम्मान, आत्म निर्भरता व आत्मविश्वास जागृत करना है। महिला सशक्तिकरण के लिए वर्तमान में सबसे बड़ी आवश्यकता उनको अपने अधिकारों एवं कर्तव्यो के प्रति सजग होने की है। यदि कोई महिला अपने अधिकारों एवं कर्तव्यो के प्रति सजग और आत्मनिर्भर है, तो उसका आत्मसम्मान अवश्य ऊॅचा होगा और वे देश कि विकास में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है। योगाचार्य ने आयोजित कार्रशाला में सभी छात्राओं एवं शिक्षकों को शारीरिक एवं मानसिक रूप से स्वस्थ एवं शशक्त बनाने हेतु विभिन्न आसनों, प्राणायाम तथा ध्यान का अभ्यास कराया गया। इस दौरान प्रधानाचार्या एवं कालेज स्टाफ के साथ छात्रायें मौजूद रहीं।

Author: Sunil Kumar
SASNI, HATHRAS